यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में आधा सत्र बीता, छात्र संघ चुनाव को लेकर सरकार परीक्षण ही करती रही

News - विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में आधा सत्र बीत चुका है, लेकिन प्रदेश सरकार छात्रसंघ चुनाव पर अब तक निर्णय ही नहीं ले...

Dec 04, 2019, 08:51 AM IST
Indore News - mp news half of the session was held in universities and colleges government continued to test for student union elections
विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में आधा सत्र बीत चुका है, लेकिन प्रदेश सरकार छात्रसंघ चुनाव पर अब तक निर्णय ही नहीं ले सकी। अब तक वह तकनीकी बिंदुओं पर परीक्षण ही कर रही है। हालांकि उच्च शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि दो-तीन दिन में इस पर फैसला ले लिया जाएगा, लेकिन शिक्षाविद् और जानकारों का कहना है कि अब अगर छात्रसंघ चुनाव कराए भी जाते हैं तो उनका कोई औचित्य नहीं रह जाता, क्योंकि दिसंबर से फरवरी तक अब परीक्षाओं का दौर शुरू हो जाएगा।

जानकारों के मुताबिक, दिसंबर में सेमेस्टर परीक्षाएं होना हैं, जबकि फरवरी में वार्षिक परीक्षाएं शुरू हो जाएंगी। ऐसे में अगर सरकार जनवरी में छात्रसंघ चुनाव कराती भी है तो महज दो-ढाई माह का कार्यकाल ही मिल पाएगा। कुल मिलाकर अकादमिक कैलेंडर में छात्रसंघ चुनाव सितंबर में तय किए गए थे, उस पर सरकार दिसंबर शुरू होने तक भी निर्णय नहीं ले पाई है। इससे दोनों ही प्रमुख छात्र संगठनों में नाराजगी है।

प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष चुनाव कराने पर भी नहीं हुई चर्चा

छात्रसंघ चुनाव में ये सवाल सबसे बड़ा रहता है कि वे किस प्रणाली से होंगे। दोनों प्रमुख छात्र संगठन एबीवीपी और एनएसयूआई प्रत्यक्ष प्रणाली से ही चुनाव की मांग करते आ रहे हैं। इस बार भी जुलाई में नए सत्र की शुरुआत के साथ ही छात्रों की ओर से मांग उठने लगी थी कि चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से ही हों, लेकिन नवंबर बीतने के बाद भी अब तक सरकार इस पर चर्चा तक नहीं कर सकी कि चुनाव किस प्रणाली से हो, जबकि अगस्त के आखिरी सप्ताह में उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने कहा था कि दो सप्ताह में छात्रसंघ चुनाव पर फैसला ले लेंगे, लेकिन अब भी उनका यही कहना है कि चुनाव को लेकर परीक्षण चल रहा है। जल्द निर्णय ले लेंगे। सवा तीन महीने पहले ही इस पर निर्णय हो जाना था।

नया सत्र शुरू होते ही एबीवीपी-एनएसयूआई ने शुरू कर दी थी तैयारी

नए सत्र की शुरुआत के साथ ही एबीवीपी- एनएसयूआई ने तैयारी शुरू कर दी थी। प्रदेश स्तर पर बैठकों का दौर भी शुरू हो गया था, लेकिन सरकार का फैसला नहीं आने के कारण दोनों ही संगठन बाद में चुनाव का इंतजार ही करते रहे। सामान्य तौर पर छात्रसंघ के पदाधिकारियों को कम से कम छह से आठ माह का कार्यकाल मिलना चाहिए। हर साल सितंबर में चुनाव होते हैं और अक्टूबर से मार्च-अप्रैल तक छात्रों को छह से सात माह का कार्यकाल मिल जाता है, लेकिन अब अगर चुनाव को लेकर कोई निर्णय होता भी है तो छात्रों को ना तो दो ढाई माह से ज्यादा काम करने का समय मिलेगा। वैसे भी डीएवीवी में जनवरी को छोड़ दिया जाए तो दिसंबर, फरवरी, मार्च में परीक्षाएं होना हैं।

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