पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

गेट: शहर के हिमांशु जैन को सीएस में एआईआर-3

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
{ भोपाल से करीब 20 हजार ने दिया था एग्जाम

सिटी रिपोर्टर . भोपाल

ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (गेट) 2020 का रिजल्ट शुक्रवार शाम जारी हुआ। मार्च के पहले सप्ताह में आयोजित हुई इस परीक्षा में भोपाल से लगभग 20 हजार कैंडिडेट्स शामिल हुए थे। आईआईटी दिल्ली की ओर से आयोजित इस परीक्षा में भोपाल से टॉप-10 में दो स्टूडेंट्स ने जगह बनाई। कंप्यूटर साइंस से हिमांशु जैन ने अॉल इंडिया तीसरी रैंक हासिल की है। इसके अलावा अलग-अलग ब्रांच से सांई संतोष-एआईआर-14, विकास मधेसिया एआईआर-14, अंकित यादव ने एआईआर-24 हासिल की है। वहीं, मैनिट के 7 स्टूडेंट्स ने गेट क्वालीफाई किया है।

{नाम: विकास मधेसिया

{एआईआर-14
(मेटलर्जी ब्रांच)

मैंने गेट की तैयारी थर्ड ईयर से शुरू कर दी थी। क्लास में ही नोट्स बनाकर पढ़ता था। इसके अलावा स्टैंडर्ड बुक्स पढ़ना काफी मददगार रहा। इतना ही नहीं, सेकंड ईयर के दौरान मैंने प्रिवियस ईयर की बुक्स खरीदकर सिर्फ सवालों को देखा और समझने की कोशिश की। यह मेरे लिए काफी हेल्पफुल रहा। इससे परीक्षा का स्टैंडर्ड समझा। मैंने देखा कि गेट सवालों में डीटेल्स बहुत ज्यादा पूछता है, इसके अलावा सवाल भी हर साल रिपीट होते हैं। बस इसी कॉन्सेप्ट को लेकर तैयारियां जारी रखी और इस मुकाम तक पहुंचा। मैं शुरुआती दो से तीन साल एमएनसी में जॉब करना चाहता हूं।

{ मैनिट के 7 स्टूडेंट्स ने भी पाई सफलता

अपनी गलतियों को हाईलाइट करता था, ताकि उन्हें दोहराने से बचूं**

टॉपर्स टिप्स**

{नाम: अंकित यादव

{एआईआर-24
(मेटलर्जी)

मैंने पिछले एक साल में एग्जाम की तैयारी की। पहले मैंने सिलेबस के मुताबिक स्टैंडर्ड बुक्स पढ़ीं। नोट्स बनाकर उनका रिवीजन किया। रोज छह से सात घंटे पढ़ना मेरे लिए बहुत हेल्पफुल रहा। मैं मूलत: राजस्थान के धीरपुर से हूं। पैरेंट्स बहुत ज्यादा एजुकेटेड नहीं थे। उनका सपना था कि मैं बहुत ज्यादा पढ़ूं। पिता किसान और माता गृहणी है। घर की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बाद भी पिता और माता ने कभी किसी भी चीज का अभाव महसूस नहीं होने दिया। मैनिट में एडमिशन लेने के बाद मैंने इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपनी राह मजबूत की।

{नाम: सांई संतोष

{एआईआर-14
(इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन)

यह मेरा सेकंड
अटेम्प्ट था। इससे पहले साल में जब मैंने यह एग्जाम दिया था उस समय मुझे 3 हजार रैंक मिली थी। मैंने उसके बाद अपनी तैयारियों का मॉड्यूल चेंज किया और प्रॉपर ढंग से तैयारी शुरू की। खुद से नोट्स तैयार कर एक समय पर एक ही विषय पर फोकस किया। उसके बाद पहले पढ़ चुके विषयों का रिविजन करता था। यही वजह है कि मैंने पूरे साल में सभी विषयों को बराबर समय दिया और इसी कारण मुझे यह रैंक हासिल हुई। मुझे अब आईआईएससी बेंगलुरू से एमटेक करना है।

{नाम: हिमांशु जैन

{एआईआर-3
(सीएस ब्रांच)

शुरू से लक्ष्य रखा था कि मुझे एमएनसी में काम करना है। इसी वजह से मैंने एसएटीआई विदिशा से 2019 में बीटेक करने के बाद मिले जॉब ऑफर को छोड़कर पढाई जारी रखी। एग्जाम के बाद ही मुझे विप्रो में जॉब ऑफर हुई, लेकिन मैंने उसे ज्वॉइन नहीं किया। यह मेरा दूसरा अटेम्प्ट था। इससे पहले दिए गए अटैम्पट में मैंने जो गलतियां की, उसको इस बार बिल्कुल नहीं दोहराया। मैंने अलग से नोट्स तैयार किए और अपनी गलतियों को हाइलाइट करके रखा ताकि दोबारा उन्हें दोहराने से बचूं। मैं हायर स्टडीज के लिए आईआईटी मुंबई या आईआईएससी बेंगलुरु से एमटेक करूंगा।
खबरें और भी हैं...