शिक्षिका की नौकरी छोड़ संस्कृत नाटक निर्देशिका बनी

Ujjain News - शहर के रंगमंच में अब तक कई पुरुषों कई पुरुषों ने देशभर में उज्जैन के कला जगत का नाम बढ़ाया है लेकिन उनके बीच एक ऐसी...

Mar 27, 2020, 08:52 AM IST
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शहर के रंगमंच में अब तक कई पुरुषों कई पुरुषों ने देशभर में उज्जैन के कला जगत का नाम बढ़ाया है लेकिन उनके बीच एक ऐसी महिला रंगकर्मी भी हैं, जिन्होंने पुरुष बाहुल्य रंगमंच क्षेत्र में रहते हुए अपनी अलग पहचान बनाई और शहर की पहली संस्कृत नाटक निर्देशिका बनी।

आजाद नगर में रहने वाली 48 वर्षीय मनीषा व्यास स्कूल और कॉलेज के दिनों में रंगमंच से जुड़ी हुई थी| देवास में मां सरोज पंड्या और पिता पिता विजय कुमार ने उन्हें थिएटर के लिए हमेशा प्रोत्साहित किया। वर्ष 1991 में मनीषा का विवाह उज्जैन के इंजीनियर अजय व्यास से हो गया। शादी के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियां निभाने के लिए उन्हें कुछ समय रंगमंच से दूर होना पड़ा। इस बीच उन्होंने बी. म्यूज. की डिग्री ली और शिक्षिका बन गई। स्वयं का स्कूल चलाया और सीबीएसई स्कूल में भी 15 साल तक टीचिंग की लेकिन रंगमंच के प्रति उनका झुकाव बना रहा।

10 साल पहले नाटक शिव भक्त मारकंडेय का निर्देशन किया, पहली प्रस्तुति भी उज्जैन में ही हुई

मनीषा ने बताया उनके ससुर सेवानिवृत्त प्राचार्य हरिनारायण व्यास व्यास एवं परिजन कैलाश नारायण व मंजुला व्यास ने फिर से रंगमंच से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। शिक्षिका की नौकरी छोड़ 11 साल पहले वह फिर से रंगमंच में आई तो उन्होंने अभिनय के साथ स्क्रिप्ट राइटिंग और निर्देशन को भी शामिल किया। 10 साल पहले उन्होंने संस्कृत नाटक शिव भक्त मारकंडेय मारकंडेय का नृत्य निर्देशन किया। उज्जैन में ही इसकी पहली प्रस्तुति हुई। शहर में संस्कृत नाटक का निर्देशन करने वाली वे पहली महिला निर्देशिका बनी। 11 वर्षों में उन्होंने 40 नाटकों का निर्देशन किया। उन्होंने बताया 2015 में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में एक नाटक के लिए अपना प्रोजेक्ट भेजा था। वे मध्यप्रदेश से एकमात्र महिला निर्देशक थी जो नाटक का निर्देशन करना चाहती थी। एनएसडी ने इसी आधार पर भारत सरकार की ओर से उन्हें अहिल्याबाई नाटक के निर्देशन का प्रोजेक्ट दिया। 2019 में मनीषा द्वारा निर्देशित इस नाटक का मंचन हुआ, जिसमें उन्होंने खुद अभिनय करते हुए अहिल्याबाई का किरदार निभाया। वे संस्था रंग उत्सव के माध्यम से नि:शुल्क रंगमंच प्रशिक्षण देती हैं।

स्वयं के निर्देशित नाटक में अहिल्याबाई का किरदार निभाती मनीषा व्यास।

धारावाहिक में काम करते बनाई साईं की महिमा, अब इसी नाम से ही मशहूर

रंगमंच के क्षेत्र में उज्जैन के मंछामन कॉलोनी में रहने वाले कुमार शिवम (45) को साईं के नाम से पहचाना जाता है। 30 वर्षों से वे रंगमंच से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया छोटी उम्र में ही पिता के निधन के बाद भाई और मां ने उनका पालन-पोषण किया। देशभर में 100 से ज्यादा नाट्य मंचन करने वाले कुमार ने धारावाहिक निर्माता-निर्देशक रामानंद सागर के साथ भी सहायक के रूप में वर्षों काम किया। दूरदर्शन पर प्रसारित धारावाहिक अलिफ लैला के अलावा अन्य चैनलों पर प्रसारित 30 से ज्यादा धारावाहिक में भूमिकाएं निभाई। स्टार प्लस पर रामानंद सागर प्रोडक्शन हाउस के धारावाहिक साईं बाबा में उन्होंने एक किरदार निभाया। उन्हें साईं के प्रति ऐसा लगाव हुआ कि साईं की महिमा नामक दो घंटे का ड्रामा खुद ही तैयार करा। इसमें मुख्य किरदार निभाया, लेखन व निर्देशन भी किया। 2013 से अब तक देशभर में इसके 30 से ज्यादा नाट्य मंचन हो चुके हैं। इसके कारण कुमार को थिएटर जगत में साईं के नाम से ख्याति मिली।

साईं बाबा के के किरदार में रंगकर्मी कुमार शिवम्।

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