सरकारी कॉलेज कैंपस काे स्मार्ट बनाने की योजना ठप

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Jan 16, 2020, 07:55 AM IST
Indore News - mp news plan to make government college campus smart
सरकारी कॉलेज परिसरों को वाई-फाई के जरिए इंटरनेट सुविधा देकर उन्हें स्मार्ट कैम्पस के रूप में विकसित करने की तैयारी थी। इसके लिए वर्ल्ड बैंक की मदद से गूगल की टीम बुलाकर ट्रेनिंग देने का दावा किया गया, लेकिन यह काम अब तक पूरा नहीं हो पाया। अब सरकार इसे आगे बढ़ाने की बात कर रही है।

इंदौर/भोपाल
ई-शक्ति के अंतर्गत शुरुआती चरण में प्रदेश के 128 कॉलेजों को स्मार्ट कैम्पस में तब्दील करने की योजना थी। ये वे कॉलेज हैं, जहां वाई-फाई लगाया जा चुका है। इनमें बड़े शहरों के दस कॉलेज शामिल हैं। स्मार्ट कैम्पस का मतलब वाई-फाई जोन, ई-बुक्स रीडिंग फेसिलिटी, ऑनलाइन एडमिशन, प्रोफेसर के ऑनलाइन लेक्चर और यूट्यूब चैनल आदि शामिल है।

मूल रूप से उपरोक्त योजना महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा शुरू की गई थी। लेकिन इसे गति दी उच्च शिक्षा विभाग ने। इसके पहले चरण में विभाग ने प्रत्येक शासकीय कॉलेज को एक नोडल सेंटर बनाया है। यहां कॉलेज के ही एक व्यक्ति को नोडल ऑफिसर बनाया गया है। इसका काम था कि वह कॉलेज के अंतर्गत अन्य प्राइवेट कॉलेजों को इस मुहिम से जोड़े। इसके बाद इन चयनित कॉलेजों में ई-लायब्रेरी और वाई-फाई का काम पूरा किया गया। लेकिन जानकारी के अभाव में छात्राएं इस सुविधा का लाभ नहीं ले पा रही हैं, जिनके लिए यह योजना बनी है।

योजना के माध्यम से छात्राओं को बताया जाना था कि वे इंटरनेट का सही इस्तेमाल कैसे करें और इसका क्या लाभ होगा? इस अभियान में वर्ल्ड बैंक की तरफ से वित्तीय सहायता दी गई है। इस कवायद का मकसद यह है कि प्रत्येक कॉलेज में 100 फीसदी काम ऑनलाइन हो और उसमें छात्राओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। लेकिन विभाग की यह मंशा अब तक पूरी नहीं हो सकी है। हाल यह है कि कॉलेजों में वाई-फाई सिस्टम लग तो गए हैं, लेकिन वे ठीक ढंग से काम नहीं कर रहे हैं। यू-ट्यूब के लिए कोई लेक्चर रिकॉर्ड नहीं किया जाता है।

कई छात्राओं को इंटरनेट का उपयोग करना ही नहीं आता

विभाग की कोशिशों के बाद भी कॉलेजों में छात्राएं अब भी इंटरनेट का उपेयाग नहीं कर पा रही हैं। कारण है कि कुछ छात्राओं को इंटरनेट का सही उपयोग करना ही नहीं आता है तो कुछ उसके दुष्परिणामों को लेकर डर जाती हैं। विभाग का मकसद यह है कि वह अधिक से अधिक छात्राओं से सीधा संवाद कर सके। इसके पहले केंद्र सरकार ने आकाश टैबलेट की मदद से छात्रों को नेट से जोड़ने की कोशिश की थी, लेकिन वह स्कीम बुरी तरह फ्लॉप हो गई। इसके बाद सरकार ने कॉलेज में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राअों को स्मार्ट फोन बांटे। इसी के बाद यह कांसेप्ट आया कि क्यों न इस स्मार्ट फोन की मदद से छात्राओं को स्मार्ट बनाया जाए। इसके लिए प्रत्येक कॉलेज के शिक्षकों को जोड़ा जाएगा और फिर उनकी ट्रेनिंग करवाई जाएगी। ट्रेनिंग कराने का काम गूगल इंडिया की टीम को सौंपा जाना था।

समीक्षा कर दोबारा शुरू करवाएंगे

 प्रोजेक्ट तो अच्छा है, लेकिन पिछली सरकार ने कई काम केवल खानापूर्ति के लिए करवाए थे। इसलिए हम इस पूरे प्रोजेक्ट की नए सिरे से समीक्षा करवाएंगे और इसे दोबारा शुरू करेंगे। हमारी प्राथमिकता है कि प्रत्येक कॉलेज स्मार्ट कैम्पस के रूप में डेवलप हो और इसका पूरा लाभ छात्र-छात्राओं को मिले।

जीतू पटवारी, उच्च शिक्षा मंत्री, मप्र शासन

एक बार सभी विभागों से चर्चा करेंगे

 हमारे विभाग में इस पर काफी काम हुआ है और बाकी विभागों की स्थिति भी जानेंगे। ई-शक्ति योजना से जिन विभागों को जोड़ा गया, उनसे दोबारा पत्राचार करेंगे और जानेंगे कि काम कहां तक पहुंचा। यदि कोई कमी है तो उसे दूर किया जाएगा।।

इमरती देवी, मंत्री, महिला एवं बाल विकास विभाग मप्र

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