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होलिका दहन...स्नेह का रंग लगाने बैंड-बाजों के साथ निकलेंगी आज हुरियारों की टोलियां

एक वर्ष पहले
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शहर में देर रात तक चला होलिका दहन का सिलसिला

प्रेम और सद्भाव के होली पर्व की पूर्व बेला फाल्गुन पूर्णिमा पर सोमवार देर रात तक शहर में एक हजार से अधिक स्थानों पर होलिका दहन हुआ। कई स्थानों पर होलिका दहन के पौराणिक दृश्य की झलक दिखाई दी, जब लोगों ने अग्नि प्रज्ज्वलित होते ही होलिका को जलने दिया और उनकी गोद से भक्त प्रहलाद की प्रतिमा को उठा लिया। इसी के साथ जयकारों के बीच हुरियारों ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर पर्व की शुभकामनाएं दीं। बहुत से स्थानों पर पर्यावरण की खातिर होलिका दहन में गो काष्ठ व कंडों का उपयोग किया गया। मंगलवार को दयानंद चौक व नेहरू नगर समेत कई स्थानों से हुरियारों के जुलूस निकले जाएंगे। इसमें राधा-कृष्ण और शिव पार्वती की चलित झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेगी। जुलूस पर गुलाल व फूलों की बारिश कर स्वागत किया जाएगा। कई संगठनों ने लोगों से अपील की है कि वे केमिकल युक्त रंगों की बजाए गुलाल व फूलों की बारिश करें।

2300 क्विंटल गो काष्ठ का 24 स्थानों पर विक्रय

गो काष्ठ व पर्यावरण संरक्षण समिति के अजय दुबे ने बताया कि शहर में 24 स्थानों पर बनाए गए गो काष्ठ केंद्रों से शाम 7 बजे तक 2300 क्विंटल से अधिक गो काष्ठ का विक्रय हो चुका था।

{चल समारोह आज : हिंदू उत्सव समिति का चल समारोह मंगलवार की सुबह 10 बजे दयानंद चौक से प्रारंभ होगा। नेहरू नगर, भेल और बैरागढ़ और कोलार में भी चल समारोह निकलेंगे।

{समाज ने भी जलाई होली : नवयुवक हिंदू उत्सव समिति द्वारा पीएंडटी चौराहा पर, गुजराती समाज द्वारा गुजरात भवन में व संस्था सकारात्मक सोच द्वारा कल्पना नगर, मराठी समाज द्वारा समाज के भवन के पास समेत कई स्थानों पर गो काष्ठ व कंडों से होलिका दहन किया गया। जिसमें बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

टेसू फूल से खुशबू, ग्लूकोज से बने रंगों से मिलेगी एनर्जी

उमंग, उल्लास और मिलन के त्योहार होली में इस बार आतिशबाजी के साथ लोगों पर इको फ्रेंडली रंगों की बारिश होगी। लोगों की सेहत का ख्याल रखते हुए टेसू के फूलों और ग्लूकोज से बने रंगों की बाजार में धूम है। गुलाल फेंकने वाली गन भी ज्यादा बिक रही है। बाजारों में करीब 70प्रतिशत तक आयटम हर्बल रंगों के ही है।

टेसू के फूल -मार्केट में रंगों के रूप में हर्बल नाम से कई रंग आते रहे हैं। कंपनियों का दावा है कि इस बार टेसू के फूल मार्केट में आ गए है। टेसू के फूलों को छह नामों पलाश, छूल, परसा, टेसू, किंशुक और केसू नाम से जाना जाता है। टेसू के फूलों का रंग केसू नाम से मार्केट में आया है। इसके रंग से स्नान करने से ताजगी आती है।

चायना मार्केट सिमटा-जुमेराती में होल सेल व्यापारी अशोक जैन ने बताया कि बाजार भारतीय रंगों की डिमांड 70% है, जबकि चायना का मार्केट सिमटकर 35 से 40% ही रह गया है।

प्राकृतिक रंगों की डिमांड

गायत्री शक्तिपीठ परिसर में कार्यकर्ताओं ने होली में बुराई के प्रतीक अश्लील साहित्य और चित्रों का दहन किया।

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