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कांग्रेस दफ्तर से सिंधिया और टंडन आउट

एक वर्ष पहले
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कांग्रेस कार्यालय में टंडन के कमरे में शील्ड, ट्रॉफी, फोटो सम्मान पत्र रखे थे, उन्हें हटा दिया।

इसे ही सियासत कहते हैं। जिसे कल तक सिर माथे बैठाया हो, उसे आज दिल से रुखसत करने में देर नहीं लगती। ऐसा ही हुआ बुधवार को कांग्रेस के दफ्तर गांधी भवन में। जिस ज्योतिरादित्य सिंधिया का दामन थामकर प्रमोद टंडन शहर कांग्रेस के अध्यक्ष बने और गांधी भवन से अपनी सियासत चलाई, उन सिंधिया की तस्वीर और टंडन की नेमप्लेट को वहां से हटा दिया गया। सिंधिया के भाजपा में जाने के बाद उनके समर्थकों का भी कांग्रेस छोड़ने का सिलसिला शुरू हो गया। इसी के बाद पार्टी मुख्यालय की हवा भी बदल गई। टंडन को जो कमरा मिला था, वहां का सामान भी खाली करवा दिया।

टंडन समर्थक ले जाने लगे कम्प्यूटर, कांग्रेस नेता बोले- पार्टी का है यह, निजी संपत्ति नहीं

दोपहर में टंडन समर्थक गांधी भवन से शील्ड के साथ कक्ष के बाहर लगा कम्प्यूटर भी ले जाने की तैयारी करने लगे। इस पर कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह तो पार्टी का है। करीब 12 साल पहले एक कांग्रेस नेता ने यह पार्टी को दिया था। यह टंडन की निजी संपत्ति नहीं है। इसे लेकर कुछ देर बहस हुई। आखिरकार कार्यकर्ता कम्प्यूटर वहीं छोड़कर चले गए।

इस्तीफे पीसीसी ने मंजूर किए : बाकलीवाल

कांग्रेस से त्यागपत्र देने के बाद टंडन ने कहा- आगे जो सिंधिया कहेंगे, वह करेंगे। भाजपा जाॅइन करेंगे या नहीं? भास्कर के इस सवाल पर टंडन ने जवाब दिया वे सिंधिया के साथ हैं। मोहन सेंगर ने भी कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। युवक कांग्रेस के पूर्व प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष पवन जायसवाल ने कहा कि वे सिंधिया की तरह जल्द ही भाजपा में शामिल होंगे। इधर, शहर कांग्रेस के कार्यवाहक अध्यक्ष विनय बाकलीवाल ने कहा कि जितने भी नेता और कार्यकर्ताओं ने इस्तीफे की पेशकश की, प्रदेश कमेटी ने उन सभी को मंजूर कर लिया है।

एमपीसीए पर होगा असर, नया गठजोड़ दिखेगा

इस घटनाक्रम का असर एमपीसीए पर भी पड़ेगा। अब तक सिंधिया और भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय आमने-सामने चुनाव लड़ते और समर्थकों को लड़वाते रहे हैं। अब सिंधिया के भी भाजपा में आने से संभव है कि यहां भी नया गठजोड़ बनता दिखे। विजयवर्गीय तीन बार एमपीसीए का सदस्य बनने के लिए आवेदन लगा चुके हैं, पर इसे मंजूरी नहीं मिली। हालांकि अब लोढ़ा कमेटी की सिफारिशों के बाद राजनीतिक लोग संगठन में नहीं आ सकते, लेकिन यह हो सकता है दोनों के एक ही पार्टी में होने से यहां कुछ नए चेहरों की एंट्री हो। सिंधिया समर्थक बीसीसीआई प्रतिनिधि राजू सिंह चौहान भी कांग्रेस से इस्तीफा दे चुके हैं।

नाराजगी : कार्यकर्ता बोले-सिंधिया लोकतंत्र के हत्यारे

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गांधी भवन के बाहर नारेबाजी की। एक पोस्टर बनाया, जिसमें सिंधिया को गद्दार बताते हुए कहा कि शर्म करो महाराज। कांग्रेस नेता अनूप शुक्ला, अमित चौरसिया, अभिजीत पांडे, लक्की वर्मा और अन्य ने सिंधिया का पुतला जलाया। इस मौके पर भंवर शर्मा, संजय बाकलीवाल, रोहित जोशी भी मौजूद थे।

समर्थकों का फेवर... टंडन सहित सभी बोले- हम महाराज के साथ हैं, वो जैसा कहेंगे वैसा करेंगे हम

पार्टी के तेवर... नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सिंधिया को बताया गद्दार, पोस्टर जलाया

सियासत की
बदलती तस्वीर


सिंधिया के फोटो और टंडन की नेमप्लेट हटाई

मंत्री के परिजनों के भी बेंगलुरू में होने की चर्चा


मंत्री का घर मौन

... इधर सिलावट के घर पर सन्नाटा


जाते समय कहकर गए थे सिलावट- अब कुछ दिन नहीं हो पाएगा संपर्क

इंदौर | सांवेर विधायक और स्वास्थ्य मंत्री तुलसी सिलावट उन 22 विधायकों में शामिल हैं, जो सिंधिया के समर्थन में बेंगलुरू के रिजाॅर्ट में डेरा डाले हुए हैं। इंदौर में जानकी नगर स्थित उनके घर पर सन्नाटा पसरा है। गेट बंद हैं और एक गार्ड तैनात है। उसने बताया कि सब शहर से बाहर हैं। करीबी लोगों ने बताया कि सिलावट का परिवार भी बेंगलुरू में ही है। दो-तीन दिन से उनके समर्थकों व रिश्तेदारों का संपर्क नहीं हुआ है। एक बेहद करीबी समर्थक ने बताया कि सिलावट ने जाते समय कहा था कि कुछ दिन संपर्क नहीं हो पाएगा। बाद में परिवार के एक सदस्य की तरफ से मैसेज आया कि सिलावट सिंधिया का साथ नहीं छोड़ेंगे। हालांकि करीब तीन दशक पहले जब ज्योतिरादित्य के पिता माधवराव सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ अलग पार्टी बनाई थी, तब सिलावट ने पार्टी ने नहीं छोड़ी थी।

सोनकर बोले- पार्टी का निर्णय मंजूर : जो राजनीतिक हालात बन रहे हैं, उनमें सिलावट भाजपा में शामिल होते हैं तो उन्हें विधायकी छोड़ छह महीने में पुन: चुनाव लड़ना होगा। जिस सांवेर सीट से वे 2018 में चुनाव जीते थे, वहां भाजपा ने डॉ. राजेश सोनकर को उतारा था। अब सवाल यह है कि सिलावट भाजपा से लड़ते हैं तो सोनकर का क्या कदम होगा। इस सवाल पर सोनकर ने जवाब दिया कि पार्टी का हर निर्णय मंजूर है।

आज कार्यकर्ताओं से चर्चा करेंगे पटेल : पूर्व विधायक सत्यनारायण पटेल ने भी इस्तीफा दे दिया है। उनके पिता रामेश्वर पटेल ने भी 1990 के दशक में पार्टी छोड़ी थी। तब पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह ने कांग्रेस छोड़ नई पार्टी बना ली थी। बाद में सिंह कांग्रेस में लौटे तो पटेल भी वापस आ गए थे। हालांकि पटेल ने कहा राजनीति में आगे का सफर कैसे तय करना है, इसके लिए वे गुरुवार को जनता, कार्यकर्ताओं की बैठक कर निर्णय लेंगे।
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