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अंग्रेज फौजी की डायरी पढ़ इंग्लैंड से सागर आए बेटा-पोता, गोरिल्ला युद्ध का रूट देखा

एक वर्ष पहले
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द्वितीय विश्वयुद्ध में शहीद हुए उनके दोस्तों की कब्रें खोजीं, जंगल में घूमे

अभिषेक यादव . सागर | कहानी कुछ फिल्मी सी है। लंदन में एक रिटायर्ड फौजी फ्रैंक बेर्कोविच की मृत्यु के बाद पोते डेनियल बर्क को उनकी डेली डायरी मिलती है। वह इस डायरी में दादा की जिंदगी के तजुर्बे पढ़ रोमांचित हो उठता है। पिता टोनी बर्क को मनाता है कि क्यों न हम दोनों दादाजी की स्मृति को महसूस करने भारत चलें। पिता भी बेटे की बात मान लेते हैं और दोनों भारत के उस बुंदेलखंड अंचल में आ पहंुचते हैं, जहां कभी उनके पूर्वज ने फौजी के रूप में चिंडित्त(म्यांमार का एक धार्मिक चिह्न, जिसका आकार शेर और ड्रैगन से मिलकर बना है) अभियान में हिस्सा लेकर जापान के खिलाफ गोरिल्ला युद्ध का अभ्यास किया था। डेनियल ने बताया कि दादाजी की मृत्यु के बाद मैंने एक दिन उनकी डायरी पढ़ी। इसमें उनकी सागर अार्मी बेस में पदस्थापना से लेकर वापस इंग्लैंड पहुंचने तक का ब्योरा था। इसमें चिंडित्त अभियान के बारे में पढ़कर मैं बहुत रोमांचित हुआ। सबसे पहले हम लोग बर्मा पहुंचे। जहां दादाजी ने अंग्रेज सेना की तरफ से जापानियों को युद्ध में हराया था। इसके बाद बबीना- सागर- दमोह रूट को देखने आ पहंुचे।


पिता के दोस्तों की कब्रों को तलाशते टोनी-डेनियल।
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