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अब आर्थिक-सामाजिक समस्याओं पर शोध, समाधान तलाशने होंगे
यूजीसी ने शोध को प्रभावी बनाने का निर्णय लिया है। इसके तहत बरकतउल्ला विवि समेत प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को क्षेेत्रीय, आर्थिक और सामाजिक समस्याओं से जुड़े विषयों पर रिसर्च शुरू करना होगा। इससे राष्ट्रीय स्तर के विषयों की कॉपी कर हो रही रिसर्च पर लगाम लग सकेगी। छात्रों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
आगामी शिक्षा सत्र 2020-21 से रिसर्च के क्षेत्र में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। यूजीसी ने इसकी रूपरेखा बनाकर सभी यूनिवर्सिटी का खाका तैयार करने के निर्देश दिए हैं। यह काम डिसिप्लिनरी रिसर्च फॉर इंडियाज डेवलपिंग इकॉनमी के तहत किया जा रहा है। सभी विवि और कॉलेजो में युवाओं को क्षेत्रीय स्तर के विषयों पर रिसर्च के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके माध्यम से एेसे युवाओं की पहचान की जाएगी, जो क्षेत्रीय, आर्थिक और सामाजिक समस्याओं को सुलझाने में रुचि रखते हैं। सभी विषयों पर अनुसंधान के लिए 50 लाख से एक करोड़ रुपए के अनुदान का प्रावधान है।
लेकिन इससे पहले विवि को अपनी तैयारी की रिपोर्ट यूजीसी को भेजनी होगी। इस पर यूजीसी के विशेषज्ञ चर्चा करके अनुदान देने के बारे में अपनी राय देंगे। अधिकारियों के अनुसार इस योजना का मकसद भारत की विकासशील अर्थव्यवस्था में योगदान के लिए सामाजिक नवाचार के क्षेत्र में अनुसंधान की मदद से समस्याओं के निवारण की कोशिश की जाएगी। इसके तहत सरकार, सभी यूनिवर्सिटी, स्वैच्छिक संगठनों के साथ उद्योगों की मदद भी ली जाएगी।
यूजीसी को जल्द सौपेंगे रिपोर्ट
रिसर्च के क्षेत्र में बड़े बदलाव का दौर शुरू हो गया है। इसमें क्षेत्रीय विषयों पर ज्यादा फोकस किया जा रहा है। हमारे 25 गाइड ने यूजीसी के नए मानकों पर काम करना शुरू कर दिया है। हमने 50 लाख रुपए का बजट बनाया है। जल्द ही अपनी रिपोर्ट यूजीसी को देंगे।
-प्रो.अारजे राव, कुलपति, बरकतउल्ला विवि, भोपाल
हमने लैब बनाकर काम
शुरू कर दिया
रिसर्च हमेशा नए विषयों पर होता है। यूजीसी का प्रयास है कि क्षेत्रीय स्तर की आर्थिक और सामाजिक समस्याओं का हल िनकाला जाए। हमने इसके लिए अलग से डिपार्टमेंट बना दिया है। जिस पर काम शुरू हो गया है। करीब 22 गाइड इस पर काम कर रहे हैं।
- प्रो. संगीता शुक्ला, कुलपति, जीवाजी विवि, ग्वालियर
रिसर्च के विषयों में बदलाव
8000 स्टूडेंट प्रतिवर्ष कर सकेंगे रिसर्च**
49 सरकारी-निजी विवि हैं प्रदेश में**
नए विषयों की बना
रहे हैं लिस्ट
विवि का मुख्य काम रिसर्च कराना है। रिसर्च नए क्षेत्रीय विषयों पर होना चाहिए, जिससे सामाजिक और आर्थिक बदलाव हो। डीएवीवी भी यूजीसी के इस कदम के साथ है। अगले सत्र में हम कई ऐसे नए विषयों पर रिसर्च कराएंगे, जो बिल्कुल अलग होंगे। इसके लिए हमारे गाइड तैयारी में जुटे हैं।
- प्रो. रेनू जैन, कुलपति, देवी अहिल्या विवि, इन्दौर