सामान्य क्रिकेट की तरह मान्यता मिलना बाकी
आम क्रिकेट से अलग होता है ब्लाइंड क्रिकेट
इन खिलाड़ियों की उपलब्धियों के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मप्र टीम के सीनियर ब्लाइंड क्रिकेट प्लेयर और एसोसिएशन के सचिव सुनील गोलकर के बारे में जिक्र भी किया। हाल ही में जब एमपीपीएससी की परीक्षाएं आयेाजित की गई तो उसमें भी मप्र की ब्लाइंड क्रिकेट टीम से जुड़ा एक सवाल पूछा गया। इन सभी उपलब्धियों को देखकर प्रदेश में महिला ब्लाइंड क्रिकेट टीम बनाने की बात भी उठने लगी। हालांकि अभी ब्लाइंड खिलाड़ियों के क्रिकेट को सामान्य क्रिकेट की तरह मान्यता नहीं मिली है। इस मामले में हम पड़ोसी देशों से भी पीछे हैं। आस्ट्रेलिया और इंग्लैंड में तो ब्लाइंड क्रिकेट खिलाड़ियों को मानदेय दिया जाता है, लेकिन अभी भारतीय ब्लाइंड क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों को यह सुविधा नहीं है।
ब्लाइंड खिलाड़ियों की क्रिकेट टीम तीन कैटेगरी की होती हैं। बी1 में सौ फीसदी ब्लाइंड खिलाड़ी होते हैं। बी2 में तीन मीटर की दूरी तक देखने वाले और बी3 में छह मीटर दूर तक देखने वाले खिलाड़ी शामिल होते हैं। यह क्रिकेट अलग प्रकार की गेंद से खेला जाता है। इस गेंद को वर्ष 1985 में मान्यता दी गई। इसके पहले गेंद में छेद करके कंकर डाले जाते थे।
महिला टीम तैयार कर रहे हैं
मप्र में अब तक ब्लाइंड खिलाड़ियों के क्रिकेट में केवल पुरुषों की भागीदारी ही थी। देश के कई राज्यों में महिला ब्लाइंड क्रिकेट टीम भी बन चुकी हैं। अब हम भी इस क्षेत्र में महिला टीम बनाने की तैयारी कर रहे हैं। अगले साल तक टीम तैयार हो जाएगी।
राघवेंद्र शर्मा, चेयरमैन, क्रिकेट एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड मध्यप्रदेश
{मप्र में जल्द गठित होगी... पेज 1 से जारी**