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प्लग एंड प्ले आधार पर पीथमपुर और देवास में भी बनेगा टेक्सटाइल पार्क
एक साल में दस यूनिट लगाने की कोशिश, हर यूनिट में तीन हजार लोगों को मिलेगा रोजगार
महिला रोजगार के लिए बड़ा कदम बढ़ाते हुए मप्र शासन ने प्लग एंड प्ले आधार पर पूरे प्रदेश में छोटे-छोटे टेक्सटाइल पार्क बनाने का फैसला लिया है। प्लग एंड प्ले का यह फैसला हाल ही में प्रमुख सचिव डॉ. राजेश राजौरा द्वारा देश के टेक्सटाइल हब तिरुपुर में किए गए दौरे के बाद लिया गया है। इस तरह के पार्क में पूरा आधारभूत ढांचा मप्र शासन द्वारा विकसित किया जाएगा और यूनिट लगाने वाले को केवल मशीन फिट कर काम शुरू करना होगा।
टेक्सटाइल सेक्टर में 60 से 70 फीसदी तक महिलाओं को रोजगार रहता है। इसके चलते शासन ने इस सेक्टर पर रोजगार के हिसाब से ध्यान देने का फैसला लिया है। सरकार ने फैसला लिया है कि पहले चरण में सालभर में इस तरह की करीब दस यूनिट विकसित करना है। हर यूनिट में करीब तीन हजार लोगों को रोजगार मिल सकेगा। पहले चरण में यह पार्क आचारपुरा (भोपाल), देवास, उज्जैन, बढियाखेड़ी (सीहोर) के साथ ही पीथमपुर में प्लानिंग में हैं। पीथमपुर में शासन दो तरह से योजना बना रहा है। इसमें छोटे टेक्सटाइल पार्क विकसित करने के साथ ही पीपीपी आधार पर 15 एकड़ में
बड़ा टेक्सटाइल पार्क बनाने की योजना है। यह तिरपुर में विकसित पार्क की तरह होगा, जहां पर एक ही जगह छोटी 70 यूनिट काम करती हैं और हजारों को रोजगार मिलता है। पीथमपुर में इसी थीम पर यह पार्क बनाने की योजना है।
तीन दिवसीय रेडीमेड गारमेंट एक्सपो में महिलाओं की भागीदारी तीन गुना तक बढ़ी
विश्वनाथ सिंह | इंदौर
रेडीमेड गारमेंट इंडस्ट्री में अब महिलाओं का प्रभाव बढ़ने लगा है। पिछली बार इंदौर रेडीमेड वस्त्र व्यापारी संघ द्वारा आयोजित गारमेंट एक्सपो में महिला मैन्यूफैक्चरर्स के 20 स्टॉल थे, इस बार संख्या बढ़कर 60 हो गई है। पहली बार एक्सपो में ऐसा हुआ है जब गर्ल्स टॉप और कुर्ता सेगमेंट को शामिल किया है। दो दिन में एक्सपो में नौ हजार के करीब व्यापारी पहुंच चुके हैं। एक्सपो में शहर की दो महिला मैन्यूफैक्चरर्स ऐसी भी शामिल हुई हैं, जिनमें से एक ने लंदन से पढ़ाई कर लौटने के बाद मात्र सालभर में ही खुद का ब्रांड लॉन्च कर दिया तो दूसरी ने ससुराल के 77 साल पुराने गारमेंट बिजनेस में हाथ बंटाना शुरू किया है।
महिलाओं के रोजगार और स्वरोजगार से जुड़ी दो खबरें... एक में सरकार कर रही मदद तो दूसरी में खुद सशक्त हो रही नारी
तिरुपुर से आएगा प्रतिनिधिमंडल
डॉ. राजौरा ने तिरुपुर दौरे के बारे में बताया कि वहां पर रूपा, लक्स, डॉलर जैसे कई बड़े उत्पादकों के साथ चर्चा कर उनसे उनकी जरूरतों की जानकारी ली गई है। अप्रैल में 40 से ज्यादा गारमेंट मैन्यूफैक्चरर्स का मप्र में दौरा भी संभावित है। वहीं देश के टॉप 5 एक्सपोर्ट्स में शामिल बेस्ट गारमेंट वाले भी मप्र में निवेश के लिए संभावनाएं देख रहे हैं। सीएम की मंशा है कि छोटे टेक्सटाइल पार्क बनने के साथ ही 20 बड़ी यूनिट भी टेक्सटाइल में निवेश कर प्लांट स्थापित करें, जिससे अधिक से अधिक लोगों को विशेषकर महिलाओं को रोजगार मिल सके।
ईशा खुद के ब्रांड के साथ पापा के बिजनेस में भी करती हैं मदद
एक्सपो में किड्स वेयर के अपने ब्रांड बिग चीज का स्टॉल लगाने वाली ईशा जैन बताती हैं सालभर पहले लंदन से फैशन डिजाइनिंग किया। तभी तय कर लिया था कि पापा के साथ कुछ समय काम कर खुद का अलग ब्रांड शुरू करूंगी। पापा के बिजनेस में छह साल पहले से मदद करने का काफी फायदा मिला। अब मार्केट तेजी से बदल रहा है। ऐसे में कलर पैलेट, फैशन फोरकास्ट को पहली बार मेरे ब्रांड के साथ इंदौर की गारमेंट इंडस्ट्री में शुरू किया है।
शहर में 77 साल पहले रेडीमेड कपड़ों को पहली बार लोगों के सामने पेश करने वाले कमल ड्रेसेस (बाद में नाम डिंग डांग हो गया) की अब चौथी पीढ़ी में बहू त्रिशा जैन कारोबार संभाल रही हैं। त्रिशा बताती हैं दो महीने पहले ही शादी हुई है। शादी से पहले ही तय कर लिया था कि ससुराल जाकर भी किड्स वेयर के गारमेंट बिजनेस को संभालना है। इसमें नयापन इसलिए नहीं लगा, क्योंकि मायके में भी पिता के साथ बिजनेस में हाथ बंटाया है।
त्रिशा शादी के 2 माह बाद से ससुराल में संभाल रहीं बिजनेस