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बैरसिया रोड पर खामखेड़ा में शिफ्ट होगा स्लाॅटर हाउस
राजधानी के सबसे बड़े पैन एरिया स्लाॅटर हाउस की शिफ्टिंग के लिए इस बार मास्टर प्लान में बैरसिया रोड के अंतिम गांव खामखेड़ा में जमीन चिह्नित की गई है। खामखेड़ा में जो जमीन चिह्नित की गई है उसके आसपास न तो आबादी एरिया है और न कोई प्रमुख नदी या जलाशय है। इसके साथ ही यहां विंड पैटर्न भी एेसा है कि उस तरफ की हवा भोपाल जिले की ओर नहीं आती।
मास्टर प्लान-2005 में स्लॉटर हाउस के लिए आदमपुर छावनी में जमीन चिह्नित की गई थी। नगर निगम ने यहां शिफ्टिंग की योजना बनाई तो तीखा विरोध हो गया था। नगर निगम द्वारा वर्क ऑर्डर जारी करने के बाद भी स्थानीय रहवासियों ने कांट्रेक्टर के कर्मचारियों को ग्रामीणों ने भगा दिया था। यहां स्लॉटर हाउस के विरोध की एक बड़ी वजह कंकाली मंदिर को लेकर लोगों की आस्था भी जुड़ी होना है। यह मंदिर आदमपुर छावनी के समीप है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और नगरीय आवास एवं विकास मंत्री जयवर्धन सिंह ने भी लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए स्थान बदलने को कहा था। इसके बाद नरसिंहगढ़ रोड पर झिरनिया में स्लाटर हाउस की जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया चल रही थी, लेकिन जन प्रतिनिधि और रहवासी इसका भी विरोध कर रहे थे।
एनजीटी में चल रहा है प्रकरण
स्लॉटर हाउस की शिफ्टिंग को लेकर एनजीटी में प्रकरण चल रहा है और एनजीटी हर स्टेप पर नजर रखे हुए है। ऐसे में स्लॉटर हाउस के लिए मास्टर प्लान में चिह्नित होने वाले स्थान को लेकर कई तरह की चर्चाएं थीं।
शहर का बड़ा पैन एरिया
अाखिर भोपाल जिले के आखिरी गांव में तलाश पूरी
भोपाल मास्टर प्लान-2031
अभी तक झिरनिया की तैयारी... लेकिन ग्रामीण कर रहे थे विरोध
2016 में आदमपुर छावनी में जमीन चिह्नित की गई थी।**
2014 से चल रहा है जिंसी से स्लाटर हाउस का शिफ्टिंग मामला**
तब आबादी कम थी..... टीएंडसीपी अफसरों के अनुसार 1995 में तैयार किए गए प्लान के समय आदमपुर छावनी के आसपास आबादी बहुत कम थी और शहर भी दक्षिण दिशा में बढ़ रहा था। इसलिए आदमपुर छावनी में स्लॉटर हाउस जैसी ऑक्सीलरी इंडस्ट्रीज प्रस्तावित की गईं थीं। लेकिन 2020 आते-आते स्थितियां बदल गईं हैं। आदमपुर छावनी के आसपास आबादी बढ़ गई है। इसके साथ ही यहां हथाईखेड़ा और घोड़ा पछाड़ जैसे दो महत्वपूर्ण डैम हैं। ऑक्सीलरी इंडस्ट्रीज के कारण इनका पानी प्रदूषित होने की आशंका है। इस वजह से नए प्लान में जिले के सबसे अंतिम गांव में स्लॉटर हाउस और अन्य ऑक्सीलरी इंडस्ट्रीज प्रस्तावित की गईं हैं।
जिंसी स्थित स्लॉटर हाउस की शिफ्टिंग का मामला 2014 से चल रहा है। मई 2016 में आदमपुर छावनी में जमीन चिह्नित होने पर स्थानीय विधायक और ग्रामीणों ने विरोध कर दिया। इसके बाद मुगालिया कोट में स्लॉटर हाउस बनाने का प्रस्ताव आया लेकिन उसका भी विरोध हो गया। स्टड फार्म की जमीन पर शहर के भीतर स्लॉटर हाउस बनाने के सरकार के प्रस्ताव पर विरोध और तेज हो गया। फिर से आदमपुर छावनी का चयन हुआ, लेकिन ग्रामीणों ने वहां निर्माण नहीं होने दिया। प्रशासन में इन दिनों झिरनिया में जमीन के आरक्षण की कार्रवाई चल रही है। लेकिन स्थानीय विधायक विष्णु खत्री और अन्य ग्रामीण इसका विरोध कर रहे हैं।
पहले आदमपुर छावनी में चिह्नित की थी जमीन