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दागी और घोटाले के आरोपीबरसों से जमे हैं एमवाय में

एक वर्ष पहले
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महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय में कर्मचारियों की तैनाती का रोस्टर सालों से नहीं बदला है। राज्य शासन के आदेश और तबादला नीति का एमवायएच में पालन नहीं होने से स्टोर, क्रय शाखा और स्थापना शाखा में कई कर्मचारी लंबे समय से काम कर रहे हैं। भले ही इसका खामियाजा मरीज से लेकर शासन तक को भुगतना पड़े। अनियमितता और घोटाले के आरोपी भी नियमों को धता बताकर जमे हुए हैं।

20 साल से प्रतिनियुक्ति सौंप दी अहम जिम्मेदारी

एमवायएच में उप अधीक्षक का कोई पद नहीं है, फिर भी डॉ. डीके शर्मा को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई है। वे मूल रूप से लोक स्वास्थ्य विभाग के सहायक प्रोफेसर होने के साथ ही हड्‌डी रोग विशेषज्ञ हैं। एमवाय में 20 साल से प्रतिनियुक्ति पर हैं। मूल विभाग में प्रमोशन होने के बाद भी एमवाय में बने हुए हैं। उनके प्रमोशन पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि उन पर कर्मचारियों से मारपीट का केस हाई कोर्ट में लंबित है। यानी प्रमोशन के पहले पुराना रिकॉर्ड नहीं देखा गया।

दागी को सौंप रखा है खरीदी का जिम्मा

डॉ. वर्मा 5 साल से सेंट्रल मेडिकल स्टोर में पर्चेस का कामकाज भी देख रहे हैं। उनके खिलाफ ईओडब्ल्यू में प्रकरण दर्ज है। एचएलएल के कर्मचारी नवीन यादव को तत्कालीन अधीक्षक पीएस ठाकुर ने मरीजों से दवाइयों के बदले पैसे के लेने के आरोप में मेडिकल स्टोर से हटाया था।

वर्तमान में वह ई-हॉस्पिटल के बहाने स्टोर में गोपनीय तरीके से काम कर रहे हैं। रंजीत सिलावट 17 साल से सर्जिकल स्टोर में तैनात है। सिलावट मूलत: मेडिकल कॉलेज का कर्मचारी है, लेकिन अटैचमेंट पर एमवाय में है।

प्रबंधन ने वर्तमान में उसे सेंट्रल क्रय शाखा का प्रभारी बना रखा है। इसी तरह राकेश गोरसे मूलत: एमवायएच का कर्मचारी है, लेकिन डेपुटेशन पर मेडिकल कॉलेज में सेंट्रल मेडिकल स्टोर का प्रभारी है। मनोज सेमरे सालों से रोगी कल्याण समिति में नकद लेनदेन के प्रभारी हैं, जबकि उनके खिलाफ भ्रष्टाचार में एफआईआर तक हो चुकी है। यह काम देखते हुए सेमरे को 20 साल हो चुके हैं।

अधीक्षक को कार्रवाई के लिए कहेंगे

एमवाय अस्पताल में कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपने का काम अधीक्षक का है। वह अपनी सुविधा अनुसार ही कर्मचारियों की पदस्थापना करते हैं। यदि बड़े अस्पताल में नियम विरूद्ध या दागी कर्मचारी अहम पदों पर काबिज हैं तो हमें उनके नाम बताएं। अधीक्षक को कार्रवाई करने के लिए कहेंगे।

ज्योति बिंदल, डीन, एमजीएम मेडिकल कॉलेज, इंदौर

दागी कर्मचारियों को हटाया जाएगा

एमवाय अस्पताल में नियम विरूद्ध लंबे समय से एक ही पद पर कार्यरत कर्मचारियों की जानकारी लेंगे। जो कर्मचारी जांच में दोषी पाए गए हैं या जिनके खिलाफ जांच चल रही है, उन्हें महत्वपूर्ण पदों से हटाया जाएगा। इस मामले में संचालनालय और जीएडी के स्थापना संबंधी नीति-नियमों का पालन कराएंगे।

आकाश त्रिपाठी, संभाग आयुक्त, इंदौर

इस संबंध में चिकित्सा आयुक्त निशांत वरवड़े का कहना है कि एमवाय संबंधी प्रशासकीय निर्णय लेने के अधिकार
संभाग आयुक्त को हैं। अधीक्षक पीएस ठाकुर ने इस संबंध में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

{नियमानुसार कर्मचारी तीन साल से अधिक एक ही पद पर नहीं रह सकता**

एफआईआर दर्ज होने के बाद भी घपलों के आरोपियों को पद से नहीं हटाया**

मरीजों के साथ ही विभाग
को भी नुकसान

एमवायएच में दर्जनभर कर्मचारियों के एक ही जगह सालों से जमे होने से मरीजों को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। ये कर्मचारी अपने हिसाब से कामकाज करते हैं। मरीजों को जो सुविधाएं मिलनी चाहिए वह नहीं मिल पाती है। आर्थिक अनियमितता के आरोपियों को लेनदेन के महत्वपूर्ण काम सौंपने से शासन को भी चपत लगने की आशंका बनी रहती है। नियमानुसार दागी कर्मचारियों को ऐसे महत्वपूर्ण पदों पर काबिज नहीं किया जा सकता है।

क्या है
तबादला और स्थापना नीति

सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) ने स्वास्थ्य विभाग में तबादला और स्थापना के जो नीति-नियम बनाए हैं उसके मुताबिक पूरे सर्विस काल में क्रय, मेडिकल स्टोर, स्थापना सहित अन्य सेक्शन में एक ही जगह कोई कर्मचारी 3 वर्ष से अधिक पदस्थ नहीं रह सकता है। स्वास्थ्य संचालनालय द्वारा जारी गाइड लाइन के अनुसार 3 वर्ष बाद कर्मचारी को अन्य शाखा में या अन्य स्थान पर पदस्थ किया जाए। जो अधिकारी या कर्मचारी वित्तीय अनियमितता, शासकीय धन के दुरुपयोग या गबन के आरोपी हैं, उन्हें ऐसे पदों से हटाया जाए। एेसे कर्मचारियों को दोबारा उक्त पदों पर पदस्थ नहीं किया जाए। जिनके खिलाफ नैतिक पतन संबंधी प्रकरण लंबित हैं उनकी तैनाती कार्यपालिक पदों पर नहीं की जाए। जिनके खिलाफ जांच लंबित हो, उन्हें भी किसी शाखा के प्रभारी की जिम्मेदारी नहीं सौंपी जाए। प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर कर्मचारी को संबंधित पद से हटाया जाए।

बैक डेट में लाखों की खरीदी
की चल रही है जांच

हंसराज नामक कर्मचारी 20 साल से स्टोर कीपर है। जबकि बैक डेट में मनमाने तरीके से लाखों की खरीदी की में आरोपी है। उसके खिलाफ जांच चल रही है। नजीम खान को 10 साल से मेंटेनेंस का काम सौंप रखा है। ड्रेसर दीपक गौर को भी 8 साल से स्टेशनरी का कामकाज सौंप रखा है। वार्ड बॉय कन्हैया पाल 10 साल से लिनन स्टोर में लिपिक के रूप में रजाई, गादी, तकिए इत्यादि का हिसाब देखता-किताब है। कंपाउडर राजकुमार पांडे 12 साल से किचन प्रभारी है। इसी तरह क्लर्क जितेंद्र रावत 15 साल से इलेक्ट्रिक विभाग का प्रभारी है। टाइटर नामक कर्मचारी 20 साल से ट्रॉली सामान का इंचार्ज है।

स्टाफ की पदस्थापना को लेकर बड़े अस्पताल में बड़ी धांधली चल रही है। नियमानुसार तीन साल से अधिक कोई कर्मचारी एक ही विभाग में नहीं रह सकता लेकिन एमवायएच में कई कर्मचारी 10, 15 और 20 साल से एक ही काम संभाल रहे हैं। इतना ही नहीं, घपलों के आरोपियों को भी पद से नहीं हटाया गया है।

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