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यूटीडी प्रोफेसरों के प्रमोशन की प्रक्रिया अगले माह से

एक वर्ष पहले
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देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी 32 टीचिंग विभागों की 50 से ज्यादा फैकल्टी के प्रमोशन की प्रक्रिया अगले माह शुरू कर देगा। इसके लिए यूटीडी के अलग-अलग विभागों से लिस्ट मांगी गई है। संभावना है कि जुलाई में शुरू होने वाले नए सत्र से पहले यह प्रक्रिया पूरी भी कर ली जाए। दरअसल, यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन (यूजीसी) ने करियर एडवांसमेंट स्कीम के तहत होने वाले इन प्रमोशन पर यूनिवर्सिटी को तत्काल कदम उठाने को कहा था। कई वर्ष से ये प्रमोशन रुके हुए हैं।

डीएवीवी में 245 नियमित फैकल्टी हैं। इनमें से 50 से ज्यादा को फायदा मिलेगा। लेक्चरर से रीडर और रीडर से प्रोफेसर के प्रमोशन लंबे समय से रुके थे। यूजीसी ने आदेश में कहा था कि किसी भी स्थिति में इस पर तत्काल कदम उठाए जाना चाहिए, अगर यूनिवर्सिटी ऐसा नहीं करती है तो यूजीसी ग्रांट रोकने जैसे कदम उठा सकता है।

कुछ रिटायर हो गए तो
अन्य यूनिवर्सिटी चले गए


दरअसल, यूनिवर्सिटी में पांच साल में 30 से ज्यादा प्रोफेसर या तो रिटायर हो गए या कुछ अन्य यूनिवर्सिटी में चले गए, जबकि कुछ की असामयिक मौत हो गई। ऐसे में संख्या 285 से 245 पर आ गई। यही नहीं, इनमें से भी कई का प्रमोशन लगातार अटकता रहा। फैकल्टी ने प्रमोशन को लेकर यूनिवर्सिटी के समक्ष अपनी बात रखी। हाल ही में उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी के समक्ष भी मामला उठाया। यूजीसी ने यह आदेश सभी स्टेट यूनिवर्सिटी के लिए जारी किया है। रजिस्ट्रार अनिल शर्मा के
अनुसार जितने भी प्रमोशन पेंडिंग हैं, उनकी लिस्ट मंगाकर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

इधर... अब भी 147 पद खाली, रोस्टर पर देरी के कारण विज्ञापन अटका

इधर, यूनिवर्सिटी में अब भी 191 पद खाली हैं। इनमें से 147 पदों पर मंजूरी मिल चुकी है। पिछले साल विज्ञापन भी जारी हो चुका था और नियुक्ति प्रक्रिया भी शुरू हो गई थी, लेकिन रोस्टर की गफलत के चक्कर में प्रदेश सरकार ने नियुक्तियां रोक दी थीं। अब शासन की तरफ से 10 फीसदी आर्थिक आरक्षण के साथ नया रोस्टर तैयार किया जा रहा है। यह रोस्टर वैसे तो फरवरी के पहले सप्ताह तक तय हो जाना था, लेकिन अब तक नहीं भेजा गया है। इसके कारण यूनिवर्सिटी विज्ञापन तक जारी नहीं कर पा रही है। शासन ने कुछ माह पहले 100 पॉइंट रोस्टर भेजा था, लेकिन उसमें आर्थिक आधार पर लागू 10 फीसदी आरक्षण शामिल नहीं किया था। अब नए सिरे से रोस्टर तय कर भेजा जा रहा है।

पढ़ाई पर असर, तीन साल के अनुबंध आधार पर ही हो पाएगी इनकी नियुक्ति

रोस्टर आने के बाद भी नियुक्ति तीन साल के अनुबंध के आधार पर ही हो पाएगी। नियमित नियुक्ति संभव नहीं हो पाएगी। सबसे ज्यादा दिक्कत स्कूल ऑफ लॉ, आईईटी, कॉमर्स, आईएमएस और कुछ अन्य विभागों में है। रजिस्ट्रार अनिल शर्मा का कहना है कि रोस्टर पर सरकार से पत्र व्यवहार किया है। जल्द ही नया रोस्टर मिल जाएगा। इसके आधार पर तत्काल विज्ञापन जारी कर प्रक्रिया शुरू कर देंगे। कोशिश तो यही है कि पढ़ाई पर असर न हो और जुलाई में नया सत्र शुरू होने से पहले ही नियुक्तियां हो जाएं।

यूजीसी की सख्ती का असर**
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