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घुसपैठियों पर नियंत्रण नहीं और आम लोगों से मांग रहे नागरिकता का प्रमाण

एक वर्ष पहले
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सीएए, एनपीआर व एनआरसी के विरोध में शनिवार को महिलाओं ने रैली निकाली। झंडा चौक में सभा हुई। महिला दिवस के उपलक्ष्य में शनिवार को नर्मदा घाटी मंच ने रैली व सभा का आयोजन किया। राजीव गांधी पंचायती राज संगठन की राष्ट्रीय समन्वयक मीनाक्षी नटराजन ने कहा- सरकार अब तक घुसपैठियों पर नियंत्रण नहीं लगा सकी है और आम लोगों से नागरिकता का प्रमाण मांगा जा रहा है। उन्होंने इसकी तुलना नोट बंदी से की। साथ ही केंद्र सरकार पर सवाल उठाया कि आदिवासी, घुमंतु जाति के लोग उनके माता-पिता की जन्म तारीख व स्थान का प्रमाण कहां से लाएंगे, क्योंकि उनके पास इससे संबंधित कोई दस्तावेज ही नहीं है। सभा के बाद कुछ देर कलेक्टोरेट का घेराव कर तहसीलदार राजेश पाटीदार को आवेदन दिया।

शनिवार दाेपहर 1 बजे कारंजा चौक से झंडा चौक तक रैली निकाली। इसमें बड़ी संख्या में मुस्लिम समाज की महिलाएं व पुरुष भी शामिल हुए। नटराजन ने नए कानूनों को लेकर कहा- इसमें पूछे जाने वाले दो प्रश्न आपके माता-पिता की जन्म तारीख व जन्म स्थान का जवाब आदिवासियों के पास नहीं मिलेगा। आदिवासी सुदूर इलाकों में दलित समाज, घुमंतु जाति में किसी के लिए भी यह बताना मुश्किल है कि किसी का जन्म, किस तारीख में कहां पर हुआ। घुमंतु जाति तो निरंतर यात्रा करती है। ऐसे में वे प्रमाण कहां से जुटाएंगे। हम अच्छी तरह जानते हैं कि जब भी मूल निवासी या जाति प्रमाण की बात आदिवासी इलाकों में आती है तो समाज के लोग कोई प्रमाण नहीं जुटा पाते हैं, क्योंकि उनके पास इससे संबंधित कोई कागज नहीं है।

सभा के बाद कुछ देर कलेक्टोरेट का घेराव कर तहसीलदार को दिया आवेदन

झंडा चौक पर हुई सभा में मौजूद महिलाएं।

नहीं चाहिए नागरिकता व राष्ट्रीयता का प्रमाण

नटराजन ने कहा कि एनपीआर, एनआरसी और सीएए के विरोध में मैं यहां आई हूं। यहीं नहीं पूरे देश में सत्याग्रह में हिस्सा ले रही हूं। जिस दिन सीएए कानून पारित हुआ था, उसी दिन तय किया था और आह्वान भी किया था कि सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरुआत करते हुए न तो अपने कोई कागज दूंगी न अपनी कोई जानकारी दूंगी। मुझे अपनी राष्ट्रीयता का प्रमाण किसी से नहीं चाहिए। इस व्यवस्था से तो कतई नहीं चाहिए। उन्होंने इसे संविधान की धारा 14 का उल्लंघन बताया। विधि के सामने, कानून व्यवस्था के सामने, हर व्यक्ति बराबर है।

शराबबंदी व महिला अधिकार के उठाए मुद्दे

कमला यादव ने कहा- हम कागज नहीं दिखाएंगे। हम महिला के बिना देश चलना संभव नहीं है। हमारे क्षेत्र में पूरी तरह से शराबबंदी की जाए। सरस्वती बहन ने कहा कि सरकार को शराब बंद करना चाहिए। अन्यथा आंदोलन करेंगे। करिश्मा मंसूरी ने दिल्ली के शाहिन बाग में आंदोलन को लेकर कहा हम मुस्लिम महिलाओं बैठने के बाद दिल्ली की सरकार हिली है। महिलाओं को श्यामा मछुआरा, सीमा वास्कले, संगीता बहन ने भी संबोधित किया।

खून लेते वक्त नहीं देखते जात-पात

नर्मदा बचाओ आंदोलन प्रमुख मेधा पाटकर ने कहा- आज महिलाओं की सुनवाई हो रही है। हमारी ताकत, हमारी सोच से लड़ने की हिम्मत है। हमारी आंख के सामने मुद्दे, हिंसा है। इसका हमला नहीं चलेगा। बड़वानी शहर शहीद स्तंभ पर जो नाम है उससे साबित होता है कि सभी समाज के लोग रहते हैं। संविधान में जो लिखा गया है, उसको आगे बढ़ाना चाहिए। जाति के नाम पर झगड़ा नहीं चलेगा। खून लेते समय कोई भी जात-पात नहीं देखते है। सरकार को पूर्ण रूप से शराब बंदी करना होगी।
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