कालचक्र : बेटों-बहू को संदेश दे गया कि बूढ़े मां-बाप को भूलो मत, अंत तक उनकी सेवा करो

News - सिटी रिपोर्टर . इंदौर वैलेंटाइन डे पर शुक्रवार को खेला गया नाटक कालचक्र यह संदेश दे गया कि बेटों को अपने...

Feb 15, 2020, 07:50 AM IST

सिटी रिपोर्टर . इंदौर

वैलेंटाइन डे पर शुक्रवार को खेला गया नाटक कालचक्र यह संदेश दे गया कि बेटों को अपने बूढ़े हो चुके मां-बाप की अंत तक प्रेम से सेवा करना चाहिए। बेटे भले ही मां-बाप को भूल जाएं और उन्हें उपेक्षित छोड़ दें, लेकिन मां-बाप अपने अंत समय तक बेटों की याद करते रहते हैं। जयंत दळवी के लिखे इस मराठी नाटक का नाट्य रूपांतर रवीन्द्र नाट्यगृह में खेला गया। संस्था रंगमंच आर्ट आॅफ ड्रामा और रूद्राक्ष की इस साझा प्रस्तुति का निर्देशन संदीप दुबे ने किया था। बेहतर अभिनय और मां-पिता तथा बेटों-बहू के रिश्तों के कारण यह नाटक दर्शकों को छू गया।

मार्णिक कहानी, बेहतर अभिनय

कहानी इतनी है कि अपने बेटों-बहू के उपेक्षित और अपमानित कर देने वाले व्यवहार के कारण बुजुर्ग माता-पिता बहुत दु:खी हो जाते हैं। उनके जीवन में एक त्रासद समय ऐसा आता है कि माता-पिता परेशान होकर अख़बार में यह विज्ञापन छपवा देते हैं कि हमेंे कोई गोद लेने वाला हो तो हम उसे सहर्ष स्वीकार करेंगे। एक युवा इस विज्ञापन को पढ़कर आता है और दूसरे को माता-पिता को अपने घर ले जाता है। दूसरे घर में युवा और उसकी प|ी गोद लिए मां-बाप की बहुत सेेवा करते हैं, प्रेम देते हैं और एक दिन घर में होने वाले उत्सव में गोद ले चुके माता-पिता के बच्चों और बहुअों को भी आमंत्रित करते हैं।

यहां ये अपने माता-पिता की सेवा को देखकर दंग रह जाते हैं। बुजुर्ग माता-पिता का निधन हो जाता है और उनके बच्चों को यह अहसास होता है कि हमारे माता-पिता अंत तक हमें याद करते थे।

इसमेंे दूसरों के माता-पिता को गोद लेने वाले युवा राघव की भूमिका को पुष्पांश खले ने बहुत संवेदनशीलता और आंगिक अभिनय के जरिए जीवंत किया तो बूढ़े के पिता के रूप में संदीप दुबे और बूढ़ी मां के रूप में डिम्पल अग्रवाल ने भी संजीदा अभिनय कर अपने किरदारों को नया आयाम दिया। बेटे विशा के रूप में ऋषभ शर्मा, दूसरे बेटे शरद के रूप में आदित्य बड़ोदे और बहू लीला के रूप में अर्चिता जौहरी ने भी अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज कराई।

राघव की प|ी के किरदार में अदिति दीक्षित ने भी अच्छा अभिनय किया। कर्वे के रूप में महेश जोशी ने भी अच्छा अभिनय किया। विजय चौहान का संगीत और देवेंद्र सिंह का प्रकाश नाटक के भावों के अनुकूल था। रुद्राक्ष संस्था के संयोजक पं. महेश जोशी ने वृद्धाश्रम की महिलाओं को सहयोग राशि भेंट की।

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