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सॉरी, प्लीज और थैंक्यू... बिज़नेस कम्यूनिकेशन के मैजिकल वर्ड्स
सिटी रिपोर्टर. इंदौर
दिनभर में न जाने कितने मौके ऐसे आते हैं जब इन तीन शब्दों के इस्तेमाल से आप न सिर्फ अपना कम्यूनिकेशन बेहतर बना सकते हैं, बल्कि इनके इस्तेमाल से आपके काम भी आसान हो जाएंगे। बिज़नेस कम्यूनिकेशन में ये तीनों मैजिकल वर्ड्स कहे जाते हैं। अगर आप कॉर्पोरेट वर्ल्ड में हैं तो आपको बिजनेस और ई-मेल एटिकेट्स बहुत अच्छे से पता होना चाहिए। आपका फर्स्ट इम्प्रेशन है ई-मेल।
कॉर्पोरेट वर्ल्ड में भी अपने कलीग्स और टीम के साथ बात करने के तरीके आपकी इमेज या तो बनाएंगे या फिर बिगाड़ेंगे। सॉरी, प्लीज एंड थैंक्यू। इन तीन शब्दों का इस्तेमाल आप ज़रूर करें। लिफ्ट से निकल रहे हैं तो लिफ्टमैन को थैंक्यू बोलिए। किसी स्टेकहोल्डर से कम्यूनिकेट कर रहे हैं तो प्लीज वर्ड का सही इस्तेमाल कीजिए। अगर कलीग के साथ कोई आर्ग्यूमेंट हो रहा है तो सॉरी बोलने में देरी न करें। गलती आपकी नहीं है फिर भी अपना तर्क रखते हुए सॉरी का इस्तेमाल करें। अपनी बात रखें लेकिन पूरी विनम्रता के साथ। इन तीन शब्दों का इस्तेमाल ई-मेल लिखते वक्त भी करें।
बिजनेस में सबसे ज्यादा जो प्रॉब्लम फेस करना पड़ती है वो होता हे स्टेकहोल्डर्स के साथ कम्यूनिकेशन गैप। स्टेकहोल्डर कोई भी हो सकता है-कस्टमर, एम्प्लॉई, मैनेजमेंट या बोर्ड ऑफ डायरेक्टर। कम्पनी का कॉमन गोल होता है कम्पनी को आगे बढ़ाना और कम्पनी में काम कर रहे वर्कर्स को मोटिवेट करना लेकिन कभी-कभी आप ये विजन बोर्ड ऑफ डायरेक्टर को समझा नहीं पाते और कम्यूनिकेशन गैप की वजह से प्रॉब्लम क्रिएट हो जाती है। कभी-कभी आप इन्वेस्टर्स को भी कम्यूनिकेट नहीं कर पाते जिस वजह से कंपनी को लॉस होता है। आपके शब्दों से आपका विज़न कम्यूनिकेट होना चाहिए।
ये एटिकेट्स भी ज़रूरी
{गॉसिप का हिस्सा न बनें। चुप रहकर भी नहीं।
{अगर आप गौर से सुने जानो चाहते हैं तो औरों की बात भी गौर से सुनें।
{कमिटमेंट उतना ही करें जिसे आप निभा सकें।
{आउटफिट्स वैसे पहनें जिनमें आप कम्फर्टेबल रहें। अगर ऐसा नहीं हुआ तो आपका ध्यान कपड़ों में ही लगा रहेगा और बॉडी लैंग्वेज अंडर कॉन्फिडेंट लगेगी।
{जो बात आप प्रचारित नहीं करना चाहते उसे खुद भी डाइजेस्ट करें।
ई-मेल एटिकेट्स
{सब्जेक्ट लाइन क्लियर होनी चाहिए। ताकि सबजेक्ट से ही समझ में आ जाए कि ई-मेल किस बारे में है
{कुछ भी ह्यूमरस न लिखें।
{ई-मेल शॉट लिखें। बड़े ईमेल्स पढ़ना टाइम कंज्यूमिंग होता है।
आपके शब्दों से आपका विज़न समझ आए