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छह विधायकों के इस्तीफे मंजूर

एक वर्ष पहले
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विश्वास मत हासिल करे सरकार

बजट सत्र से पहले विधानसभा अध्यक्ष ने सिंधिया समर्थक छह विधायकों के इस्तीफे मंजूर कर लिए हैं। मुख्यमंत्री की सिफारिश पर राज्यपाल इन्हें मंत्रिमंडल से पहले ही बाहर कर चुके हैं। दो विधायकों के निधन के कारण विधानसभा की संख्या 230 से 228 हो गई थी। छह विधायकों की सदस्यता समाप्त करने से प्रभावी संख्या 222 हो गई है। इससे पहले विस अध्यक्ष शनिवार को दोपहर 12 बजे विधानसभा पहुंचे और पौने चार बजे रवाना हो गए। तब उन्होंने कुछ विधायकों पर कड़ी कार्रवाई के संकेत देते हुए कहा था कि जो कागज मुझे मिले हैं, उनमें दो-तीन विधायकों के मुद्दे गंभीर हैं। करीब साढ़े छह बजे प्रजापति फिर विधानसभा पहुंचे और इस्तीफे मंजूर करने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन सदस्यों के आचरण के कारण ही उनके इस्तीफे स्वीकार किए गए हैं। इस्तीफे देने वाले बाकी विधायकों के साथ यह स्थिति नहीं है।

राज्यपाल के अभिभाषण के बाद 16 को फ्लोर टेस्ट, इसी दिन मतदान

उनका आचरण विधानसभा सदस्य रहने के लायक नहीं है : एनपी प्रजापति

उधर, सीएम को लिखी चिट्‌ठी में राज्यपाल ने कहा है कि 22 विधायकों के इस्तीफे, मीडिया कवरेज आदि से मुझे प्रथम दृष्टया विश्वास हो गया है कि आपने विश्वास मत खो दिया है। प्रजातांत्रतिक मूल्याें की रक्षा के लिए आवश्यक है कि आप 16 मार्च को मेरे अभिभाषण के तुरंत बाद सदन में विश्वास मत हासिल करें। -पेज 5 भी पढ़ें

कांग्रेस.. सत्र आहूत हो चुका है, विधानसभा अध्यक्ष के भी विशेष अधिकार होते हैं, नियम-प्रक्रिया से ही सारे काम होंगे

राज्यपाल... सत्र सोमवार सुबह 11 बजे शुरू होगा, मेरे अभिभाषण के बाद एकमात्र काम विश्वास प्रस्ताव पर बटन दबाकर मतदान होगा, कार्यवाही इसी दिन पूरी हो, यह निलंबित, स्थगित और विलंबित नहीं होगी

छह विधायकों की सदस्यता रद्द होने के बाद अंक गणित

कांग्रेस

Áकांग्रेस के साथ अगर 7 निर्दलीय आते हैं तो सरकार की संख्या होगी 92 + 7 = 99

Á भाजपा के दो विधायक कमलनाथ सरकार के शक्ति परीक्षण में कांग्रेस का साथ दे चुके हैं। अगर वे इस बार भी साथ दें तो कांग्रेस का आंकड़ा
99 + 2 = 101 हो जाएगा।

Á16 बागियों में से 5 या 6 वापस आएं तो भी सरकार 107 की संख्या तक पहुंच सकती है।

Áकांग्रेस की रणनीति यही रहेगी कि जितने लोग उनके साथ आते हैं उनकी सदस्यता बरकरार रखी जाए और जो साथ में नहीं आते हैं उनके इस्तीफे मंजूर कर लिए जाएं, जिससे वह मुकाबले में भाजपा से आगे निकल सकती है।

भाजपा

Áभाजपा के पक्ष में 7 निर्दलीय आ जाएं तो संख्या 107+ 07 = 114 बहुमत से दो ज्यादा।

Áकांग्रेस के सभी बागी अगर भाजपा के साथ चले जाएं तो संख्या 107+ 16 = 123 होगी।

Áफ्लोर टेस्ट कब हो इसको लेकर काफी अंतर्विरोध है। इसका या किसी अन्य मुद्दे पर सदन में गतिरोध होता है और भाजपा या कांग्रेस के सदस्य स्पीकर द्वारा निलंबित या अयोग्य घोषित किए गए तो उसका सदन की प्रभावी सदस्य संख्या, बहुमत के आंकड़े व दोनों के कुल विधायकों की संख्या पर असर पड़ेगा। इसलिए सदन में भाजपा को विशेष सावधानी रखनी होगी। ऐसी स्थिति में स्पीकर का फैसला ही मान्य होगा।

Áराज्यपाल ने सीएम को लिखी चिट्‌ठी, कहा-सरकार अल्पमत में

विधायकों के आने के बाद ही फ्लोर टेस्ट

इधर, संसदीय कार्य मंत्री गोविंद सिंह ने साफ कहा है कि विधायकों के आने के बाद ही फ्लोर टेस्ट हो सकता है। सरकार के पास पूर्ण बहुमत है। विपक्ष नियमों को गलत तरीके से परिभाषित कर रहा है। मंत्री पीसी शर्मा ने कहा, सत्र आहुत हो चुका है। अध्यक्ष के भी विशेष अधिकार होते हैं। कार्यवाही नियम-प्रक्रिया से ही होगी।

छह विधायकों को राज्यपाल ने मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया है। इस संबंध में मीडिया में आ रहे समाचारों से भी प्रश्नचिह्न पैदा हो रहा है। उनके बयानों से उनका आचरण अाश्चर्यजनक प्रतीत होता है। ये विधानसभा के सदस्य रहने के योग्य नहीं हैं। सदन के कार्य संचालन संबंधी नियम 276 के तहत 10 मार्च को दिए त्यागपत्र स्वीकार किए हैं। इस्तीफे मिलने पर मैंने 13 मार्च को दोपहर 3:30 से 5:30 बजे और 14 मार्च को दोपहर 12:15 से 2:45 बजे तक बात रखने का अवसर दिया, लेकिन वे नहीं आए।

सत्ता का संघर्ष... पहले मंत्री पद गया, अब सदन की सदस्यता गई

मप्र में चल रहे सत्ता संघर्ष के बीच शनिवार शाम विधानसभा अध्यक्ष एनपी प्रजापति ने चौंकाने वाला निर्णय लेते हुए सिंधिया समर्थक छह पूर्व मंत्रियों के इस्तीफे मंजूर कर लिए। पहले मंत्री पद गया और अब ये छह नेता विधायक भी नहीं रह गए हैं। इसके बाद मध्य रात्रि में राज्यपाल लालजी टंडन ने फ्लोर टेस्ट की तारीख तय कर दी। उन्होंने बजट सत्र के पहले दिन 16 मार्च को ही फ्लोर टेस्ट के निर्देश दिए हैं। हालांकि कांग्रेस अभी भी यही कह रही है कि सभी विधायकों के आने से पहले फ्लोर टेस्ट संभव नहीं है। **

द ग्रेट एमपी पॉलिटिकल ड्रामा

222 छह इस्तीफे मंजूर होने के बाद की स्थिति में संख्या
**

228 प्रभावी संख्या मौजूदा स्थिति में सदन की**

230 कुल सदस्य संख्या मध्यप्रदेश विधानसभा में**

16

कांग्रेस बागी

07

निर्दलीय व अन्य

92

कांग्रेस

107

भाजपा

बहुमत का आंकड़ा

112

शिवराज दिल्ली पहुंचे, आज सिंधिया के साथ जा सकते हैं बेंगलुरू

उधर, बेंगलुरू से आए चार्टर्ड प्लेन से शनिवार देर रात शिवराज दिल्ली रवाना हो गए। वे दिल्ली से गुरुग्राम जाएंगे और भाजपा विधायकों से बात करेंगे। रविवार को शिवराज के ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बेंगलुरू जाने की खबरें हैं। वे विधायकों से फ्लोर टेस्ट में एकजुट रहने का कहेंगे।

भोपाल | राज्यपाल द्वारा फ्लोर टेस्ट की तारीख तय किए जाने के बाद भाजपा रविवार रात या सोमवार सुबह ही विधायकों को लेकर भोपाल पहुंचेगी। सूत्रों के अनुसार, इनमें सिंधिया समर्थक 16 विधायक भी शामिल हैं। इसके पहले शनिवार दोपहर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव, मुख्य सचेतक नरोत्तम मिश्रा, पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह व रामपाल सिंह ने राजभवन पहुंचकर गवर्नर लालजी टंडन से मुलाकात की। उन्होंने बजट सत्र में सबसे पहले फ्लोर टेस्ट कराने की मांग की थी। गवर्नर को सौंपे ज्ञापन में आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की ओर से विधायकों को दबाव में लाने की या लालच देने की कोशिश की जा रही है। संविधान के अनुच्छेद 175(2) और अन्य प्रावधानों का भी जिक्र किया। विश्वास मत पर मतदान ध्वनिमत के बजाय डिवीजन एवं बटन दबाकर किया जाए। सदन की सारी कार्यवाही की वीडियोग्राफी कराने की मांग रखी।

भाजपा रविवार रात या सोमवार सुबह ही लेकर आएगी विधायकों को

प्रद्युम्न सिंह तोमर

ग्वालियर विधायक थे। दूसरी बार विधायक बने। उन्हें खाद्य, नागरिक आपूर्ति सौंपा गया था।

सुरखी विधायक थे। तीसरी बार विधायक बने। उन्हें राजस्व एवं परिवहन विभाग दिया गया था।

डबरा विधायक थीं। तीसरी बार जीती थीं। उन्हें महिला एवं बाल विकास विभाग दिया गया था।

सांची विधायक थे। तीसरी बार विधायक बने। स्कूल शिक्षा विभाग का मंत्री बनाया गया था।

बमोरी विधायक थे। दूसरी बार विधानसभा चुनाव जीते। उन्हें श्रम विभाग में मंत्री बनाया गया था।

सांवेर विधायक थे। चौथी बार विधायक बने थे। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री बनाए गए थे।

गोविंद सिंह राजपूत

इमरती देवी

डॉ. प्रभुराम चौधरी

महेंद्र सिंह सिसोदिया

तुलसीराम सिलावट
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