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पिपल्या फूल में गोदाम बना मांगलिक भवन, ग्रामीणों को नहीं मिल रहा लाभ
ग्रामीणों को मांगलिक कार्यों के लिए सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शासन से पंचायतों में भवनों का निर्माण स्वीकृत किए। कई गांवों में सांसद व विधायक निधि से भी मांगलिक भवनों का निर्माण किया गया। लेकिन सरपंच-सचिव की लापरवाही व मनमानी के चलते ग्रामीणों को इनका लाभ नहीं मिल पा रहा है। इन्हीं में एक गांव पिपल्या फूल भी है। यहां तीन साल पहले बना मांगलिक भवन गोदाम बनकर रह गया है। ग्रामीणों को मांगलिक कार्य खुले स्थानों पर करना पड़ रहा है।
गांव के जगदीश कलम, हुकुम मालवीय सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया 2016-17 में ग्राम पंचायत ने आदिम जाति बस्ती विकास योजना के तहत 5 लाख की लागत से मांगलिक भवन का निर्माण कराया था। इस भवन में सीमेंट, लोहा आदि सामान रख दिया। इस कारण ग्रामीण इसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। इसके अलावा यहां पेयजल, बिजली सहित अन्य सुविधाएं भी नहीं है। ऐसे में लोगों को वैवाहिक कार्यक्रम और अन्य मांगलिक आयोजन घर या खुली स्थान से करना पड़ रहा है। वहीं निवास से दूर आयोजन किए जाने में कई तरह की परेशानी भी आती है। कई बार सरपंच-सचिव को भवन खाली कराकर अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की लेकिन उन्होंने ध्यान नहीं िदया। ग्रामीणों ने जनसुनवाई में कलेक्टर व जिला पंचायत सीईओ से सरपंच-सचिव की शिकायत का निर्णय लिया है।
व्यवस्था कराना पंचायत का काम नहीं
महेंद्र घनघोरिया, जपं सीईओ खंडवा
पिपल्या फूल स्थित मांगलिक भवन को इस तरह गोदाम बना दिया है।