सामने टीन की एक छत

News - ART jamming** सामने टीन की एक छत, उसके आगे एक नीचा पर्वत। उसके आगे थोड़ा बड़ा पहाड़ उसके आगे थोड़ा और बड़ा...

Mar 27, 2020, 07:26 AM IST

ART jamming**

सामने टीन की एक छत,

उसके आगे एक नीचा पर्वत।

उसके आगे थोड़ा बड़ा पहाड़

उसके आगे थोड़ा और बड़ा पहाड़।

चलो देखते हैं क्या है

उस बड़े पहाड़ के आगे?

एक पैर रखा टीन की छत पर

दूसरा नीचे पर्वत पर

अब एक छलांग लगाते हैं बड़े पहाड़ पर

एक छलांग और, और बड़े पहाड़ पर।

अब देखते क्या हो बेहूदो!

नीचे कूदो!

रुको! रुको! रुको मेरे यार!

ये तो पता चल ही गया,

क्या है पर्वतों के उस पार।

धत्त! वही टीन की एक छत्त।

वहां समय क्वारंटीन है!

चलो फ़ौरन लौट चलें सुरंग के रास्ते

मसला महीन है।

अशोक चक्रधर

खुर्जा में जन्मे अशोक अपनी हास्य कविताओं के लिए प्रसिद्ध हैं। पद्मश्री से नवाजे जा चुके हैं और जामिया मिलिया इस्लामिया में हिंदी विभाग के प्रमुख रह चुके हैं।

गोपाल स्वामी खेतांची

राजस्थान के एक छोटे से गांव में जन्मे, जो रेत के टीलों से घिरा रहता था। यह टीले अलग-अलग रंग-रूप बिखेरते रहते थे। इनकी पेंटिंग्स में मानवीय भावनाएं झलकती हैं।

कवि अशोक चक्रधर की कविता पर यह पेंटिंग बनाई है गोपाल स्वामी खेतांची ने-

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