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संपत्ति, सत्ता, सौंदर्य व स्वास्थ्य ये मरने तक हैं, सद् गुण, संवेदनशीलता और समाधि अगले जन्म में जाने वाले हैं

Badwani News - संपत्ति, सत्ता, सौंदर्य व स्वास्थ्य ये मरने तक ही हैं। कितना प्रयास करोगे आगे नहीं जा पाएंगे। वहीं सद् गुण,...

Dec 04, 2019, 10:30 AM IST
संपत्ति, सत्ता, सौंदर्य व स्वास्थ्य ये मरने तक ही हैं। कितना प्रयास करोगे आगे नहीं जा पाएंगे। वहीं सद् गुण, संवेदनशीलता, समाधि और समझ ये अगले जन्म में जाने वाला है। दोनों को आमने-सामने रखकर आपको तय करना है आपको क्या चाहिए।

इंदौर में चातुर्मास के बाद महाराष्ट्र के शाहदा जाने के दौरान शहर में रूके पद्मभूषण आचार्य विजय र| सुंदर सुरीश्वर मसा ने ये बात सोमवार को प्रवचन में कही। शहर में 6.30 बजे उनका मंगल प्रवेश हुआ। पुराने बस स्टैंड से श्वेतांबर मूर्तिपूजक जैन संघ के सदस्यों ने अगवानी की और शोभायात्रा के रूप में मंगल भवन तक ले गए। यहां उन्होंने 9:30 बजे से प्रवचन दिए। उन्होंने कहा संपत्ति, सत्ता, सौंदर्य व स्वास्थ्य क्षणभर में खत्म हो जाते हैं। जैसे नोटबंदी के दौरान रुपए के साथ हुआ। वहीं सद्गुण सहित चार चीजें आगे तक जाने वाली है। इनमें से अाज किसी एक पर अमल करने का प्रयास करें। आज के प्रवचन से दो लक्ष्य बना लीजिए। मुझे सुख चाहिए ये नहीं मुझे सुख देना चाहिए। मुझे दुख नहीं चाहिए ये नहीं मुझे किसी को दुख देना नहीं चाहिए। प्रवचन के अंत में जैन समाजजनों ने संतश्री को वस्त्र भेंट किए।

मंगल भवन में प्रवचन देते आचार्यश्री।

नकली नोट को फाड़ देना भी एक देश सेवा

प्रवचन में संतश्री ने कहा गलती से किसी ने तुम्हें नकली नोट दे दिया तो उसे लेने के बाद आपको पता चला तो आप क्या करोगे? प्रवचन में मौजूद किसी ने कहा दूसरों को टिका देंगे। इस पर संतश्री मजाकिया लहजे में बोले ये सेंधवा की सोच। पता तो चले ना मुझे किनके बीच बोलना है। आगे उन्होंने कहा असली व नकली नोट जेब में होता है तो नकली नोट ही चलता है। आपको पता है कि असली तो कभी भी चल जाएगा। इसलिए असली जिंदगीभर जेब में ही रहता है। बाजार में नकली चलता है। इससे तो अच्छा था कि गलत नोट को आपको खत्म कर देना था। 10 के नोट का नुकसान आपको भारी नहीं पड़ता था। नकली नोट फाड़ देना वो भी देश की सेवा है। आपको नहीं लगता देश की सेवा मेरी भी जिम्मेदारी है। किसी ने भी बदमाशी से नोट चलाया लेकिन मैं उनके जैसा नहीं हूं। मैं समझ नहीं पाता हम इतने सालों में इतने खोखले क्यों हो गए हैं। एक प्रदूषण वातावरण का होता है और दूसरा सोच का। नकली नोट दूसरे को दे दूंगा ये सोच का प्रदूषण है।

नगरागमन पर आचार्यश्री की अगवानी करते समाजजन।

15 साल बाद आया हूं सेंधवा, सुधरा या नहीं कल चेक करूंगा- आचार्यश्री

संतश्री ने बताया कि वे 15 साल के बाद सेंधवा आए हैं। सेंधवा और यहां के लोग कितने सुधरे कल चेक करूंगा। हालांकि प्रवचन के बीच में कुछ देर बिजली गुल होने पर वे चुटकी लेते हुए कहा सुधार नहीं हुआ। संतश्री बोले जहां अंधेरा नहीं रहता वहां चोर आते नहीं और जहां का मालिक जागता रहता है, वहां चोरी होती ही नहीं है। उन्होंने कहा मौका मिले तो हम एक लाख का डोनेशन दे सकते हैं लेकिन मौका मिले तो चोर बन सकते हैं। नीचे गिरा हुआ नोट मालिक की बिना अनुमति उठा लेना वो चोरी है। दान करने वाला 10 रुपए के लिए चोर भी बन सकता है। आप बताओ पैथोलाॅजी लैब में आप गए तो आप ये नहीं चाहोगे कि रिपोर्ट अच्छी आना चाहिए ये चाहाेगे कि सच्ची आना चाहिए।

उदारता के लिए धन नहीं ह्रदय की होती है जरूरत




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