पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

रंगों के माध्यम से देवताओं का किया जाता आव्हान

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
इसलिए निकलती है गेर

रंगपंचमी पर एक-दूसरे को स्पर्श कर रंग लगाकर नहीं अपितु वायुमंडल में रंगों को सहर्ष उड़ाकर मनाना चाहिए। ऐसा करके रंगों के माध्यम से देवता का आव्हान किया जाता है। इस समय मन में यह भाव रखना चाहिए कि हम अवतरित होने वाले देवताओं का स्वागत करने के लिए रंगकणों की दरी बिछा रहे हैं। इस दिन पृथ्वी के चारों ओर विद्यमान नकारात्मक तत्वों पर दैवीय और चैतन्य शक्ति का असर ज्यादा होता है। रंगपंचमी पर उड़ाए गए रंगों से इकट्‌ठा हुए शक्ति के कण अनिष्ट शक्ति से युद्ध करते हैं। वायुमंडल में रंग उड़ाना अर्थात ब्रह्मांड में विद्यमान देवतातत्व की पूजा करना है, तो दूसरी ओर पानी में रंग मिलाकर एवं उसे पिचकारी से एक-दूसरे पर डालना, यह दूसरे जीव में विद्यमान ईश्वरीय तत्व की पूजा करना है।

हो ली के बाद चैत्र मास में कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को रंग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार इस दिन आसमान में रंग उड़ाने से रज और तम के प्रभाव कम होकर उत्सव का सात्विक स्वरूप निखरता है। देवी-देवता भी प्रसन्न होते हैं। इस बार यह उत्सव 14 मार्च को मनाया जाएगा। इस दिन होली की तरह की रंग खेले जाते हैं। यह दिन देवताओं को समर्पित माना जाता है। ब्रह्मांड में विद्यमान गणपति, श्रीराम, हनुमान, शिव, श्रीदुर्गा, दत्त भगवान एवं कृष्ण ये सात देवता सात रंगों से संबंधित हैं। उसी प्रकार मानव के देह में विद्यमान कुंडलिनी के सात चक्र सात रंगों एवं सात देवताओं से संबंधित हैं। रंगपंचमी मनाने का अर्थ है, रंगों द्वारा सातों देवताओं को जागृत कर उन्हें आकृष्ट करना।


festival this week

14 मार्च को मनाई जाएगी रंगपंचमी

Expert**

पं. उमेश भट्‌ट, इंदौर
खबरें और भी हैं...