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सरदार सरोवर बांध के बैकवाटर में डूबे गांव के हैंडपंप व ट्यूबवेल, लोग गंदा पानी पीने को मजबूर

Badwani News - सरदार सरोवर बांध में पानी रोके जाने के बाद से नर्मदा किनारे स्थित गावों का बुरा हाल है। यहां के ग्रामीण कई तरह की...

Oct 13, 2019, 06:30 AM IST
सरदार सरोवर बांध में पानी रोके जाने के बाद से नर्मदा किनारे स्थित गावों का बुरा हाल है। यहां के ग्रामीण कई तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। इनकी सुध लेने वाला कोई भी अधिकारी यहां नहीं आ रहे हैं। इससे ग्रामीणों में काफी रोष नजर आ रहा है।

ऐसा ही मामला ग्राम दतवाड़ा का है। ग्राम दतवाड़ा में नर्मदा का बैकवाटर चारों ओर फैल गया है। इससे गांव के आने-जाने के सारे रास्ते बंद हो जाने से गांव टापू बन गया है। यहां अभी भी 30 से 40 परिवार ऐसे रह रहे हैं जिनको डूब क्षेत्र से बाहर बता दिया जो आज टापू में रहने को मजबूर हैं। यहां लोगों को बैकवाटर का पानी पीना पड़ रहा है। इससे लोगों को बीमारियों का खतरा बना हुआ है। लोगों ने बताया कि गांव के सभी कुएं व बोर व हैंडपंप डूब गए हैं। इससे बैकवाटर का पानी ही उपयोग कर रहे हैं।

डूब क्षेत्र से बाहर बता दिए परिवार के सोभाग सिंह, बापू सिंह व लक्ष्मण इंदरसिंह ने बताया कि टापू बन गए इस गांव में अभी भी 30 से 40 परिवार के लोग रह रहे हैं। इनके घरों के आसपास पानी पहुंच गया है। पानी रुकने से चारों ओर गंदगी फैल रही है। बहाव नहीं होने से गांव का गंदा पानी भी यही जमा हो रहा है। इससे बड़े-बड़े मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है।

पानी रुकने से गंदगी फैली, बहाव नहीं होने से गांव का गंदा पानी भी यही जमा हो रहा है

नर्मदा के बैकवाटर का गंदा पानी भरती महिलाएं। इनसेट में नर्मदा का बैकवाटर घरों की दहलीज तक पहुच गया। उसी में से निकलती महिलाएं।

डर में जिंदगी : गांव में निकल रहे जहरीले जंतु

गांव में आए दिन जहरीले जंतु का निकलना भी जारी है। इससे ग्रामीणों में डर बना हुआ है। लोग डर भरी जिंदगी जीने को मजबूर हैं। इसके अलावा यहां सबसे बड़ी समस्या पीने के पानी को लेकर हो रही है। बैकवाटर के रुके पानी में दूर झाड़ियों में कई जानवरों के शव अटके पड़े हुए हैं। इससे पानी बदबू मार रहा है, जो पीने लायक नहीं बचा है, लेकिन ग्रामीण मजबूरी में गंदा व मटमैला पानी पीने को मजबूर हैं। इससे महामारी फैलने का डर बना हुआ है।

छाया अंधेरा : एक माह से बंद है गांव की बिजली

गांव के सीताराम सिदगार, सरदारसिंह व रतनसिंह ने बताया कि यहां पिछले एक महीने से बिजली की लाइन काट दी गई है। इससे ग्रामीण अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। मच्छरों के प्रकोप के बीच रात निकालना मुश्किल हो रही है। रात के अंधेरे में जहरीले जंतु भी निकलते हैं। इससे हमेशा जान का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने बताया की रात में हम लोग चिमनी या लैंप का सहारा ले रहे हैं।

अंधेरा होने से पहले निपटा लेते हैं काम

शाम को अंधेरा होने से पहले भोजन बनाकर खा पीकर सो जाते हैं। लोग अंधेरा होने से पहले ही सारे काम निपटा लेते हैं, ताकि अंधेरे के लिए कोई भी काम बाकी नहीं रहे। बिजली नहीं रहने से लोगों को अंधेरे में ही रहना पड़ रहा है। लोगों ने बताया कि पिछले एक माह से बिजली कटने से हम दुनिया से दूर हो गए हैं। गणेश उत्सव, नवरात्रि व दशहरा का त्योहार पूरी तरह से बिगड़ गया है। ये त्योहार तो जैसे तैसे मना लिए, लेकिन आने वाले दिनों में बिना बिजली व पानी के दीवाली पर्व कैसे मनाएंगे चिंता हो रही है।

नावों से करते हैं आना-जाना

लोगों ने बताया कि गांव के पहुंच मार्ग में सरदार सरोवर का बैकवाटर भरा है। इससे गांव तक जरूरी सामान लाने के लिए ग्रामीणों को नाव का सहारा लेना पड़ रहा है। गांव के कई घरों में बैकवाटर घुस गया है। वहीं जो घर पानी से बाहर हैं। अतिवृष्टि के कारण वे भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इससे लोग यहां डर के साए में जी रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं।

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