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नियुक्ति के तीन महीने बाद भी प्रोफेसर्स को वेतन नहीं

एक वर्ष पहले
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शिक्षा विभाग असिस्टेंट प्रोफेसर पदों की वित्त विभाग के पोर्टल पर मैपिंग नहीं करा पाया है। नतीजतन, सेलरी ड्रॉ नहीं हो रही है।

उच्च शिक्षा विभाग की लापरवाही सरकारी कॉलेजों में नौकरी पाने वाले नए असिस्टेंट प्रोफेसर्स पर भारी पड़ रही है। विभाग ने पहले चयनित उम्मीदवारों को नौकरी देेने में कई साल लगा दिए। उन्हें जैसे-तैसे नौकरी मिल तो अब अधिकारी उन्हें वेतन के लिए दफ्तरों के चक्कर लगवा रहे हैं। बताया जाता है कि शिक्षा विभाग ने उम्मीदवारों को सरकारी कॉलेजों में रिक्त पदों पर नियुक्ति तो दे दी, लेकिन वे पद वित्त विभाग के आईएफएमआईएस पोर्टल पर मेप नहीं कराए गए। ट्रेजरी से उन्हीं पदों की सेलरी निकलती है, जो इस पोर्टल पर मैप्ड होते हैं। पदों की मैपिंग के साथ ही संबंधित कॉलेज का पद पोर्टल पर अपडेट हो जाता है। इसके साथ एम्प्लाई कोड और प्रान जनरेट होता है। मैप्ड पदों पर ही ट्रेजरी सेलरी ड्रॉ करती है। नवनियुक्त प्रोफेसरों के मामले में यह सारी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।

मैपिंग के बाद ही मिल सकेगा वेतन

उच्च शिक्षा विभाग ने अभी तक वित्त विभाग को आईएफएमआईएस पोर्टल पर अपडेट करने के लिए पदों का डाटा ही नहीं भेजा है। लिहाजा वहां मैपिंग नहीं हो पाई है। नतीजतन, अधिकांश प्रोफेसर्स को अब तक वेतन नहीं मिला है। विभाग के अतिरिक्त संचालक आरसी जाटवा के मुताबिक हमारी पूरी कोशिश है कि असिस्टेंट प्रोफेसर्स की मैपिंग जल्द हो और उन्हें वेतन मिल सके। इसके लिए हमने वरिष्ठ कार्यालय को पदों की जानकारी भेजी है। हम दोबारा इस मामले में पत्र लिख रहे हैं।
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