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बीएड और एमएड में आर्थिक आधार पर 10 % आरक्षण नहीं, शासन को कोर्ट जाने की चेतावनी
इंदौर सहित प्रदेशभर में बीएड, एमएड और डीएलएड कोर्स में 10 फीसदी आर्थिक आरक्षण लागू नहीं किए जाने को लेकर देवी अहिल्या यूनिवसिटी के कार्यपरिषद के पूर्व सदस्य केके तिवारी ने राज्य शासन और राजभवन को पत्र लिखा है। उन्होंने शासन की मंशा पर सवाल उठाते हुए चेतावनी दी कि यदि इसी सत्र से इस पर निर्णय नहीं हुआ तो कोर्ट जाऊंगा। तिवारी का आरोप है कि जानबूझकर लापरवारी की जा रही है। अभी तक शासन की तरफ से एनसीटीए (नेशनल काउंसिल फॉर टीचर्स एजुकेशन) को यह तक नहीं लिखा गया है कि वह 10 फीसदी आर्थिक आरक्षण के लिए 26 फीसदी सीटें बढ़ाने की अनुमति दें। जबकि अन्य कोर्स में यह आरक्षण लागू हो गया है। बीएड-एमएड कॉलेजों के एसोसिएशन ने भी कोर्ट जाने की बात कही है।
आरक्षण लागू होने से बढ़ेंगी 1700 सीटें
उच्च शिक्षा विभाग ने पिछले सत्र में बीकॉम, बीए और बीएससी, बीबीए जैसे यूजी तथा एमए, एमकॉम, एमएससी जैसे पीजी कोर्स में तो 10 फीसदी आरक्षण लागू कर दिया था, लेकिन बीएड और एमएड रह गए। डीएवीवी से 65 बीएड कॉलेज संबद्ध हैं, जिनमें 6600 सीटे हैं। अगर 26 फीसदी सीटें बढ़ती हैं तो इन कॉलेजों में कुल 1700 सीटों का इजाफा होगा।
नुकसान... बीएड और एमएड कॉलेजों के एसोसिएशन ने भी कोर्ट जाने की बात कही