सरकार की शक्लो-सूरत से जुड़े सपने
यह शिक्षा विभाग
है साहब...
कम से कम मशीन से तो मिला छुटकारा...
city Gossip
प्रदेश में सरकार की शक्लो-सूरत को लेकर वे नेता ज्यादा चिंतित हैं, जिन्हें मंडल, आयोग और प्राधिकरणों में नियुक्ति की आस थी। सियासी उठा-पटक ने ऐसे नेताओं की नींद उड़ा दी है। 16 महीने उन्होंने इसी उम्मीद में काट दिए, जब मंजिल दिखाई दी तो पता चला रास्ता ही खत्म हो गया। अब वे रोज भगवान से यही प्रार्थना कर रहे हैं कि उनकी उम्मीदें जिंदा रहें। सही भी है, सरकार रही तो सपने रहेंगे, वरना दावेदारी के लायक भी नहीं रहेंगे। }घुमक्कड़श्री
जिले में जनशिक्षकों की नियुक्ति को लेकर खूब हल्ला हुआ। अफसरों ने उन शिक्षकों को भी नियुक्ति दे दी, जो जनशिक्षक रहते हुए ही सस्पेंड हुए थे। विभाग ने ऐसे शिक्षकों के खिलाफ शिकायतों को दरकिनार किया गया। अब वही दागी शिक्षक स्कूल से मुक्त होकर जनशिक्षक बन गए हैं। ऐसे में असल दावेदार जब अपनी नियुक्ति नहीं होने के बारे में किसी को दुखड़ा सुना रहे थे तो टिप्पणीकार ने कहा, साहब यह शिक्षा विभाग है। यहां काम ऐसे ही होता है। अफसर नौकरी देने में नियम नहीं देखते, यह तो फिर भी प्रतिनियुक्ति है।
कलेक्टोरेट में स्टाफ की हाजिरी बायोमेट्रिक अंटेंडेंस के बजाय रजिस्टर पर लगाने की व्यवस्था की गई है। बताते हैं, यह बदलाव कोरोना वायरस के कारण किया गया है। संकुल पहुंचा एक व्यक्ति जिज्ञासावश इस बारे में जानकारी लेने लगा तो एक कर्मचारी ने कहा, कुछ भी हो इससे उन कर्मचारियों का तो भला होगा, जो मशीन के कारण बंधे-बंधे से नौकरी कर रहे थे। जिनके लिए काम का रोना है, उनके लिए तो कोराना भी कुछ राहत लेकर आया है। अब जानकारी लेने वाले साहब चुप थे।