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PIU ने घटिया बनाए 29 भवन, PWD लेने को तैयार नहीं**

एक वर्ष पहले
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पीआईयू जिन भवनों का निर्माण करता है, 3 साल तक उनका मेंटेनेंस उसे ही करना होता है। उसके बाद मेंटेनेंस के लिए भवन पीडब्ल्यूडी को सौंप दिए जाते हैं। इंदौर में पीआईयू के 29 भवनों को मेंटेनेंस के लिए पीडब्ल्यूडी को सौंपा जाना है, लेकिन पीडब्ल्यूडी ने भवनों को घटिया बताकर उन्हें लेने से इंकार कर दिया है।

पड़ताल के मुताबिक पीआईयू ने पत्थर गोदाम रोड पर पांच वर्ष पहले करीब 70 लाख रुपए की लागत से पशु चिकित्सालय भवन बनाया था। मौजूदा स्थिति यह है कि कमरों की दीवारें दरक गई हैं। बारिश में छत से पानी टपकता है। खिड़कियों की जालियां उखड़ रही हैं।

डॉ. दिनकर राव पाटिल बताते हैं कि एक कमरे में डिजीटल एक्स-रे मशीनें रखवाई थीं, लेकिन वहां भी पानी टपकने लगा। कुछ दिनों तक मशीनों को पॉलिथीन से ढंककर जैसे-तैसे काम चलाया गया।

इसी तरह पीआईयू ने स्कीम 78 स्थित अरण्य नगर में शासकीय चिकित्सालय भवन बनाया था। करीब 80 लाख रुपए लागत से बने इस भवन की दीवारों में दरारें आ गई हैं। बारिश का पानी दरारों से रिसकर कमरों में भर जाता है। छत भी टपकती है। यहां की स्टाफ नर्स प्रियंका मसीह ने बताया सबसे ज्यादा दिक्कत ड्रैनेज सिस्टम की है। इसका काम ठीक तरह से नहीं किया गया है। इस वजह से भवन के चारों शौचालय उपयोग लायक नहीं हैं।

पशु चिकित्सालय

अरण्य नगर चिकित्सालय

किला मैदान स्कूल

घटिया निर्माण की दास्तां बयां करती तस्वीर

मरम्मत के बिना नहीं ले सकते

पीआईयू ने शहर में विद्यालय, चिकित्सालय, प्रयोगशाला और शासकीय कार्यालयों के लिए 29 भवन बनाए हैं। घटिया निर्माण की वजह से हम इनके मेंटेनेंस की जिम्मेदारी नहीं ले सकते हैं।

राजेंद्र जोशी, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर पीडब्ल्यूडी

हम सभी भवनों की जांच कराएंगे

मेंटेनेंस के लिए 29 भवन पीडब्ल्यूडी को हैंडओवर किए जाना हैं। उन भवनों का निर्माण घटिया बताया जा रहा है। यह भवन जिन विभागों के लिए बनाए गए हैं, वह भी शिकायतें कर रहे हैं। दो दिन पहले ही मैंने यहां की जिम्मेदारी संभाली है। इसलिए पहले सभी भवनों की फाइल मंगाकर देखूंगा। भवनों की जांच कराने के बाद मरम्मत कराएंगे।

निर्मल श्रीवास्तव, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर पीआईयू

पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने अपने ही विभाग यानी पीआईयू द्वारा बनाए गए भवनों को घटिया बताया है। मामला करोड़ों रुपए की लागत से तैयार किए गए विद्यालय, छात्रावास, चिकित्सालय, प्रयोगशाला और कर्मचारियों के लिए बनाए गए 29 भवनों का है। ये सभी भवन पीआईयू ने बनाए हैं, जिन्हें मेंटेनेंस के लिए पीडब्ल्यूडी को हैंडओवर किया जाना है, लेकिन अधिकारियों ने घटिया निर्माण बताकर इन्हें लेने इंकार कर दिया है।

खिड़की, दरवाजे चोर उखाड़ ले गए

उज्जैन रोड पर टोल टैक्स के पास 52 एकड़ में जेल का निर्माण होना है। यहां पीआईयू ने जेल की दीवार, स्टाफ के लिए 21 क्वार्टर, जेलर का बंगला और दफ्तर बनाया है। स्टाफ क्वार्टर, बंगले और दफ्तर की दीवारों में दरारें आ गई हैं। चोर खिड़की, दरवाजे उखाड़कर ले गए। इसी तरह महारानी लक्ष्मीबाई स्कूल के छात्रावास में भी दरारें उभर आई हैं। यहां ड्रैनेज की भी समस्या है। किला मैदान स्कूल की प्रयोगशाला और एमओजी लाइंस में बनाए गए पंजीयन कार्यालय की दीवारों के साथ ही छत दरक गई है।

6 फीसदी राशि से दुरुस्त कर सकते हैं भवन

पीआईयू जिस प्रोजेक्ट पर काम करता है, उसकी लागत की 6 फीसदी राशि विभाग को मिलती है। इससे विभाग का खर्च चलता है। पीआईयू के अधिकारियों का कहना है कि भवनों का निर्माण ठेकेदारों से कराया था। गारंटी पीरियड खत्म हो गया है, कुछ ठेकेदारों की मृत्यु हो गई है। विभाग के पास रिपेयरिंग के लिए अलग से बजट नहीं है। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है पीआईयू चाहे तो 6 फीसदी राशि से मरम्मत करा सकता है। उसके बाद ही वह मेेंटेनेंस की जिम्मेदारी लेंगे।

मेंटेनेंस की जवाबदारी नहीं ले रहा है PWD क्योंकि विद्यालय, छात्रावास, चिकित्सालय, प्रयोगशाला और पशु चिकित्सालय के भवनों में आ गई दरारें**

घटिया निर्माण का नमूना यह है कि बारिश में दीवारों और छत से टपकता है पानी**
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