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रणवीर हुए बावले, ट्रम्प ने मारा मौके पर चौका**

एक वर्ष पहले
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केरिकेचर: गोविंद लाहोटी कुमार

महेंद्र सिंह धोनी

उपाधि:
हेलिकाॅप्टर बाबा


बड़े-बड़े बॉलर की

सूरत हो जाती थी रोनी

टीम में कब आओगे

आखिरी ओवर में मारने धोनी

नरेंद्र मोदी | उपाधि: असली चौकीदार

न खाऊंगा, न खाने दूंगा, दुनियाभर में जाऊंगा

कहीं गड़बड़ हुई, तो नेहरू की क्लास लगाऊंगा।

अमित शाह | उपाधि: मोटा भाई
**

कश्मीर के दुश्मनों

को मारा सोटा भाई,

महबूबा रोने लगी

बस कर मोटा भाई।

आंख दिखाते थे

कभी आज हो गए मौन,

अब्दुल्ला कहने लगे

मैं हूं छोटा भाई।

डोनाल्ड ट्रंप

उपाधि: मौके पर चौके वाला दोस्त

आया हूं तेरे दर पे,

ऐ मोदी मेरे यार

अमेरिका में बनवा दे,

फिर से मेरी सरकार।

रणवीर सिंह

उपाधि: खिलजी बावला

शादी के बाद का दुःख

किसी से न भी कहा जाए

पद्मावत् की लगी हाय,

बाजीराव से बने गली बॉय

अब क्या पहना है, क्यों पहना है

कोई समझ न पाए।

दीपिका

उपाधि: छपाक गर्ल

हो गई है

फिल्म फ्लॉप मेरी

अब न जाऊं जेएनयू,

इससे पहले थी

सब फिल्म टॉप मेरी,

अब न जाऊं जेएनयू।

निर्मला सीतारमण

उपाधि: अर्थशास्त्री दीदी

बैंकों की हालत खस्ता,

जीडीपी पहुंचा चार

अर्थशास्त्री दीदी ने

जब से पकड़ी पतवार।

विराट कोहली

उपाधि: रन मैन

न्यूजीलैंड के पिच पर

कोहली दिखा न पाए रंग

देख प्रदर्शन सबसे

ज्यादा हुई अनुष्का दंग।

योगी आदित्यनाथ

उपाधि: टाइगर अभी ज़िन्दा है
हमको मिटाने वाले चुनावों में मिट गए
जो बच गए थे एंटी रोमियो में पिट गए।


मुकेश अम्बानी

उपाधि: सबका अन्न डाटा

फ्री में देकर इंटरनेट

अब पैसे लिए जा रहे हैं

जियो-जियो बोलकर खुद

मौज किए जा रहे हैं।

चिदम्बरम

उपाधि: द ग्रेट लुंगी मैन

टू जी, थ्री जी घोटाले में

नाम आ गया आगे

सीबीआई भी चकराई

जब लुंगी में भागे।

अरविन्द केजरीवाल

उपाधि: धरने वाले बाबा

सीएम हूं दिल्ली का,

पीएम से ऐंठ जाऊंगा

ज्यादा बोलोगे तो

धरने पे बैठ जाऊंगा।

राहुल गांधी

उपाधि: आलू से सोना बनाने वाले वैज्ञानिक

ताक पर रख के

अपनी साख चला जाऊंगा

छोड़ संसद को

बैंकॉक चला जाऊंगा।

होली के दिन हंसी-ठिठोली न हो, ऐसा संभव नहीं है। ये देश-दुनिया के जाने-माने लोग हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि ये होली के दिन हमारे व्यंग्य रंग से बच जाएंगे। इसीलिए हमने इन सेलिब्रिटीज को कुछ उपाधियां दी हैं। हमारे मनगढ़ंत सूत्रों ने बताया कि इन्हें लंबे समय से इस उपाधि का इंतजार था। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तो कहा है कि मैं पिछले दिनों उपाधि लेने ही भारत आया था। रणवीर सिंह ने इस मौके पर कहा कि मेरी उपाधि मेरे फैशन डिजाइनर को समर्पित है-

हास्य उपाधियां**

आज मशहूर हास्य कवि डॉ. सुनील जोगी देश-दुनिया के बड़े सितारों को उपाधियां बांट रहे हैं**



भोपाल
मंगलवार, 10 मार्च 2020

हंसक्लेमर: इस पेज के सभी पात्र वास्तविक हैं, लेकिन उन्हें कल्पनाओं के रंगों में डुबोया गया है। आहत होने के वायरस से बचने के लिए पेज पढ़ते हुए लॉजिक से दूर रहें। ‘हंस’ बैंक के खाते से जितनी चाहे हंसी निकाल सकते हैं। **

डॉ. सुनील जोगी

कार्टून : लहरी

कार्टून : मंसूर

होलीटून**

देश के मौजूदा घटनाक्रमों और इनके किरदारों पर आज यूं चढ़ा होली का रंग... **

डॉ. कुमार विश्वास

हाथों में बड़ी-सी लौकी लटकाए और उससे भी ज्यादा मुँंह लटकाए हाजी पण्डित दरवाजे पर दस्तक देते उससे पहले ही मैं अम्मा-बाबूजी के पास गांव जाने के लिए दरवाजा खोल रहा था। हाजी पण्डित मेरे घर के मेन गेट पर इस बार होली न मनाने की सूचना का बैनर लगा देख आए थे। सो टकराते ही उन्होंने पूछा- ‘अमां महाकवि! यह कौन सी बात हुई भला? होली काहे नहीं मना रहे हो? मैं कुछ दिनों के लिए इधर-उधर क्या गया, अमां, तुम तो अजीब-अजीब फैसले लेने लगे!’ मैंने बिना किसी भंगिमा-विशेष के इस अपेक्षित प्रश्न का उत्तर हाजी के आगे सरकाया- ‘यार हाजी, मन नहीं है। देख तो रहे हो हालात। एक तरफ तो चीनी चांडालों के फैलाए इस कोरोना ने बांध रखा है, दूसरी तरफ़ सियासत के चंपकों ने दिल्ली के माहौल में ज़हर घोल रखा है! किस मन से होली खेलें?’ हाजी तपाक से बोले- ‘तुम अजीब अजीत पंवार छाप आदमी हो यार? यूं तो हर वक्त, हर बात पर नेताओें को गरियाए रहोगे और अब मस्ती के इस महापर्व में दूसरों की फैलाई कीचड़ के डर से रंग नहीं खेल रहे? अरे ऐसे समय में ही तो कवि-धर्म जागना चाहिए। लगाओ जोगीरे के छौंक और कह डालो जनता के दिल की वे सब बातें जो हर साल देश तुमसे सुनना चाहता है। अब नहीं कहोगे तो कब कहोगे? उधर तुम्हारे लाइलाज दोस्त का छुटभैय्या अमानती ताहिरबाज दंगों में बांटे मौत के सामान के साथ गिरफ़्तार हो रहा है। पुराना वाला अमानती छुटभैय्या कह रहा है कि वो मुसलमान है इसलिए गिरफ़्तार हुआ। ये बहुरूपिये तो अपने आका की शह पर हिन्दू-मुसलमान करके गंद करें, और हम त्यौहार मनाने से भागते रहें?’ मैंने कहा- ‘बात त्यौहार से भागने की नहीं है। बात इन बहुरूपियों की भी नहीं है। बात सिर्फ ये है कि हम साम्प्रदायिकता के कोहरे में इतना कैसे भटक जाते हैं कि यह तक याद न रहे कि इस तथाकथित हिन्दुओं के त्यौहार के सबसे झनकदार गीत वाजिद अली शाह, अमीर ख़ुसरो, रसखान और नज़ीर अकबराबादी जैसे शायरों ने लिखे हैं। हमें यह क्यों नहीं याद रहता कि शहीद-ए-आज़म भगत सिंह और उनकी टोली द्वारा पहना गया बसंती चोला तक चटख नहीं हो सकता जब तक अशफ़ाक़ उल्ला जैसे दीवाने उसे अपने तन से नहीं लगाते। यही सब देख कर मन उदास है हाजी। ऊपर से इस बीमारी ने और आतंक मचा रखा है!’ हाजी ने बात छोड़ी- ‘अजी छोड़ो बीमारी की। हाथ धो लेने भर से डरने वाली बीमारी हमें क्या डराएगी? तुम तो बेफालतू में होली छोड़ रहे हो। तुम्हारी होली से तो तमाम न्यूज़ चैनलों को होली के दिन का कंटेंट मिलता था। अब वो भी कितनी बार सूर्यवंशम दिखाएं बेचारे!’ मैंने कहा- ‘अरे हाजी, मीडिया का क्या है, वो तो तैमूर के डाइपर से ले कर ट्रम्प के शैम्पू तक कुछ न कुछ ढूंढ ही लेगा दिन बिताने को। उनका मन बनाने के लिए अपना मन और ज़्यादा ख़राब नहीं कर सकता। होली तो नहीं खेलूंगा। हां, होलिका जरूर जलाऊंगा- नकारात्मकता की, साम्प्रदायिकता की, नफरत की और हिंसात्मक मानसिकता की।

‘हर तरफ तकरारों का शोर

मोहल्ले नफरत के हर ओर

हवा में इतना ज़्यादा ज़हर

सांस की उलझी-उलझी डोर

गले मिल कर हम और आप

जलाएं होली में सब पाप

प्यार के रंगों में इस बार

चुनरिया रंग दे रे रंगरेज’

हाथ धो लेने भर से डरने वाली बीमारी हमें क्या डराएगी**

व्यंग्य**

मशहूर कवि डॉ. कुमार विश्वास का विशेष व्यंग्य सिर्फ भास्कर के लिए**
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