यह इंसान के लिए इंसानियत दिखाने का समय है

Dhar News - मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए 9190000071 पर मिस्ड कॉल करें फंडा यह है कि ऐसी संकट की...

Mar 27, 2020, 07:00 AM IST
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मैनेजमेंट फंडा एन. रघुरामन की आवाज में मोबाइल पर सुनने के लिए 9190000071 पर मिस्ड कॉल करें

फंडा यह है कि ऐसी संकट की घड़ी में पड़ोसी को और अच्छा पड़ोसी बनना पड़ता है और इससे भी जरूरी यह है कि सभी इंसान इस संकट की घड़ी में अपनी इंसानियत दिखाएं।

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एन. रघुरामन

मैनेजमेंट गुरु

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‘अरे तंबी (तमिल में छोटा भाई), क्या तुम्हें तुम्हारे पीछे चल रहे बुजुर्ग व्यक्ति नहीं दिख रहे? उन्हें थोड़ा रास्ता दो और एक तरफ खड़े हो जाओ।’ उस वक्त मेरा युवा मन कहना चाहता था कि ‘तो मैं क्या करूं?’ लेकिन तमिलनाडु के तंजावुर जिले में स्थित मेरे गांव कुंभकोणम में रहने वाला कोई भी व्यक्ति इस तरह का जवाब नहीं दे सकता। मुझे याद नहीं कि कितनी बार मुझे या मेरे हमउम्रों को इस तरह का निर्देश सुनने को मिला होगा। दिलचस्प बात यह है कि जब भी मैं यह बात सुनकर पलटा, तो वह हमेशा एक यादगार नजारा होता था। एक कमजोर बुजुर्ग छड़ी के साथ चल रहे होते थे, जो सफेद धोती और उतने ही सफेद अंगवस्त्र पहने होते थे। उन छोटे और संकरे रास्तों पर मुझसे दूसरी ओर जाते हुए वे अपना हाथ बढ़ाकर मुझे आशीर्वाद देते थे और उस पल मेरे अंदर कुछ होता था। वह चाल और वह बिना दांत वाली मुस्कुराहट मेरे आसपास खुशी का माहौल बना देती थी। मेरा शरीर खुद-ब-खुद पीछे होकर उन बुजुर्ग के लिए और ज्यादा जगह बना देता था, ताकि वे आगे जा सकें। मेरे गांव में हर बुजुर्ग के साथ ऐसा ही व्यवहार किया जाता था।

यह बार-बार दोहराई जाने वाली सामाजिक डांट (जिसकी मैंने शुरुआत में बात की) या गांव के वरिष्ठों की समझाइशों ने मुझे वर्तमान में रहते हुए पूरे ध्यान से चलने के लिए प्रशिक्षित किया है, जो आपकी पांचों इंद्रियों को सचेत रखता है। उदाहरण के तौर पर, बुजुर्ग आदमी के करीब आने से पहले ही कान छड़ी की आवाज को पहचान लेते हैं। मुझे बचपन का ये किस्सा आज सुबह याद आया, जब मुंबई के निवासी, जो कोरोना वायरस से सबसे अधिक प्रभावित हैं, अपने बुजुर्ग पड़ोसियों की देखभाल कर रहे हैं, उनके लिए खाना बना रहे हैं, उनके रोजमर्रा के काम कर रहे हैं और यहां तक कि उनके मनोबल को बढ़ावा दे रहे हैं, क्योंकि यह व्यावसायिक राजधानी पूरी तरह से टूट चुकी है। स्थिति इतनी तेजी से खराब हो रही है कि अब हर आदमी अपने बारे में सोच रहा है। घर का काम करने वाले कर्मचारियों के न आने के कारण, हर वरिष्ठ नागरिक को अपना काम खुद करना पड़ रहा है, यहां तक कि उन्हें रोजमर्रा के काम जैसे कि नहाना और खाना पकाना या किराने की खरीदारी भी खुद करना पड़ रही है।

कुछ उत्साही युवा, जो सोसाइटी मेंबर हैं, उन्होंने सोसाइटी के अंदर एक कैंटीन शुरू की है, जो उन सभी को कम से कम पैसों से नाश्ता, दोपहर का भोजन और रात का खाना उपलब्ध कराते हैं, जो खुद के लिए खाना नहीं बना सकते हैं। सुरक्षा कर्मचारियों को भी परिसर के भीतर रहने के लिए कहा गया है, क्योंकि उनका भोजन भी सोसाइटी द्वारा प्रदान किया जा रहा है। सभी सदस्यों से कहा गया है कि वे अपने फ्लोर पर एक निर्धारित स्थान पर ही अपना कचरा रखें, ताकि बुजुर्ग कूड़ा उठाने वाले के संपर्क तक में न आएं। घर में बंद रहने से लोग उदास हो सकते हैं। और बुजुर्ग लोगों का मनोबल बढ़ाने की ज्यादा जरूरत होती है, क्योंकि वे ज्यादा टीवी नहीं देखते हैं। इसलिए युवा सोसाइटी मेंबर्स उनसे कुछ दूरी से या अपनी-अपनी बालकनी से ही उनसे बात कर रहे हैं।

इस बीच, अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) लोगों की आवश्यकता के अनुसार सोसायटी में सब्जियां बांटने की एक नई योजना लेकर आया है। सोसाइटी एक प्रतिनिधि को चुनती है जो पूरी सोसायटी के लिए 100 किलो या उससे अधिक सब्जियां लाता है और मुफ्त परिवहन एएमसी द्वारा प्रदान किया गया है। पुणे में फरसखाना पुलिस स्टेशन ने एक नई रणनीति तैयार की है, जिससे सब्जी मंडियों को भीड़ से मुक्त किया गया है। इसके लिए गणेश मंडल की मदद के साथ हर सोसाइटी के दरवाजे पर सब्जी बेची जा रही है।

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