मस्ती की बस्ती में ही जिंदगी हंसती है, सपने हैं महंगे पर मस्ती तो सस्ती है...

News - विश्व रंग की आखिरी शाम रही ‘रघु दीक्षित प्रोजेक्ट’ के नाम। ‘गली बॉय’ के ट्रेन... जैसे गीत गाने वाले रघु दीक्षित ने...

Nov 11, 2019, 07:16 AM IST
विश्व रंग की आखिरी शाम रही ‘रघु दीक्षित प्रोजेक्ट’ के नाम। ‘गली बॉय’ के ट्रेन... जैसे गीत गाने वाले रघु दीक्षित ने रविवार शाम की शुरुआत यूं की-

नमस्कार... मैं बैंगलोर का रहने वाला हूं, मुझे हिंदी बहुत कम आती है। थोड़ी बहुत बोल लेता हूं, दूरदर्शन चैनल देखकर हिंदी सीखी है। हिंदी बोलते समय कोई गलती हो जाए तो मुझे एंटीसिपेट्री बेल दे दीजिएगा। भोपाल पहली बार आया हूं। मैं वोकल पर, ड्रम पर जोमन जैकब, वायलिन पर अक्षय गणेश, बेस गिटार पर नरेश नितिन, गिटार पर नवीन थॉमस और हमारे साउंड इंजीनियर प्रभाकर... मैं अपना पहला टाइटल सॉन्ग ‘जग चंगा’ पेश कर रहा हूं...

ज्ञानी के अंदर से निकले ये गंवार,

चुटकी में सुवर को बनाए ये सुनार,

जोगी भी बच न पाए ऐसी इसकी मार

प्यारे, सातों समंदर तक बिछा है ये बाजार,

जग चंगा जग चंगा जग चंगा कर डाला गंदा,

चंगा जग चंगा जग चंगा...



ओके.. चलिए हाथ ऊपर उठाइएगा। अच्छा ठीक है, यहां जो भी फोन के फ्लैश ऑन हैं तो मेरे पास अभी 200 पिक्सल एक्सल है... 128 जीबी, तो आप अपना फोन न दिखाएं, उसे अपने पॉकेट में रखिए और अपनी आंखें बंद कर दिल से आनंद लीजिए। स्टूडेंट्स के साथ-साथ यहां मौजूद शिक्षक, प्रोफेसर, बुद्धिजीवी भी अपने हाथ ऊपर करके आनंद लीजिए...

खोया है राही खोया है,

खोया है रस्ता भी यहां खोया रे,

जात भगत से पहले बंदे जाग...



अगला गाना... मस्ती की बस्ती- यह गाना अपनी खुशी सबके साथ बांटो और हर जगह खुशियों के साथ जीयो और खुशियों के साथ जियो क्योंकि ये प्रोसेस सस्ती है

मस्ती की बस्ती में ही जिंदगी हंसती है,

सपने हैं महंगे पर मस्ती तो सस्ती है,

आगे ये सरपट सरपट उल्टी सी लहरों में,

नंगे पांव ये नाचे तपती दोपहरों में,

मुठ्ठी भर किरणों काफी गहरे अंधेरों में,

चारों मौसम ये झूमे मस्ती कश्ती में,

मस्ती की बस्ती में ही जिंदगी हंसती है...



अगले तीन गाने ऐसे हैं जो आपको समझ नहीं आएगा, क्योंकि ये कन्नड़ में होंगे और संत की वाणी से बनाए गए हैं

(फिर उनका बैंड तीनों गाने पेश करता है, और फिर हिंदी गाने आ जाते हैं-)

अंबर पे मिलते हैं कदमों के निशां तेरे ही हर शाम,

खिड़की पे लिखे कोई ओस की बूंदों से तेरा नाम...

(संबंधित खबर पेज-18 पर)

live performance

सिटी रिपोर्टर . भोपाल

शहर पहुंची स्क्रीन राइटर ज्योति कपूर ने कहा-

घर की कहानी और घटनाओं को देख लिखी ‘बधाई हो’

सिटी रिपोर्टर . भोपाल

‘हम तीन बहनें थीं और मैं जब 10वीं में थी तो पूरा परिवार सोच रहा था कि हमारा एक भाई हो जाए। यह जानकर अजीब लग रहा था... कुछ दिनों बाद मेरी बुआ की शादी थी, तब मेरी दादी प्रेग्नेंट थीं। जिंदगी और आसपास ऐसे बहुत सारे उदाहरण मिल जाएंगे... ’

यह कहना था फिल्म ‘बधाई हो’ की कहानी लिखने वाली ज्योति कपूर का। वह रविवार को विश्व रंग में हिस्सा लेने पहुंची थीं। उन्होंने कहा- एक समय होता है जब हमें लगता है कि अब हमसे बड़ों का समय निकल गया है। यह हमारा समय है और अब जो कुछ होना चाहिए, हमारे तौर-तरीकों से होना चाहिए। ‘बधाई हो’ फिल्म की थीम यहीं से शुरू हुई थी, इसके बाद यह फिल्म तैयार हुई। डायरेक्टर और प्रॉड्यूसर ने दो हफ्तों में इस स्क्रिप्ट को चुन लिया। उन्होंने बताया दिसंबर में उनकी फिल्म ‘गुड न्यूज’ आ रही है जिसमें अक्षय, करीना हैं।

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