अॉटो में नहीं लगाए मीटर, ओवरलोडिंग कर मनमाना किराया वसूल रहे चालक
शहर में लोकल आवागमन के लिए चलने वाले अॉटो में मीटर नहीं लगे होने के कारण अॉटो चालक लोगों से मनमाना किराया वसूल कर रहे हैं। यही बड़ी तादाद में ऑटो का उपयोग 20 से 25 किलोमीटर दूरी तक बड़े यात्री वाहनों के रुप में किया जा रहा है। शहर में जिस तरह से अॉटो चलाए जा रहे हैं, उससे जाहिर हैं उन पर पुलिस या यातायात विभाग का कोई नियंत्रण नहीं है।
शहर में कई जगह बन गए अवैध अॉटो स्टैंड
पिपरिया में हाल ही के कुछ वर्षों में बड़ी मात्रा में ऑटो चलन में आ गए हैं। यह अॉटो मुख्य रुप से रेलवे स्टेशन, मंगलवारा बाजार में सिटी थाने के पास, न्यू बस स्टैंड, पचमढ़ी बस स्टैंड, शोभापुर रोड तिराहा, मंगलवारा बाजार आदि स्थानों पर मिलते हैं। शहर मे और भी कई जगह अवैध अॉटो स्टैंड बन गए हैं। ऑटो चालक के कारण शहर और आस-पास के ग्रामीण मार्गों पर वाहन दुर्घटनाएं भी लगातार बढ़ रही है। पुलिस के द्वारा लगातार चालानी कार्रवाई किए जाने के बाद अॉटो वाले सुधारने को तैयार नहीं हैं।
50 से कम किराया नहीं
रेलवे स्टेशन से सांडिया रोड गर्ल्स स्कूल तक का क्षेत्र दो किलोमीटर भी नहीं है, लेकिन ऑटो से आने पर ऑटोवाले 50 रुपये किराया मांगते हैं। इसी प्रकार पचमढ़ी बस स्टैंड क्षेत्र से पचमढ़ी रोड नाके के पास जाने पर ऑटो वाले 50 रुपये मांगते हैं। अगर अंदर किसी कॉलोनी में जाना है तो यही किराया 100 रुपए तक मांगा जाता है। मजबूरी में या तो सवारी को ऑटो का मुंह मांगा किराया देना पड़ता है या फिर पैदल ही जाना पड़ता है।
रात में वसूलते हैं मनमाना किराया
रेलवे स्टेशन पर ऑटो चालकों की मनमानी से लोग खासे परेशान हैं। कई ट्रेन ऐसी हैं जो बनखेड़ी रेलवे स्टेशन पर नहीं रुकती हैं। रात में इन ट्रेनों की यात्री पिपरिया रेलवे स्टेशन पर उतार जब बनखेड़ी जाना चाहते हैं, तो ऑटो आने-जाने के किराए के नाम पर मनमानी की मांग करते हैं। होता यह है कि जितना किराया ट्रेन में नहीं लगा है, उससे कई गुना ज्यादा किराया ऑटो वाले किराए के रुप में मांगते हैं।
इधर, पुलिस और यातायात विभाग का कोई नियंत्रण नहीं
नागरिकों की मांग-िनर्धारित हो किराया
पुलिस सभी ऑटोचालक को नंबर दे भी नहीं पाई थी कि व्यस्तता के चलते यह काम बीच में ही बंद हो गया। यही नहीं जिन ऑटो को नंबर दिए गए थे, उनमें से अधिकांश ऑटोचालक ने अपनी पहचान छुपाने के लिए वे नंबर हटा दिए हैं। कई आपराधिक मामलों में ऑटो वालों की भूमिका भी प्रकाश में आ चुकी है। नागरिकों ने मांग की है कि ऑटो का किराया निर्धारित किया जाए।
पिपरिया। बेलगाम अॉटो पर प्रशासन का कोई नियंत्रण नजर नहीं आता।