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श्रमदान : आश्रम में तैयार किया फूलों का बगीचा, वेस्टेज पानी से करते हैं सिंचाई

एक वर्ष पहले
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बगिया में मिलता है सुकून

नगर के पलसूद रोड स्थित कस्तूरबा कन्या वनवासी आश्रम परिसर में शिक्षिकाओं व छात्राओं ने श्रमदान कर फूलों का बगीचा तैयार किया है। इस बगीचे की सिंचाई आश्रम के वेस्टेज पानी से की जाती है। साथ ही छात्राएं व शिक्षिकाएं बगीचे की देखरेख करती हैं।

बगीचे में लगे खुशबूदार फूलों की खुशबू से आश्रम परिसर महकता है। आश्रम में पहली से 12वीं तक 1300 छात्राएं अध्ययनरत हैं। इन बालिकाओं की दिनचर्या में उपयोग होने वाले पानी, नहाने, कपड़े धोने व बर्तन सफाई आदि के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले वेस्टेज पानी से ही बगीचे की सिंचाई की जाती है। इससे बगीचे की सिंचाई के लिए अलग से पानी का इंतजाम नहीं करना पड़ता है। शिक्षिकाओं ने बताया कि अभी तक ये वेस्टेज पानी नालियों में बहता था लेकिन अब इसे आश्रम की संचालिका व उप प्रतिनिधि के मार्गदर्शन में बगीचे की सिंचाई में उपयोग किया जा रहा है। एक साल में बगीचा तैयार कर लिया गया है।

आश्रम परिसर में लगे फूलों के बगीचे में श्रमदान करतीं शिक्षिकाएं।

कांतादेवी की प्रतिमा के आसपास बनाया है बगीचा

आश्रम संचालिका पुष्पा सिन्हा ने बताया कि यहां संगमरमर से बनी कांतादेवी की मूर्ति स्थापित है। यहां आसपास खुली जगह थी। यहां पर बड़े पेड़ पौधों के साथ खुशबूदार फूलों को लगाने का मन स्टाफ और बालिकाओं ने बनाया। ताकि आश्रम सालभर हराभरा बना रहे। इसके बाद सभी ने श्रमदान कर यहां खुशबूदार फूलों का बगीचा तैयार किया है। साथ ही छायादार पौधे भी लगाए हैं।

बगीचे में लगे खुशबूदार फूलों की खुशबू से आश्रम परिसर महकता है। आश्रम में पहली से 12वीं तक 1300 छात्राएं अध्ययनरत हैं। इन बालिकाओं की दिनचर्या में उपयोग होने वाले पानी, नहाने, कपड़े धोने व बर्तन सफाई आदि के रूप में इस्तेमाल किए जाने वाले वेस्टेज पानी से ही बगीचे की सिंचाई की जाती है। इससे बगीचे की सिंचाई के लिए अलग से पानी का इंतजाम नहीं करना पड़ता है। शिक्षिकाओं ने बताया कि अभी तक ये वेस्टेज पानी नालियों में बहता था लेकिन अब इसे आश्रम की संचालिका व उप प्रतिनिधि के मार्गदर्शन में बगीचे की सिंचाई में उपयोग किया जा रहा है। एक साल में बगीचा तैयार कर लिया गया है।

बालिकाओं के पढ़ने के दौरान पालक भी बड़ी संख्या में हर रविवार को यहां उनसे मिलने पहुंचते हैं। आश्रम में इन्हें बैठने और घूमने के लिए यह बगिया बेहतर साबित होती है। किसी भी क्षेत्र से आने वाले आला अफसर भी आश्रम में आकर बगीचा जरूर घूमते हैं। बगीचे में हरियाली व फूलों की खुशबू के बीच सभी को सुकून मिलता है। यहां रात में रातरानी के फूलों की महक से आश्रम महक उठता है।
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