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पर्यावरण बचाने की खातिर सुप्रीम कोर्ट में अप्रैल से लीगल के बजाय ए-4 साइज पेपर पर दाखिल हो सकेंगे दस्तावेज

एक वर्ष पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरणीय हितों को ध्यान रखते हुए अदालत में ए-4 साइज के पेपर पर दस्तावेज दाखिल करने की इजाजत दे दी है। पेपर के दोनों तरह प्रिंट भी कर सकेंगे। आदेश 1 अप्रैल से प्रभावी होगा। अभी अदालत में सिर्फ एक तरफ प्रिंट किए हुए अाैर लीगल साइज पेपर पर ही दस्तावेज दाखिल होते हैं। सुप्रीम कोर्ट की तर्ज पर मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में भी जल्द यह व्यवस्था लागू होगी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी सर्कुलर के मुताबिक विभिन्न आवेदन, रिव्यू पिटिशन, क्यूरेटिव, कंटेंप्ट पिटिशन, पेपर बुक आदि ए-4 साइज में दाखिल किए जा सकेंगे। अदालत का आंतरिक पत्राचार इसी आकार के पेपर पर होगा। सर्कुलर में कहा है कि लीगल के बजाय अच्छी क्वालिटी के ए-4 पेपर के उपयोग से कागजाें की बचत होगी। सर्कुलर में कहा गया कि इबारत टाइम्स न्यू रोमन फोंट में ही टाइप की जाए। फाेंट का आकार 12 रखा जाए। भारतीय लीगल साइज का पेपर ए-4 साइज के बराबर चाैड़ा अाैर करीब ढाई इंच ज्यादा लंबा होता है। यह परंपरा ब्रिटिश काल से चली आ रही है, जबकि अब इंग्लैंड और अमेरिका में ए-4 साइज के पेपर का ही उपयोग होता है।

फाइलिंग अासान बनाने लीगल साइज दस्तावेज का ही उपयोग


हाई कोर्ट के वरिष्ठ वकील दलाल के बताते हैं टाइपराइटर आने से पहले दस्तावेज हाथ से लिखे जाते थे। बाद में मैकेनिकल टाइपराइटर आए। दोनों स्थिति में अकसर एक तरफ टाइप की गई इबारत दूसरी तरफ उभर जाती थी। इससे पढ़ने में होने वाली असुविधा से बचने के लिए एक ही तरफ टाइप करने का नियम बनाया था। फाइलिंग में आसानी की दृष्टि से भी पेपर का आकार लीगल रखा जाता रहा। कम्प्यूटर टाइपिंग आने से यह समस्या खत्म हो गई। बावजूद टाइपराइटर के जमाने की परंपरा चली आ रही है। अब इस निर्णय से खर्च में भारी बचत होगी।

लाॅ के तीन छात्रों ने लिखा था सीजेआई और कानून मंत्रालय को पत्र

पिछले साल अक्टूबर में लाॅ के तीन छात्र अभिनव सिंह, लक्ष्य पुरोहित और आकृति अग्रवाल ने सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई, ई-कमेटी और कानून मंत्रालय को पत्र लिखा था। इनका कहना था कि लीगल के बजाय ए-4 साइज के उपयोग से स्टेशनरी संबंधित फोटोकॉपी और अन्य अदालती खर्च में 50 प्रतिशत तक की कमी होगी।

वर्ष 2017 में पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट
ने की थी पेपरलेस बहस की पहल


पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने कागज बचाने की प्रभावी पहल करते हुए वर्ष 2017 में ही पेपर बुक आदि की हार्ड कॉपी के बजाय ई-पेपर बुक की व्यवस्था शुरू की थी। इसमें वकील लैपटॉप पर पढ़कर दलील देते हैं और जज भी उसे स्क्रीन पर देख सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट भी इस साल जनवरी में एडवोकेट आदि से ई-मेल, एसएमएस के जरिए पत्राचार करने के आदेश जारी कर चुका है।

मप्र में इसके लिए जल्द जारी होंगे आदेश

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में इस व्यवस्था पर निर्णय लेने की प्रक्रिया विचाराधीन है। इस संबंध में जल्द ही आदेश जारी किए जाएंगे।
- राजेंद्र कुमार वानी, रजिस्ट्रार जनरल उच्च न्यायालय जबलपुर
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