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अल्पसंख्यक कॉलेज मनमर्जी से नहीं वसूल सकेंगे छात्र-छात्राओं से फीस, एएफअारसी ही तय करेगी
समय किया बर्बाद, इसलिए हर्जाना नहीं भरा तो छात्रों के रिजल्ट रोकने के निर्देश
प्रदेश में संचालित अल्पसंख्यक कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों से उनके प्रबंधन मनमर्जी से फीस नहीं ले सकेंगे। यह काॅलेज छात्राें पर कैपिटलाइजेशन (पूंजीकरण) का बोझ नहीं डाल सकेंगे, इसलिए उनकी फीस एडमिशन एंड फी रेगुलेटरी कमेटी (एएफआरसी) ही तय करेगी।
अल्पसंख्यक कॉलेजों में संचालित प्रोफेशनल कोर्स की फीस एएफआरसी से तय होने के आदेश के खिलाफ अल्पसंख्यक कॉलेज संचालित करने वाली एक संस्था ने अपीलीय अथॉरिटी के समक्ष अपील की थी। एक बार अपील खारिज होने के बाद संस्था ने रिव्यू अपील की थी। इसे भी अपीलीय अथाॅरिटी व हाई कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस आलोक वर्मा ने खारिज कर दिया और एएफआरसी के आदेश को बरकरार रखा है। इसमें अल्पसंख्यक काॅलेजों में संचालित होने वाले प्रोफेशनल कोर्स की फीस तय करने का अधिकार एएफआरसी के क्षेत्राधिकार में बताया गया है। अपीलीय अथॉरिटी ने इस संबंध में 6 मार्च को आदेश जारी किया है।
अल्पसंख्यक कॉलेज संचालित करने वाली संस्थाएं एएफआरसी में आवेदन कर रही हैं कि उन्होंने जो फीस तय की है, एएफआरसी उसे मान्य करंे, लेकिन एएफआरसी इनकार कर रही है। ऐसे में इंदौर की आइकन एजुकेशन सोसायटी ने एएफआरसी में आवेदन देकर कहा कि वह अल्पसंख्यक श्रेणी में आते हैं, इसलिए उनकी फीस एएफआरसी तय नहीं करेगी। अल्पसंख्यक कॉलेजों को सुप्रीम कोर्ट से छूट मिली है। इस सोसायटी के तहत इंदौर इंस्टिट्यूट आॅफ लॉ, इंंदौर नर्सिंग कॉलेज और इंदौर अाइडियलिक इंस्टिट्यूट ऑफ मैनेजमेंट संचालित हो रहे हैं, लेकिन एएफआरसी की ओर से सुनवाई के दौरान सचिव डॉ. आलोक चौबे ने कहा गैर अनुदान प्राप्त संस्थाओं में संचालित प्रोफेशनल कोर्स की फीस तय करना उनके क्षेत्राधिकारी में आता है। यह पूरा मामला कैपिटेशन फीस से जुड़ा है। सभी खर्चें जिसमें ग्रोथ, डेवलपमेंट और महंगाई आदि के ऊपर ली जाने वाली फीस केपीटेशन फीस की क्षेणी में आती है। अल्पसंख्यक कॉलेजों के छात्रों पर कैपिटेशन फीस का बोझ नहीं पड़े, इसलिए एएफआरसी इनकी फीस तय करती है।
इधर, कॉलेज व विवि के 3 सत्रों की फीस तय करने की प्रक्रिया शुरू
एएफआरसी ने निजी कॉलेज व निजी विवि में संचालित प्रोफेशनल कोर्स की फीस तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके पहले चरण में आवेदन मांगे हैं। चिकित्सा, दंत चिकित्सा शिक्षण संस्थाओं में संचालित पीजी कोर्स की फीस तय कराने के लिए 12 मार्च तक और अन्य संस्थाओं से 16 अप्रैल तक आवेदन जमा करने को कहा है। एएफआरसी द्वारा सत्र 2020-21, 2021-22 और 2022-23 के लिए फीस तय की जाएगी।
छात्रों को मिलेगा इसका लाभ
डॉ. आलोक चौबे, सचिव एएफआरसी सचिवालय
खारिज होने के बाद फिर अपील करने पर लगाया 30 हजार हर्जाना
बार-बार अपील करने पर अपीलीय अथाॅरिटी ने संस्था पर 30 हजार रुपए हर्जाना भी लगाया है।
माइनॉरिटी और मेजॉरिटी को अलग नहीं किया जा सकता
याचिकाकर्ता कोर्ट जा सकता है...अपीलीय अथॉरिटी ने कहा है कि यदि याचिकाकर्ता अपने आप को पीड़ित महसूस करता है और इस मामले में विधायीका स्तर पर चूक होने की बात मानते हैं तो वह हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं।
लॉ डिपार्टमेंट ने एएफआरसी के पक्ष में रखी राय... एएफआरसी ने अल्पसंख्यक कॉलेजों के प्रोफेशनल कोर्स की फीस तय करने लॉ डिपार्टमेंट से राय मांगी थी। इसमें डिपार्टमेंट ने कहा कि फीस तय करने के लिए माइनॉरिटी और मेजॉरिटी को अलग नहीं किया जा सकता।
आदेश
कार्रवाई
हर्जाने की राशि एएफआरसी के खाते में 15 दिन के भीतर जमा करने के आदेश दिए गए हैं।