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अफसर कैबिन बैठेंगे या बीच-बचाव करेंगे

एक वर्ष पहले
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आरटीओ में पहले लाइसेंस बनकर आवेदक के हाथ में आ जाता था। अब हर ऑर्डर एआरटीओ की साइन के लिए जाता है। उसके बाद लाइसेंस जनरेट होता है। बताते हैं, इस पूरे मामले में दफ्तर के एक बाबू की बड़ी भूमिका है। वह ही तय करते हैं कि कौन-सी फाइल ऑर्डर के लिए पहले जाएगी। पिछले दिनों इसी बात पर वहां के एक कर्मचारी के साथ विवाद हो गया। मामला शांत करने के लिए अफसरों को बीच-बचाव करना पड़ा। कहने वाले कह रहे हैं कि आरटीओ में व्यवस्था से छेड़छाड़ का सिलसिला नहीं रुका तो अफसरों का समय कैबिन में कम और बीच-बचाव में ज्यादा गुजरेगा। }घुमक्कड़श्री
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