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उप्र : प्रदर्शनकारियों के नाम और पते वाले पोस्टर हटाने पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज

एक वर्ष पहले
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दिल्ली की अदालतों में हर महीने 950 पेड़ों को हो रहा नुकसान : याचिकाकर्ता

दिल्ली हाईकोर्ट में दिल्ली की अदालतों के कामकाज से होने वाली पर्यावरण की हानि को रोकने के लिए एक जनहित याचिका दायर हुई। इस पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस डीएन पटेल की पीठ ने बुधवार को कहा, इस मामले मेंं प्रशासनिक स्तर पर कोई पहल की जा सकती है या नहीं? इस पर विचार करेंगे। कैस्क ने जनहित याचिका में कहा कि दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का कारण पर्यावरण संरक्षण की दिशा में उचित कदम नहीं उठाया जाना है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने कामकाज में ए4 साइज का पेपर इस्तेमाल करने के निर्देश जारी किए थे। दूसरी तरफ, हाईकोर्ट व दिल्ली की जिला अदालतों में अभी भी लीगल पेपर पर काम हो रहा है। उनकी रिसर्च के अनुसार दिल्ली हाईकोर्ट में प्रतिमाह 6.7 लाख पेज लगते हैं, जो 80 पेड़ों से बनते हैं। जिला अदालतों में हर महीने 72.53 लाख पेज लगते हैं, जो 870 पेड़ों से तैयार होते हैं। याचिकाकर्ता का कहना है कि लोगों को लीगल साइज पेपर हासिल करने में परेशानी होती है, इसलिए आज ए4 पेपर पर दोनों तरफ प्रिंटिंग किए जाने की जरूरत है।

नई दिल्ली | यूपी सरकार ने इलाहाबाद हाई काेर्ट के उस अादेश काे सुप्रीम काेर्ट में चुनाैती दी है, जिसमें सीएए के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले लाेगाें के नाम-पते का पाेस्टर हटाने का अादेश दिया गया है। सुप्रीम काेर्ट के जस्टिस यूयू ललित और अनिरुद्ध बोस की अवकाशकालीन पीठ गुरुवार को इस पर सुनवाई करेगी। राज्य सरकार ने सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर हिंसा करने का आरोप लगाते हुए उनसे नुकसान का हर्जाना वसूलने के नाम पर ये पाेस्टर लगाए थे। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने साेमवार काे फैसले में लखनऊ में लगाए गए 100 से ज्यादा एेसे पाेस्टराें काे हटाने का अादेश िदया था अाैर इस पर 16 मार्च तक हलफनामा देने काे कहा था। हाई कोर्ट ने कहा था कि नागरिकाें के साथ अन्याय न हाे, यह देखना न्यायपालिका का दायित्व है।
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