रसोई को पॉलीथिन मुक्त बनाने आगे आईं बालिकाएं

News - डीबी स्टार

Oct 13, 2019, 06:50 AM IST
डीबी स्टार
शहर को पॉलीथिन मुक्त बनाने के अभियान में अब बालिकाएं भी शामिल हो गई हैं। उन्होंने दुर्गा अष्टमी से इसका आगाज भी कर दिया है। नन्ही बालिकाओं ने समूह बनाकर उन्हीं घराें में भोजन किया, जहां पॉलीथिन का उपयोग न करने का संकल्प लिया गया। इन बच्चियों का कहना है कि वे इस वर्ष करीब 500 परिवारों की रसोइयों को पॉलीथिन मुक्त करवाना चाहती हैं। उनके इस काम में अब बड़े भी मदद कर रहे हैं। इससे उनका मनोबल बढ़ रहा है और वे तेजी से शहर में सक्रिय हो रही हैं।

बालिकाओं का कहना है कि आमतौर पर लोग घर में बची खाद्य सामग्री पॉलीथिन में भरकर फेंक देते हैं। फिर इन्हें मवेशी पॉलीथिन समेत खा जाते हैं। इससे उनका जीवन खतरे में पड़ जाता है। उन्होंने कई ऐसी फोटो और खबरें पढ़ी हैं, जिनमें गाय के पेट से 20 से 25 िकलो तक पॉलीथिन निकाली गई। मवेशियों के पेट से वेटनरी डॉक्टरों द्वारा ऑपरेशन कर पॉलीथिन निकाली जाती हैं। इसके अलावा जिन मवेशियों का ऑपरेशन नहीं हो सका, वो असमय ही काल के गाल में समा गए।

कोलार से ऐसे की शुरुआत

बच्चियों ने पॉलीथिन मुक्ति अभियान की शुरुआत कोलार इलाके में भंडारों से की। इसके बाद उन्होंने अपने दोस्तों की मदद से आसपास के क्षेत्रों में घर-घर जाकर बात की। सबसे पहले उन्होंने अपने-अपने घरों मेंे पॉलीथिन का इस्तेमाल बंद कराया। इसके बाद दोस्तों से संपर्क कर उनके घर को पॉलीथिन मुक्त बनाया। उन्होंने भंडारों के साथ ही धार्मिक स्थलों पर होने वाले अन्य आयोजनों में पत्तल-दोने का उपयोग करने का अनुरोध किया। साथ ही जिन्हें पत्तल-दोने की जरूरत होती है, उन्हें बनाने वालों का पता भी दिया।

दीपावली पर यह है तैयारी

बच्चियों ने अपने ग्रुप का कोई नाम नहीं रखा है। लेकिन दीपावली को लेकर उनकी तैयारी शुरू हो गई है। उनका प्रयास है कि दीपावली तक वे करीब 200 घर के किचन को पॉलीथिन मुक्त बना देंगी। वे अपने इस अभियान से घरेलू महिलाओं को जोड़ रही हैं, ताकि घरों को जल्द से जल्द पॉलीथिन मुक्त किया जा सके। इसके लिए उन्होंने सुबह और शाम 20 से 30 घरों में संपर्क करने का प्लान बनाया है। इसे अंजाम देने में वे कुछ जागरूक महिलाओं की मदद भी ले रही हैं।

अभियान जारी रहेगा

पॉलीथिन हमारे लिए जहर के समान है। कई जानवर इसके कारण अपनी जान गंवा चुके हैं। हमने दुर्गा अष्टमी के अवसर पर भंडारों से नई शुरुआत की है। हमारे साथ 150 से अधिक लड़कियां हैं, ये उन्हीं भोज में शामिल हुईं, जहां कागज के पत्तल-दोने थे। आगे भी हमारा अभियान जारी रहेगा। - सुरभि शर्मा, छात्रा

पत्तल-दोने का उपयोग

इन बच्चियों ने कई घरों को पॉलीथिन मुक्त किया है। भंडारे और अन्य आयोजनों में सिर्फ पत्ते व कागज के पत्तल-दोने का उपयोग करें। जिन लोगों को यह सामग्री नहीं मिलती, हम उन्हें उपलब्ध कराते हैं। - ज्योति खड़से, समाज सेविका

X

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना