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मार्च माह के मध्य से कपड़ा बाजारों में वैवाहिक ग्राहकी शुरू होने की आशा

एक वर्ष पहले
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इंदौर | एक या अनेक कारणों से फिलहाल कपड़ा बाजार में ग्राहकी ठंडी है। इस माह के मध्य ग्राहकी खुलने की आशा रखी जाती है। निर्यात में फिलहाल बड़ी सफलता नहीं मिल सकी है। कपड़ा मंत्रालय की निष्क्रियता सामने आ रही है। गर्मी सीजन के कपड़ों का उत्पादन शुरू हो गया है। मौसम में बड़ा परिवर्तन आने के बाद मांग में वृद्धि होगी। आने वाले दिनों में वैवाहिक सीजन की मांग विशेषकर रहेगी। अब फसलें धीरे-धीरे मंडियों में आने लगी है। इससे बाजारों में रुपए की इफरादी होगी और सभी जगह ग्राहकी निकलने की आशा रखी जाती है।

कपड़ा उद्योग परेशानी में

होली त्योहार, मार्च माह, धन की तंगी, कोरोना वायरस का भय, निर्यात कमजोर होने से कपड़ा उद्योग पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। फिलहाल इसमें सुधार की स्थिति भी नहीं देखी जा रही है। विशेषकर इस उद्योग एवं व्यापार को आर्थिक मंदी ने बड़ी चोट पहुंचाई है। इससे कपड़ा उद्योग परेशानियों से घिर गया है। यार्न एवं जॉब वर्क के भाव बढ़ने के बाद भी कपड़े भाव बढ़ने का नाम नहीं ले रहे हैं। बढ़े भाव सुनते ही व्यापारी खरीदी से पीछे हटने लगते हैं। बाजार में एवं आम उद्योगों में यह धारणा बन गई थी कि चीन कोरोना वायरस की चपेट में आ गया है। अत: भारत से निर्यात बढ़ना संभव है, किंतु निर्यात में सुधार नहीं आ सका है। अगर सरकार ने निर्यात की ओर तुरंत ध्यान तो विदेशों में बड़ी मात्रा में कपड़ा निर्यात होने के अभी भी संयोग बन सकते हैं। निर्यात बढ़ाने में कपड़ा मंत्रालय को अधिक सक्रिय होना चाहिए, किंतु उसमें ऐसी सक्रियता नजर नहीं आ रही है।

आने वाले दिन गर्मी के सीजन के हैं। हालांकि सीजन तो शुरू हो गया है, किंतु उसमें अभी भी हल्की ठंडक बनी हुई है। तेज गर्मी पड़ने के बाद ही ब्लीज, पॉपलीन, केब्रिक एवं लोन (मलमल) की मांग में इजाफा होना संभ‌व है। कपड़ा मिलों ने उत्पादन शुरू कर दिया है। मुंबई की कुछ मिलों को एक-दो माह तक की बुकिंग भी मिल गई है। इससे मिलों को राहत मिली है। ग्रे मालों में उठाव नहीं होने से स्टॉक बोझ बढ़ता जा रहा है। भाव पूर्ववत बने हुए हैं। होली त्योहार की वजह से उप्र के बाजार 8-10 दिन तक बंद रहेंगे। उद्योगपति एवं व्यापारी इस समय अवकाश के मुड में है। शीतला सप्तमी के बाद ग्राहकी शुरू होने की आशा रखी जाती है।

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