फेक न्यूज में जितने विशेषण, उससे दुगने क्रिया विशेषण इस्तेमाल होते हैं

News - इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईसर) के वैज्ञानिकों और शिक्षकों की टीम ने ऐसा एप तैयार किया है, जो...

Dec 13, 2019, 06:26 AM IST
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईसर) के वैज्ञानिकों और शिक्षकों की टीम ने ऐसा एप तैयार किया है, जो मशीन लर्निंग (आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस) की मदद से उन खबरों के बारे में चेताएगा, जो भले तथ्यों के आधार पर सही हों, लेकिन तोड़-मरोड़कर लिखी गई हों। एप को आईसर के प्रोफेसर डॉ. कुशल शाह, डॉ. राजकृष्णन, एल्म्नाय रमीज कुरैशी, आईआईटी दिल्ली के सिद्धार्थ रंजन और अंडरग्रेजुएट स्टूडेंट अरमान काजमी और श्रीनिवासुला कौशिक ने तैयार किया है। न्यूज चेज़ नामक यह एप इसी साल 17 नवंबर को प्ले स्टोर पर लॉन्च हुई है।

डॉ. राजकृष्णन बताते हैं- इस एप पर हुई रिसर्च एसोसिएशन फॉर कंप्यूटेशन लिंगुइस्टिक की ओर से इटली में आयोजित एनुअल कॉन्फ्रेंस में पब्लिश हुई। मशीन लर्निंग के पैमानों पर इस एप को 96 प्रतिशत तक सटीक पाया गया। फेक न्यूज दो तरह की होती हैं, एक जिनमें तथ्य ही सही न हों, दूसरी फेक न्यूज वो होती हैं, जिनमें तथ्य तो सही होते हैं, लेकिन इस तरह से लिखी जाती हैं कि वे उसके सही मतलब से अलग, लोगों के विचार को विपरीत दिशा में मोड़ने का काम करती हैं। इन्हें ही मैनीपुलेटिव खबरें कहते हैं। असल मायने में देखें, तो यह खबरें ही ज्यादा हानिकारक हैं।

IISER achievement

सिटी रिपोर्टर . भोपाल

मशीन लर्निंग के पैमानों पर इस एप को 96 प्रतिशत तक सटीक पाया गया है

डाॅ. कुशल शाह ने बताया- बड़ा चैलेंज था कि आखिर मशीन ऐसी खबरें पहचाने कैसे? तो हमने इंग्लिश लैंग्वेज में वाक्यों के बनने के तरीके और पार्ट ऑफ स्पीच को खंगाला। हमने करीब 10 लाख शब्दों का डाटा खंगाला और फिर ऐसे दो फीचर्स निकाले, जिनके हिसाब से मैनिपुलेटिव और सटीक खबरों के बीच अंतर निकाला जा सकता है।

इस तरह से फेक न्यूज में फर्क करता है यह एप...

मैनिपुलेटिव यानी फिक्शन आर्टिकल्स में जितने एडजेक्टिव (विशेषण) थे, उससे लगभग दुगने एडवर्ब (क्रिया विशेषण) का इस्तेमाल किया गया था। सटीक खबरों यानी नॉन फिक्शन न्यूज आर्टिकल्स में जितने प्रोनाउन (सर्वनाम) इस्तेमाल किए गए थे, उसके दुगने एडजेक्टिव (विशेषण) इस्तेमाल किया गया था।

रिलायबल, ऑल राइट और बी-अवेयर टैग देते हैं खबरों को

एप में हम किसी खबर को रोकते नहीं, अलग-अलग न्यूज पोर्टल्स से ली गई खबरों को रिलायबल, ऑल राइट और बी-अवेयर टैग देते हैं। रिलायबल यानी वह न्यूूज जिनकी नॉन-फिक्शन कैटेगरी में होने की एक्यूरेसी 75 से 100 प्रतिशत के बीच है। बी-अवेयर यानी वह न्यूज जिनकी फिक्शन कैटेगरी में होने की एक्यूरेसी लेवल 75 -100 प्रतिशत के बीच है। जो बाकी के आर्टिकल्स हैं उन्हें ऑल राइट का टैग दिया गया है। इसका मतलब है कि बी-अवेयर कैटेगरी खबरों के ज्यादातर शब्द मैनिपुलेटिव भाषा के दायरे में आ रहे हैं।

X

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना