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पहले दिन सैकड़ों मुरीदों ने की जियारत, दरगाह पर मन्नत मांगी

एक वर्ष पहले
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जामली मूंदी स्थित सैलानी बाबा की दरगाह पर मंगलवार से पांच दिनी मेला शुरू हुआ। पहले दिन सैकड़ों मुरीदों ने दरगाह की जियारत की। 13 मार्च को मेले के मुख्य दिवस पर दरगाह में खिदमत करने वाले परिवार द्वारा चादर चढ़ाई जाएगी। सैलानी बाबा की दरगाह पर बाहरी बाधाओं से पीड़ित व्यक्ति पहुंचते हैं। चादर चढ़ाने के लिए जिले के विभिन्न क्षेत्राें के साथ ही प्रदेश के अन्य स्थानाें से भी लाेग अाते हैं। क्षेत्रवासी अनवर खान, अब्दुल खान और मेहबूब खान ने बताया करीब 55 साल पहले सैलानी बाबा की दरगाह की स्थापना की गई थी। लोग अपनी दुख-तकलीफ में बाबा की दरगाह पर आकर मन्नत मांगते हैं। सैलानी बाबा की दरगाह हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल है। मान्यता है जंजीरों में जकड़ कर लाए गए लोग दरगाह की परिक्रमा के बाद सामान्य होकर घर लौटते हैं। मेला शुरू होने के पहले से ही लोग यहां डेरा डाल कर रहना शुरू कर देते हैं।

मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए 10 जवान तैनात

मेले की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बुधवार को डीएसपी केपी डेविड, जावर थाना टीआई हिना डावर और एसआई अंतर सिंह चौहान ने निरीक्षण किया। उन्होंने बताया मेले में आने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए 10 जवान तैनात किए गए हैं। उन्हें लगातार मेले का भ्रमण करने की हिदायत दी। पार्किंग ठेकेदार को सड़क पर वाहन नहीं खड़े करने समझाइश दी। इस दौरान कुछ लोगों ने मेले में ओवर लोडिंग वाहनों की शिकायत की।

1965 में बुलढाणा से ईंट लाकर किया था दरगाह का निर्माण

दरगाह की खिदमत करने वाले परिवार के अनवर खान ने बताया बुलढाणा जिले के ग्राम सैलानी में रहने वाले बाबा अब्दुल रहमान संत (वली) थे। लगातार भ्रमण के कारण उनका नाम सैलानी पड़ा। अब्दुल की दादी की बाबा में गहरी आस्था थी। वे हर साल बुलढाणा सैलानी दरबार जाती थीं। संसाधनों की कमी से वहां पहुंचने में दिक्कत होती थी। बाबा ने स्वप्न में दर्शन देकर कहा परेशान होने की जरूरत नहीं है। मेरे नाम का छलावा (दरगाह) बना लो। मैं वहां भी तुम्हारे करीब रहूंगा। 1965 में बुलढाणा से बाबा की दरगाह से एक ईंट लाकर यहां दरगाह का निर्माण किया। तभी से यहां लोगों के आने का सिलसिला जारी है। यहां प्रत्येक गुरुवार को मुरीद आते हैं।

सैलानी बाबा की दरगाह पर सैकड़ों मुरीदों ने जिरायत कर मन्नत मांगी।
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