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कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में हमारे सबसे अहम हथियार और दुश्मन

Dhar News - कोरोना वायरस के खिलाफ देश में चल रहे 21 दिन के महायुद्ध में हमारे हथियार कोई दवाएं या भारी-भरकम तकनीक नहीं है। ये...

Mar 27, 2020, 07:00 AM IST

कोरोना वायरस के खिलाफ देश में चल रहे 21 दिन के महायुद्ध में हमारे हथियार कोई दवाएं या भारी-भरकम तकनीक नहीं है। ये बहुत साधारण चीजें हैं, जो इन दिनों हमारे जीवन में किसी हीरो का दर्जा रखती हैं और हर जगह नजर आ रही हैं। ये हैं - साबुन, हैंड सैनेटाइजर और काफी हद तक मास्क। जहां विश्व स्वास्थ्य संगठन ने साबुन से बार-बार हाथ धोने और हैंड सैनेटाइजर के इस्तेमाल पर बहुत ज्यादा जोर दिया है, वहीं लोग खुद को संक्रमण से बचाने के लिए बड़े पैमाने पर मास्क का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि डब्ल्यूएचओ स्वस्थ लोगों को मास्क पहनने की सलाह नहीं दे रहा है, फिर भी लोग एहतियातन इन्हें पहन रहे हैं। वहीं इस महायुद्ध में लोगों की लापरवाही और सोशल मीडिया, वाट्सएफ, यूट्यूब पर फैल रही अफवाहें विलेन का काम कर रही हैं।

एक अध्ययन के मुताबिक हैंड सैनेटाइजर बीमारियों को 26% तक कम कर सकता है। सीडीसी के मुताबिक यह तभी प्रभावी है, जब इसमें 60-70% एल्कोहल हो। डबल्यूएचओ एल्कोहल बेस्ड सैनेटाइजर की सलाह दी है।

कैसे काम करता है: साबुन की ही तरह, सैनेटाइजर कोरोना वायरस की अंदरूनी सतह पर असर करते हैं।

घर में नहीं बनता सैनेटाइजर: लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन की प्रोफेसर सैली ब्लूमफील्ड कहती हैं कि घर पर सैनटाइजर बनाया ही नहीं जा सकता। इसमें अन्य केमिकल्स के साथ 60 -70 फीसदी शुद्ध एल्कोहल की जरूरत होती है, जो घर पर उपलब्ध नहीं हो सकती।

मास्क बीमार व्यक्ति से बाकी लोगों में संक्रमण फैलने से रोकने में मदद कर रहे हैं। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक संक्रमित व्यक्ति, खांसी या छींक से पीड़ित या संक्रमण की आशंका वाले व्यक्ति और कोरोना के मरीज का इलाज कर या साथ रह रहे व्यक्ति को मास्क जरूर पहनना चाहिए। स्वस्थ व्यक्ति को मास्क पहनने की जरूरत नहीं है। डब्ल्यूएचओ का यह भी कहना है कि केवल मास्क पहनने से बचाव नहीं होगा। इसके साथ बार-बार हाथ धोना या सैनेटाइजर इस्तेमाल करना भी जरूरी है।


कब पहनें, कैसे पहनें?**

इसमें कम से कम 60-70 फीसदी एल्कोहल होना जरूरी है**

50 नैनोमीटर तक छोटे आकार के वायरस मारने की क्षमता**

सोशल मीडिया और वाट्सएप पर तेजी से अफवाहों वाले मैसेज फैल रहे हैं। यूट्यूब पर भी ऐसे वीडियोज हैं जो कोरोना का झूठा इलाज बता रहे हैं। येे वीडियो बनाने वाले चैनल्स के लाखों सब्सक्राइबर हैं। ऐसे कुछ चैनल्स का सोशलब्लेड पर किया गया अध्ययन बताता है कि इनके पिछले एक महीने में 5 लाख से 10 लाख तक सब्सक्राइबर बढ़ गए हैं।


एक संक्रमित व्यक्ति की लापरवाही हजारों को बीमार कर सकती है। लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है, इसकी एक बानगी-


दक्षिण कोरिया में शुरुआती चार हफ्तों में कुल 30 मामले सामने आए थे। इन्हीं 30 संक्रमितों की वजह से फरवरी के अंत कोरोना वायरस से पीड़ित लोगों को आंकड़ा 1000 तक पहुंचा था। फिर आई ‘पेशेंट 31’। इस 61 वर्षीय महिला के संक्रमित होने की जानकारी मिलने से पहले वह देगू शहर और राजधानी सिओल के कई इलाकों में घूमती रही। इस दौरान वह दो बार शिनचियोंजी चर्च के समारोहों में गई। डॉक्टरों ने 15 फरवरी को उससे कहा भी कि उसे तेज बुखार है और कोरोना का टेस्ट करवा लेना चाहिए। लेकिन वह दोस्त के साथ एक होटल में बुफे लंच के लिए चली गई। उसके लक्षण बढ़े तो 17 फरवरी को टेस्ट हुआ। पता चला वह दक्षिण कोरिया की 31वीं मरीज है।

इसके बाद ही कुछ ही दिनों में देश में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ गई, जिसमें शिनचियोंजी चर्च और उसके आस-पास के इलाकों के सैकड़ों लोग पॉजिटिव आने लगे। कोरिया सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (केसीडीसी) ने ऐसे 9300 लोगों की लिस्ट निकाली जो शिनचियोंजी चर्च के उन दो समारोहों में गए थे। हजारों पॉजिटिव आए। उधर एक नजदीकी अस्पताल में कोरोना मरीजों का एक और समूह सामने आने लगा। आधिकारियों को पता चला कि दोनों जगहों के मरीजों का संबंध पेशेंट 31 से रहा है। अब दक्षिण कोरिया में कुल मरीजों में 60% मरीज शिनचियोंजी चर्च समूह से हैं। इनकी संख्या 5,016 से भी ज्यादा है। जबकि कुल मरीज 8900 से ज्यादा हैं।

इलाज बताने वाले यूट्यूब चैनल्स के सब्सक्राइबर में 10 लाख बढ़े
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दक्षिण कोरिया में 60% से ज्यादा मामले एक महिला की वजह से
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डब्ल्यूएचओ से लेकर डॉक्टर और स्वास्थ्य मंत्रालयों तक, सभी की सलाह है कि साबुन से दिन में 7-8 बार तक हाथ धोएं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक साबुन 50 से 200 नैनोमीटर तक छोटे आकार के वायरस मार सकता है। अगर वायरस हाथ पर रह जाता है और आप चेहरे पर हाथ लगाते हैं तो वायरस के श्वसन तंत्र में जाने की आशंका रहती है।

साबुन कैसे काम करता है: वायरस की संरचना ऐसी होती है कि वह हाथ से चिपक जाता है। यूनिवर्सिटी ऑफ पिट्सबर्ग मेडिकल सेंटर के डॉक्टर जॉन विलियम्स बताते हैं कि अगर कोरोना वायरस को माइक्रोस्कोप में देखेंगे तो पाएंगे कि इसकी सतह पर क्राउन (मुकुट) होते हैं। इन क्राउन के नीचे वायरस के लिपिड्स (फैट) होते हैं। साबुन के माल्यूक्यूल्स पानी के साथ मिलकर वायरस के फैट वाले हिस्से को भी हटा देते हैं।

20 सेकेंड ही क्यों: इसके बारे में कोई वैज्ञानिक शोध नहीं है, लेकिन डब्ल्यूएचओ के मुताबिक हाथ के सर्फेस एरिया को देखते हुए हाथों को अच्छे से धोने की पूरी प्रक्रिया में 20 से 30 सेकंड का समय लगता है।

कोरोना के विलेन
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कोरोना के हीरो
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21 दिन के महायुद्ध में दवाएं या तकनीक नहीं, छोटी-छोटी चीजें बचाव

कोरोना से कैसे लड़ें? वायरस से लड़ने में किससे मिल रही मदद और किससे खतरा

40 करोड़ से भी ज्यादा वाट्सएप यूजर्स हैंं

47 करोड़ से ज्यादा लोगों के पास स्मार्टफोन हैं

26 करोड़ से ज्यादा एक्टिव यूजर्स है यूट्यूब पर

अफवाहें यहां ज्यादा फैल सकती हैं क्योंकि देश में...**

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