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पटेल को चार-चार हजार रु. एडवांस दिए फिर कालीभीत के झिरपा में तैयार कर रहे थे नवाड़, 9 आदिवासी गिरफ्तार
खालवा वन परिक्षेत्र की पश्चिम कालीभीत के वनग्राम झिरपा के जंगल में अारक्षित जमीन पर नवाड़ (खेती के रूप में परिवर्तित करने का प्रयास) करते 9 लोगों (आदिवासियों) को वन विभाग ने गिरफ्तार किया है। सभी आरोपी बड़वानी जिले की सेंधवा तहसील के बावदड़ गांव के निवासी हैं। जो कि झिरपा व बावदड़ के पटेलों की सहमति के बाद वन भूमि पर नवाड़ तैयार करने आए थे। आदिवासियों की तैयारी थी कि होली की छुट्टी में वन विभाग की टीम छुट्टी पर रहेगी। इस बीच वह जंगल पर आराम से कब्जा कर लेंगे। अतिक्रमण को लेकर वनकर्मियों को मुखबिर ने पहले ही जानकारी दे दी थी। इस कारण वन अमले ने वन सुरक्षा समिति व ग्रामीणों के सहयोग से घेराबंदी कर आरोपियों को गिरफ्तार किया। जिन पर भारतीय वन अधिनियम 1927 की धारा 2(4), 26(1) क, ख, ज के तहत केस दर्ज किया गया।
घटना सोमवार रात को झिरपा सर्किल की पूर्व बीट के कक्ष क्रमांक 674 की है। जंगल पहुंच मार्ग से दो किमी अंदर इस कक्ष में रात को आग दिखने के साथ कुल्हाड़ी की आवाज आ रही थी। गुलाई, झिरपा व दावनिया के परिक्षेत्र सहायक, वनरक्षक, वन सुरक्षा समिति सदस्यों ने ग्रामीणों को मदद से घेराबंदी की। यह आरोपी जंगल में झाड़ियों एवं पेड़ों की कटाई कर खेती के लिए जमीन बनाने की तैयारी कर रहे थे। कुछ झाड़िया व तीन-चार पेड़ काट भी चुके थे। वन विभाग की टीम 9 आरोपियों को पकड़कर खालवा परिक्षेत्र कार्यालय लाई। पूछताछ में उन्होंने स्वयं को बड़वानी जिले की सेंधवा तहसील के ग्राम बावदड़ का निवासी बताया। उन्होंने बताया वे खेती के लिए जमीन तैयार करने ही आए थे। मौके से लकड़ी कटाई के औजार व एक चार पहिया वाहन (तूफान) जब्त किया गया है।
131 नामों की सूची मिली, प्रत्येक से चार हजार वसूले
सूत्रों के अनुसार 200 से अधिक किमी दूर से खंडवा जिले में आकर जमीन पर कब्जा करने की कोशिश करते हैं। यह स्थानीय लोगों के रिश्तेदार होते हैं जो उनकी मदद करते हैं। आरोपियों के पास से कुछ रुपए व एक पर्ची बरामद हुई है जिसमें 131 लोगों के नाम लिखे हैं। सूत्रों के अनुसार प्रत्येक व्यक्ति से चार हजार रुपए चंदा लिया जाता है तो संबंधित वन क्षेत्र के अधिकारी को रिश्वत के रूप में देना होता है। यदि अधिकारी रुपए ना ले तो उसी राशि से आंदोलन आदि कर प्रशासन को झुकाने के लिए भीड़ जुटाने का काम किया जाता है। भीड़ देख इन्हें नेताओं का समर्थन मिल जाता है। इस घटना से ग्रामीणों में चर्चा है कि खालवा का जंगल भी खतरे में है।
जमानती अपराध, इसलिए मुचलके पर छोड़ा
आरोपियों की जमानत के लिए अधिवक्ता वीरेंद्र वर्मा ने जमानती आवेदन पेश किया जिस पर जज ने वन विभाग के अधिकारियों से कहा कि जमानती धारा का अपराध है। आरोपी को वन विभाग ऑफिस से ही जमानत पर छोड़ना था।
अतिक्रमण की तैयारी- होली की छुट्टी में जंगल पर कब्जे करने की
यह हैं आरोपी : भाई दास पिता नाहर सिंग (45), किरता पिता डेबरा (35), रमेश पिता भईला (34), देवलिया पिता देड़ा (37), बेचान पिता रुमसिंग (28), मीरसिंग पिता संपत (40), बलराम पिता रुमला (45), रमेश पिता नाहर सिंग (27) व मांगीलाल पिता दशरथ सभी जाति बारेला।
कंडा जलाने से अलर्ट हुआ वन अमला
रेंजर अभयसिंह भूरिया ने बताया हमें एक सप्ताह पूर्व ही सूचना मिली थी कि अतिक्रमणकारी चिह्नित स्थान पर कंडा जलाकर गए हैं और होली के दिन खालवा क्षेत्र के जंगल में बड़े स्तर पर कटाई करने वाले हैं। हमने अमले और वन सुरक्षा समिति को सतर्क कर दिया था। रविवार रात ही गठित दल ने सर्चिंग शुरू कर दी थी। सोमवार को सूचना मिली कि दो-तीन वाहन से बाहर क्षेत्र के आदिवासी जंगल की ओर गए हैं। सोमवार का रात को कक्ष क्रमांक 764 की घेराबंदी कर आरोपियों को पकड़ लिया गया। उनसे कुल्हाड़ी, दराते, आग जलाने के साधन व तूफान-ट्रैक्स वाहन (एमपी-11 बीई-1432) जब्त किए गए।
पटेल राजी तो दो लाख रु. में दस एकड़ वनभूमि पर कर लो कब्जा
आरोपियों ने कहा पटेल को नहीं छोड़ेंगे
जिला न्यायालय में आरोपियों ने कहा कि कालीभींत व बावदड़ के पटेल के बीच बातचीत के बाद ही हम लोग यहां तक आए। प्रत्येक ने चार-चार हजार रुपए पटेल को दिए हैं। करीब 50 हजार रुपए खर्च किए हैं। फॉरेस्ट वाले आए तो पटेल पहले ही भाग गया। हम तो फंस गए लेकिन पटेल को नहीं छोड़ेंगे।
29 सितंबर 19 को प्रकाशित खबर।
भास्कर ने किया था अलर्ट
खंडवा वन परिक्षेत्र में चारों तरफ तेजी से जंगल काटकर नवाड़ तैयार की जा रही है। जिसे लेकर भास्कर ने 29 सितंबर 19 को आमागुजरी के जंगल से ग्राउंड रिपोर्ट की थी। खबर में विभाग के लिए अलर्ट किया गया था कि खंडवा-बुरहानपुर वन क्षेत्र में नवाड़ पर काबिज खरगोन-बड़वानी के आदिवासियों को रुपए लेकर पटेल (आदिवासियों के गांव का मुखिया) कब्जे करवा रहे हैं। जो आदिवासी पहले से नवाड़ पर काबिज है वो बाहर (खरगोन-बड़वानी) से आए हुए अपने रिश्तदारों को खंडवा वन क्षेत्र में बुलाकर कब्जा करवा रहे हैं। जिसकी कीमत नवाड़ के पटेल को दो से ढाई लाख रुपए तक मिल रही है। जमीन पसंद आने पर पटेल की सुरक्षा में जंगल पर कब्जा किया जाता है। खालवा के झिरपा गांव में भी यही हुआ। बड़वानी के आदिवासियों को जमीन पसंद आ गई। एक महीने से सौदा चल रहा था। जिसकी भनक वन विभाग को लग गई।
खालवा वन परिक्षेत्र कार्यालय में सभी आरोपियों से पूछताछ की गई।