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धर्मशाला के मेहराब का लौटा रहे ऐतिहासिक स्वरूप

एक वर्ष पहले
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10 रुपए किराए पर मिल जाती है आलमारी, एसी के कमरे भी यात्रियों के लिए हैं उपलब्ध

शहर की पहचान बन चुकी ऐतिहासिक पार्वतीबाई धर्मशाला को पुराने स्वरूप को संवारा जा रहा है। परिसर में जगह-जगह से दीवारों से टूट रहे प्लास्टर और डिजाइन को नए सिरे से बनाया जा रहा है। पार्वती बाई धर्मशाला में गरीब व्यक्ति 10 रुपए प्रतिदिन अलमारी का किराया देकर अपना सामान सुरक्षित रख सकता है। वहीं परिसर में नि:शुल्क रात बिता सकता है। यहां यात्रियों की सुविधा के लिए एसी सिस्टम वाले कमरे भी किराए पर उपलब्ध हैं।

धर्मशाला के प्रवेश द्वार पर बने गुंबद के मेहराब को पुराने स्वरूप में बनाता कारीगर।


जबलपुर की बहू पार्वतीबाई ने खंडवा में बनवाई धर्मशाला

जबलपुर के राजा गोकुलदास की बहू सेठानी पार्वतीबाई ने 96 साल पहले यात्रियों को सुविधा देने के उद्देश्य से खंडवा में धर्मशाला बनवाई। इसके लिए उन्होंने अपने निजी कोष से 2 लाख खर्च किए। उनका उद्देश्य गरीब और अमीर सभी को अपने धर्म और रहन-सहन के अनुसार यात्रा में आने वाली दिक्कताें काे दूर करना था। धर्मशाला बनाने की स्वीकृति सर बेंजामिन राबर्टसन ने सन् 1917 में दी। सरकार हिंद ने इसकी जमीन का बिना कर चिरस्थाई पट्टा 31 जुलाई 1923 को प्रदान किया। प्रांत के पहले गवर्नर सर फ्रेंक स्लाई बहादुर ने 25 मार्च 1924 को धर्मशाला का उद्घाटन बड़े समारोह के साथ किया।

( जानकारी- धर्मशाला में लगे शिलालेख के मुताबिक)
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