प्रदेश में समय रहते इनलेंड वेसल्स एक्ट 1917 के नियम

News - प्रदेश में समय रहते इनलेंड वेसल्स एक्ट 1917 के नियम बनाकर लागू कर दिए जाते तो शायद छोटी झील में डूबने से 11 जिंदगियां बच...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 06:57 AM IST
Bhopal News - mp news rules of the inland vessels act 1917 in time in the state
प्रदेश में समय रहते इनलेंड वेसल्स एक्ट 1917 के नियम बनाकर लागू कर दिए जाते तो शायद छोटी झील में डूबने से 11 जिंदगियां बच जातीं। अगर नियम लागू होते तो नाव, क्रूज अथवा अन्य किसी फ्लोटिंग बॉडी का रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होता। लिहाजा बगैर पंजीयन के जन उपयोग की नाव पानी में नहीं उतर पाती। साथ ही क्षमता से अधिक लोग नहीं बैठते।

डीबी स्टार
प्रदेश में हर साल कहीं न कहीं गणेश विसर्जन अथवा दुर्गा विसर्जन के दौरान नाव पलटने के हादसे होते हैं। इनमें कई जानें जाती हैं। घटना के बाद हर बार हाय-तौबा मचती है। मजिस्ट्रियल जांच के आदेश होते हैं। लेकिन इनलेंड वेसल्स एक्ट के नियम बनाने की ओर कोई ध्यान नहीं देता है। देश में पहले ही पानी में चलने वाले जहाज, बोट, क्रूज के लिए नियम बने हुए हैं। यदि इन नियमों को प्रदेश के हिसाब से अपडेट कर लागू कर दिया जाए तो कोई भी पब्लिक यूज की फ्लोटिंग बॉडी बिना रजिस्ट्रेशन के पानी में नहीं उतारी जा सकेगी। नाव या क्रूज की कितने व्यक्ति बैठाने की क्षमता है, इस बात का नाव पर स्पष्ट उल्लेख करना होता है। इसे देखने के बाद नाव में उतने ही आदमी बैठते हैं, जितनी क्षमता होती है। देश में उपरोक्त एक्ट के नियम बनाकर लागू करने वाले तीन राज्य हैं। केरल, कर्नाटक और राजस्थान राज्य ने नियम बनाकर इन्हें अपने राज्य में लागू किया है।

यात्री और माल ढोने के लिए अलग-अलग जहाज व नाव का इस्तेमाल किया जाता है। उसी हिसाब से इनके रजिस्ट्रेशन किए जाते हैं। यही नहीं प्रत्येक जल वाहन के तय मापदंड हैं। अर्थात नाव बनाने में लोहे, एल्युमीनियम और लकड़ी का कितना इस्तेमाल किया गया है। यात्री अथवा माल ढोने की क्षमता कितनी है, ऐसे मानक निर्धारित हैं। प्रदेश में कोई नियम न होने से मनमाने तरीके से नाव बनाकर पानी में उतार दी जाती है। इनकी निगरानी का भी कोई सिस्टम नहीं है।

नियम बन गए होते तो बच जाती 11 जिंदगियां

नियम यहां लागू होना जरूरी

रोड पर बाइक चलाने के लिए रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस जरूरी है, उसी प्रकार पानी में नाव चलाने के लिए नियम और पंजीयन होना चाहिए। राज्य सरकार को पहले भी सुझाव दे चुका हूं और आगे भी इस बारे में बताऊंगा। देश के सभी राज्यों से ज्यादा डैम मप्र में है, इसलिए यह नियम यहां लागू होना जरूरी। - कमांडर राजेंद्र निगम, पूर्व सलाहकर मप्र पर्यटन निगम

कमांडर निगम ने बनाया था प्रस्ताव

नेवी से रिटायर्ड और पानी के जहाज से दुनिया की सैर करने वाले कमांडर राजेंद्र निगम ने इनलेंड वेसल्स एक्ट 1917 के नियम बनाकर लागू करने का प्रस्ताव मप्र सरकार को भेजा था। कमांडर निगम मप्र पर्यटन निगम में वर्ष 2002 से 2017 तक सलाहकार रहे हैं। वाटर स्पोर्ट्स के मामले में राष्ट्रीय मानचित्र पर मप्र को उभारने का श्रेय कमांडर निगम को जाता है। वर्ष 2006 में उन्होंने बताया था कि देश के सभी राज्यों में से सर्वाधिक वाटर बॉडी मप्र में है। इसलिए इसे लागू करना जरूरी है। लेकिन इस प्रस्ताव पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया। इसके बाद कमांडर निगम की पहल पर ही मप्र पर्यटन विकास निगम में एक गाइडलाइन बनाई गई और उसके अनुसार अब पर्यटन निगम के सभी 6 क्रूज, 250 बोट और पैरासेलिंग बोट संचालित किए जा रहे हैं। इसके अलावा खेल विभाग ने भी नैवी से रिटायर्ड अफसरों को वाटर स्पोर्ट्स का जिम्मा सौंपा है। केवल नगर निगम, पंचायतें आदि ही बिना विशेषज्ञ के अपने क्षेत्र की वाटर बॉडी में गतिविधियां चलाती हैं। इसके अलावा कुछ निजी एजेंसियों ने भी बड़े डेम पर नाव चलाना शुरू कर दी हैं, लेकिन इनके लिए भी कोई मापदंड तय नहीं हैं।

भोपाल के हाल

राजधानी में कुल 6 डैम और छह नदियां हैं। इनमें अनधिकृत तरीके से नाव का संचालन किया जाता है। बोट क्लब पर 40 पैडल बोट, 12 पॉवर बोट, एक क्रूज और एक पैरासेलिंग बोट चलाई जा रही है। इसके अलावा करीब 100 बोट अनधिकृत तरीके और बिना गाइडलाइन के नगर निगम द्वारा संचालित की जाती हैं। इनमें कितनी सवारी बैठना चाहिए, कितने वजन की हो, चलाने वाला कितना जानकार है यह कुछ भी तय नहीं है।

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