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बगैर वेतन के होली मनाने को मजबूर स्कूली शिक्षक**

एक वर्ष पहले
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मप्र में लगभग 50 हजार नियमित शिक्षक सरकारी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। इनमें प्राचार्य, व्याख्याता, यूडीटी सहित प्राइमरी-माध्यमिक स्कूलों शिक्षक शामिल हैं। इन सभी की सैलेरी ग्लोबल बजट के अंतर्गत जारी की जाती है। हर महीने की तीन तारीख तक उनके अकाउंट में वेतन आ जाता था। लेकिन इस बार सैलेरी का कोई अता-पता नहीं है, जबकि 10 मार्च यानी मंगलवार को होली है और सरकार त्यौहारों को ध्यान में रखकर वेतन कुछ दिन पहले जारी कर देती थी। इसमें अध्यापक संवर्ग के लोग शामिल नहीं है, इसलिए उनका वेतन पहले सप्ताह में ही आ गया था।

डीबी स्टार ने इसकी वजह जानने के लिए लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) के वित्त अधिकारियों से बात की गई। उनसे जवाब मिला कि शिक्षकों को वेतन मिलने में अभी एक सप्ताह का समय और लग सकता है। शासन से इस विषय मंे चर्चा हो गई है और वेतन जारी हो जाएगा। लेकिन असल वजह यह है कि वित्त विभाग की तरफ से वेतन जारी ही नहीं किया गया है। बताया जाता है कि खाली खजाने का असर अब वेतन पर भी पड़ने लगा है। जिन शिक्षकों को वेतन नहीं मिला है वे खुलकर तो कुछ नहीं बोल रहे हैं। लेकिन दबी जुबान में इसका विरोध कर रहे हैं।

एक सप्ताह में वेतन मिल जाएगा

प्रदेश में कुछ जगह यह समस्या हुई है। नियमित शिक्षकों की सैलेरी ग्लोबल बजट के अंतर्गत जारी की जाती थी, इस बार थोड़ी देर हो गई। हमारी शासन से चर्चा हुई है और बताया गया है कि एक सप्ताह में वेतन सभी के खाते में
पहुंच जाएगा।
संजय कुमार, संयुक्त संचालक, वित्त, लोक शिक्षण संचालनालय

बिना सूचना के रोक दिया वेतन

हमें विभाग की तरफ से कोई सूचना नहीं दी गई और हमारा वेतन रोक दिया है। बताया जा रहा है कि एक सप्ताह और लग सकता है। इस वजह से हम लोन की किस्तें समय पर नहीं चुका पाए और अब बाउंसिंग चार्ज भुगतना होगा। होली भी फीकी रहेगी, क्योंकि खान-पान की सामग्री, रंग, पिचकारी आदि भी खरीदने होते हैं।
अरुणिमा, पूजा, शेखर सिंह, शंकर लाल, रवींद्र कुमार,
प्रभावित शिक्षक

सरकारी स्कूलों में पढ़ाने वाले नियमित शिक्षकों की होली इस बार सूखी रहने वाली है, क्योंकि इनकी सैलेरी इस बार बजट की कमी के कारण रोक दी गई है**

सांकेतिक चित्र
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