अब प्रकृति ने बदला रंग
आज होलिका दहन है। कल धुलेंडी। इस दिन पूरा देश विभिन्न रंगों-गुलालों से सराबोर रहेगा। कभी इन रंगों को बनाने मेंं अहम भूमिका टेसू के फूलों की होती थी, कुछ जगह आज भी है, लेकिन इस बार प्रकृति ने ऐसा रंग बदला है कि पलाश के अधिकांश पेड़ों पर टेसू के फूल नहीं खिल पाए हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि मौसम भी लगातार रंग बदल रहा है। टेसू के फूल खिलने के लिए 30 से 35 डिग्री तापमान जरूरी है। जबकि मार्च में भी ठंड पड़ रही है। दीपावली पर बारिश हो रही। सावन में तेज धूप खिल रही।
इस बार मार्च के पूरे सप्ताह मौसम खराब रहा। मौसम में बदलाव के कारण सर्दी, खांसी, बुखार के मौसमी बीमारी के मरीजों की संख्या भी अचानक बढ़ी। प्रदेश के कुछ शहरों में बारिश और ओले गिरे। जिसका असर खंडवा जिले में सर्द मौसम के रूप में देखने को मिला।
लोग अब भी यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि गर्म कपड़ों को अलमारी में रखें या फिर बाहर ही रहने दें। क्योंकि मौसम दिन में दिन बार बदल रहा है। सुबह सर्द हवा के साथ ठंड का सामना हो रहा है, तो दोपहर में तेज धूप के बाद रात आठ बजे के बाद ठंड लग रही है। जबकि दस दिन पहले रात का तापमान 17 डिग्री तक पहुंच गया था। जिससे लोगों को रात में गर्मी लग रही थी। पिछले चार दिन से दिन व रात का तापमान लगातार गिर रहा है। रविवार को न्यूनतम तापमान 14 डिग्री व अधिकतम तापमान 31.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। मौसम विभाग के मुताबिक अगले 48 घंटे में तापमान में ज्यादा बदलाव नहीं आएगा। 12 मार्च के बाद से दिन व रात का तापमान बढ़ने की संभावना है।
होली खेलने के साथ कपड़े भी रंगते थे
गांवों में आज भी टेसू के फूलों से केसरिया रंग बनाकर होली खेली जाती है। पुनासा के रमेशचंद्र नामदेव (76) व इब्राहिम सिद्दीकी (70) ने बताया टेसू के औषधीय गुण अधिक है। हम बचपन में टेसू के रंग से ही होली खेलते थे। रंग पक्का करने के लिए नमक डाला जाता था। फूलों को सुखाकर गुलाल भी बनाया जाता था। टेसू के रंग से कपड़े भी रंगे जाते थे। उन्होंने बताया 30 साल की नौकरी में एेसा पहली बार देख रहा हूं, जब टेसू के फूल नहीं िखले।
यह हैं औषधीय गुण
{ श्वांस व शरीर की दुर्गंध दूर करता है।
{ फूल के सेवन से ऊर्जा
बढ़ती है।
{ शरीर में पानी की कमी पूरी होती है।
{ खून बढ़ाने में भी सहायक है।
{ उदर रोगों के लिए टेसू के फूल रामबाण का काम करते हैं।
{ टेसू के उपयोग से रतौंधी की समस्या से निजात मिलती है।
{ टेसू का सेवन रक्त संचार को नियंत्रित करता है।
सुबह ठंड, दोपहर में तेज धूप और रात को फिर चलने लगी ठंडी हवा
फाल्गुन में फूलों के बजाय पत्तियों से लदा है पलाश का पेड़
क्योंकि... मार्च में भी पड़ रही ठंड, 35 डिग्री के आसपास तापमान न होने से कई पेड़ों पर नहीं खिले टेसू के फूल
भास्कर संवाददाता | खंडवा/पुनासा
बसंत ऋतु और फाल्गुन शुरू होते ही पतझड़ के साथ पलाश के पेड़ों पर टेसू फूलने लगते हैं। पेड़ पर पत्तों की बजाय केसरिया फूल ही नजर आते हैं। होली तक यह फूल पूरी बहार पर होते हैं, लेकिन इस साल वन क्षेत्रों में पलाश के पेड़ों पर टेसू दिखाई ही नहीं दे रहे हैं। पुनासा-सतवास हाईवे पर भी सड़क किनारे बड़ी संख्या में पलाश के पेड़ लगे हैं, लेकिन इन पर बहार (फूल) नहीं हैं। केसरिया टेसू वनों की खूबसूरती तो बढ़ाते ही हैं, होली पर रंग बनाने व कई रोगों के इलाज में भी उपयोगी हैं। रेंजर अनिल सरमंडल ने कहा टेसू फूलने के लिए 30-35 डिग्री के करीब तापमान होना ही चाहिए। रात का तापमान भी बढ़ना जरूरी है। इस साल मार्च का पहला सप्ताह बीतने तक भी मौसम ठंडा बना हुआ है। पर्याप्त तापमान के अभाव में ही इस साल टेसू दिखाई नहीं दे रहे हैं।
300 तापमान पर आते हैं फूल
इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर के कृषि वैज्ञानिक सीपी रंगडाले ने बताया कि पलाश के पेड़ को लगातार 30 डिग्री तापमान मिलने पर फूल आते हैं। इतना तापमान एक पखवाड़े से भी अधिक समय तक रहता है तो टेसू के फूल आने लगते हैं। इस बार अधिक बारिश व ठंड के लगातार बने रहने के कारण पलाश के फूल नहीं खिल सके।
पुनासा के जंगल में कई पेड़ों पर टेसू के फूल नहीं खिले, जबकि हर साल इस पर बड़ी संख्या में फूल लगते थे। इनसेट: कभी इतने फूल रहते थे।
रविवार सुबह मौसम में बदलाव दिखा। सुबह से ठंडी हवा चली। रात को भी एेसा ही दौर रहा।
5 दिन में ऐसे बदला मौसम
दिनांक न्यूनतम अधिकतम
4 मार्च 16.0 32.1
5 मार्च 15.4 31.5
6 मार्च 15.0 31.1
7 मार्च 14.4 32.1
8 मार्च 14.0 31.5