अपने गायन से पहले खुद को खुशी देता है गायक
सिटी रिपोर्टर. इंदौर
राशिद खां साहब का गायन अच्छा लगता है
चूंकि मैं कर्नाटक संगीत का गायक हूं लिहाजा मुझे राग कल्याणी बहुत पसंद है। यह राग हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के राग यमन के समतुल्य है। इसके अलावा राग रेवती और लवंगी भी मुझे पसंद हैं। इन्हें प्रस्तुत करते हुए मैं ऐसी ही खुशी पाता हूं जिसे बताना मुश्किल है। लेकिन मैं हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत भी बहुत सुनता हूं। खासतौर पर मुझे उस्ताद राशिद खां साहब का गायन बहुत पसंद करता हूं। उनका सुर लगाने का तरीका, बढ़त और भावों को गहराई से अभिव्यक्त करने की उनकी कलागत खूबी प्रभावी है। मुझे उनको सुनकर हमेशा खुशी मिलती है।
गायन में बड़ी भूमिका अदा करता है मूड
मैं भी यह मानता हूं कि किसी भी कलाकार के गायन में मूड बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसका उनसके गायन पर असर पड़ता है। यह सामान्य सी बात है कि किसी कलाकार का गायन के समय मूड अच्छा होगा तो उसकी प्रस्तुति भी अच्छी होगी। इसके अलावा ध्वनि व्यवस्था, स्टेज और श्रोताअों की मौजूदगी भी उसकी प्रस्तुति पर असर डालती है। लेकिन इस सब के बावजूद यह संगीत में ही ताकत ही है कि वह कलाकार को एक ऐसी खुशी देता है, जिसकी व्याख्या नहीं की जा सकती है। सबसे पहले गायन ही कलाकार को यह खुशी देता है और फिर उसकी आंतरिक दुनिया पूरी तरह बदल जाती है। अपने ही गायन से खुशी पा लेने के बाद वह श्रोताअों का अपने गायन से खुशी दे सकता है। गायम में ऐसा क्षण आता है जब एक कलाकार एनलाइटनमेंट महसूस करता है।
सिटी रिपोर्टर. कर्नाटक शास्त्रीय संगीत के गायक त्रिवेंद्रम के लम श्रीकुमार उस्ताद अमीर खां स्मृति संगीत समारोह में शिरकत करने इंदौर आ रहे हैं। वे रवीन्द्र नाट्यगृह में 16 मार्च को शाम 7 बजे शास्त्रीय गायन करेंगे। उन्होंने संगीत की शिक्षा गुरु बी. शशिकुमार से ली है।
5 वर्ष की उम्र में संगीत सीखने वाले इन गायक को केरल संगीत
नाटक अकादमी, संगीत र| और एम.एस. सुब्बलक्ष्मी पुरस्कार मिल
चुके हैं और मलयाली फिल्में कई
गीत गाए हैं। वे गायन करने इंदौर
पहली बार आ रहे हैं। उन्होंने सिटी भास्कर से सांगीतिक अनुभव साझा किए। उन्होंने जो कहा, पढ़िए उन्हीं
की जुबानी :