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मंच सज्जा में फूलों और फ्लेक्स की जगह अब राइस पेपर्स, पतंगों और भव्य कलात्मक प्रापर्टीज़ का किया जा रहा प्रयोग

News - इंदौर में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मंच सज्जा में रचनात्मक और बेहतर बदलाव आए हैं। अब फ्लावर, फ्लेक्स और...

Dec 04, 2019, 09:00 AM IST
इंदौर में होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मंच सज्जा में रचनात्मक और बेहतर बदलाव आए हैं। अब फ्लावर, फ्लेक्स और थर्मोकोल की जगह लकड़ी की फ्रैम्स, राइस पेपर्स, पतंगों, पेपर कोलाज, रेखांकनों और एलईडी की चकाचौंध पैदा करने वाली लाइट्स और सुंदर भव्य प्राॅपर्टीज़ का इस्तेमाल किया जा रहा है। इस तरह की मंच सज्जाअों में तीन हज़ार रूपए से लेकर 30 लाख रुपए की लागत की मंच सज्जा करवाई जा रही हैं।

अधिकांश सांस्कृतिक कार्यक्रमों की एंकरिंग करने वाले संस्कृतिकर्मी संजय पटेल कहते हैं कि अब मंज सज्जा को लेकर नई दृष्टि और कलात्मकता के साथ रचा जा रहा है। ये इतने सुंदर रंगों से बनाए जाते हैं कि एक बार बांसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया ने कहा कि मंच सज्जा किस रंग की है ताकि मैं उसके काॅनट्रास्ट के रंग का कुर्ता पहन सकूं और उन्होंने मंच सज्जा का रंग देखकर अपना कुर्ता बदला।यानी सुंदर मंज सज्जा देख कलाकार भी सचेत हो गए हैं कि उन्हेंे क्या और किस रंग का पहनना है। आयोजक अभिषेक गावड़े कहते हैं कि हम तो कार्यक्रम के इन्वीटेशन कार्ड की डिज़ाइन और रंगों से साम्य रखती मंच सज्जा को ही रूपायित करते हैं। और फिर कलाकारों से अाग्रह करते हैं कि मंच सज्जा के अनुरूप वेशभूषा पहनें। इससे कार्यक्रम श्रवणीय के साथ दर्शनीय भी बन जाता है। शास्त्रीय गायिका और और आयोजक शोभा चौधरी कहती हैं कि हमने हाल ही में अप्पाजी यानी टुमरी साम््राज्ञी गिरिजादेवी की याद मे कार्यक्रम किया और इसीलिए हमने मंज सज्जा में उनके चेहरे को केंद्र में रखा और फिर कार्यक्रम नाम, समय, स्थान और दिनांक को सही स्थान पर लिखा। इससे दर्शकों के एक नज़र में पूरे कार्यक्रम की जानकारी भी मिल जाती है।

मर्म कला अनुष्ठान के चित्रकार राजेश शर्मा कहते हैं कि हम मंच सज्जा में कार्यक्रम की आत्मा को सादगी और कल्पनाशईलता से साकार रूप देते हैं। मिसाल के लिए हमने किसी की स्मृति में किए जाने वाले कार्यक्रम में राइस पेेपर्स, पतंगों और यहां तक कि पत्तल-दोने और चटाई तक का प्रयोगशील और रचनात्मक इस्तेमाल किया। इसके ज्यादा खर्च भी नहीं आता और मंच सज्जा सादगीपूर्ण लेकिन कलात्मक दिखाई देती है। गायक विनीत शुक्ला कहते हैं कि जगजीतसिंह की स्मृति में किए गए कार्यक्रम में एलईडी लाइट्स, बोर्ड की सुंदर डिजाइंस और एलईडी स्क्रीन से एक एन्वयार्नमेंट क्रिएट किया जिसमें चटख रंगों का इस्तेमाल किया था। आयोजक देव जोशी ने अभिनेत्री ज़ीनत अमान से लेकर संगीतकार उत्तमसिंह के कार्यक्रमों के लिए भव्य मंच बनवाए। इसमें लेज़र लाइट्स, कलात्मक सैट और जिज़ाइनर चेयर्स का इस्तेमाल कर भव्यता दी थी। द आर्ट आॅफ लिविंग के एक कार्यक्रम में सुंदर मोर पंखों को इस तरह से संयोजित किया गया कि दर्शकों को नाचते मयूर को आभास हो।

जब जावेद अख़्तर ने कोलाज की तारीफ की

ख्यात गीतकार-संवाद लेखक जावेद अख़्तर की एक किताब पर किए कायक्रम की मंच सज्जा के लिए रंगकर्मी और कोलाजमेकर श्रीराम जोग ने उनकी नज़्मों को लेकर कोलाज बनाया था। मंच पर आकर जावेद अख्तर इस खूबसूरत कोलाज को देखकर ठिठके और पूछा था कि यह सुंदर कोलाज किसने बनाया। जाहिर है वे कोलाज की कलात्मकता और कल्पनाशीलता ने उनका ध्यान खींचा था।

सिटी रिपोर्टर . इंदौर

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