"हम यह तो जानते हैं कि औरतें किन-किन तकलीफों से गुजरती हैं, लेकिन कभी उनके मन की बात जानने की कोशिश नहीं करते'

News - निर्भया और दामिनी जैसे केस के बारे में दुनिया जानती है लेकिन मोलेस्टेशन के छोटे-बड़े केस आए दिन रोजमर्रा की ज़िंदगी...

Jan 16, 2020, 08:00 AM IST
Indore News - mp news quotwe know the hardships women go through but never try to find out what they wantquot
निर्भया और दामिनी जैसे केस के बारे में दुनिया जानती है लेकिन मोलेस्टेशन के छोटे-बड़े केस आए दिन रोजमर्रा की ज़िंदगी में देखने मिलते हैं। एक्रोपॉलिस ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूट में मुंबई के संगठन मैन अगेंस्ट वायलेंस एंड एब्यूज (मावा) की ओर से फिल्म फेस्ट शुरू हुआ जिसमें पहले दिन 5 फिल्में दिखाई गई जो जेन्डर बेस्ड वॉयलेंस और जेन्डर डिस्क्रिमिनेशन के ऊपर आधारित थी। इन फिल्मों की अलग-अलग कहानी थी जिस पर बच्चों ने डिस्कस किया और उदाहरण भी दिए। प्रो. अतुल भरत ने प्रोग्राम की शुरुआत कर मावा के फाउंडर हरीश सडानी, कालू राम, जेन्डर ट्रेनर हैदराबाद आशिया शेरवानी, संदीप नाइक और स्नेहा नागराले का स्वागत किया। पहली फिल्म वेब दिखाई गई जिसमें दिखाया कि एक प्रोटेस्ट में रघु नामक लड़का और नेना नामक लड़की शामिल है जो पुराने दोस्त हैं और प्रोटेस्ट के बाद बारिश होने की वजह से एक ही टैक्सी में जा रहे हैं। रघु उसे इम्प्रेस करने की कोशिश करता है लेकिन वो रिस्पाॅन्स नहीं करती जिस वजह से रघु का ईगो हर्ट हो जाता है और वो नैना को मोलेस्ट करता है। इस मूवी के बाद कुछ बच्चों ने कहा यह आए दिन की बात हो गई है। खरवास नामक मूवी में दिखाया एक औरत जो पेंटर है उसकी 9 महीने की बच्ची कोख में ही मर जाती है जिसके बाद वो ट्रामा में चली जाती है लेकिन उसका पति और उसका भाई बहुत सपोर्ट करते है। एक दिन उसका पति उसे गांव भेज देता है जहां गाय बछड़े को जन्म देने वाली होती है। बछड़े का जन्म उसके सामने ही होता है जिसे देख वो बहुत रोती है और कहती है मैंने अपने न सही गाय के बछड़े को तो जन्म होते हुए देखा। इस मूवी के बाद एक स्टूडेंट्स ने कहा कि हम यह तो जानते हैं कि औरतें किस-किस तकलीफ से गुजरती है लेकिन कभी उनके मन की बात जानने की कोशिश नहीं करते। ऐसे ही काय-काय मूवी में अलग-अलग सेक्स और उनकी पसंद के बारे में बताया। जिस पर एक स्टूडेंट्स ने इससे रिलेट करते हुए कहा कि हम सब एक जैसे ही हैं बस हमारी पसंद अलग है। रुचिभेदनम और तुरूप मूवी भी दिखाई गई, तुरूप में जेन्डर डिस्क्रिमिनेशन का बहुत अच्छा उदाहरण दिखाया कि कैसे लड़का और लड़की में ेद-भाव किया जाता है। मूवी में बच्चों ने सवाल पूछे और कहा कि जेन्डर डिस्क्रिमिनेशन और मोलेस्टेशन रुकना चाहिए।

filw fest

सिटी रिपोर्टर . इंदौर

हरीश सडानी

फिल्म स्क्रीनिंग के दौरान स्टूडेंट्स ने सवाल भी पूछे।

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