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घर में गूंजता रहा 82 साल की मां का सवाल- कब घर लौटेंगे बेटे, बहू, बच्चे?

एक वर्ष पहले
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क्रिसेंट वाटर पार्क के रिजाॅर्ट में प|ी प्रीति, बेटी अनन्या और बेटे अद्वित उर्फ आदी के साथ मृत मिले साॅफ्टवेयर इंजीनियर अभिषेक सक्सेना (45) जिस रूम नंबर 211 में ठहरे थे। पुलिस काे वहां अभिषेक का लैपटॉप मिला। इसी टेबल पर सोडियम नाइट्रेट का डिब्बा था। यह सोडियम लैब में रासायनिक प्रयोग के लिए उपयोग होता है। इसके पास वजन ताैलने की इलेक्ट्राॅनिक वेइंग मशीन मिली। एफएसएल एक्सपर्ट ने मौका मुआयना करने के बाद बताया कि अभिषेक ने उक्त केमिकल की मात्रा तौलकर ग्लास में बराबर बांटी होगी। पहले दोनों बच्चों को केमिकल पिलाया, फिर प|ी को और बाद में खुद पीकर सो गए। अभिषेक के पास से नींद की गोलियों की स्ट्रिप भी मिली, जिसमें 10 गोलियां नहीं थीं। इससे आशंका जताई जा रही है कि नींद की गोलियों के डोज के साथ केमिकल लिया होगा। हालांकि असली कारण पोस्टमाॅर्टम रिपोर्ट के बाद सामने आएगा। प्रीति कम्प्यूटर पर आॅनलाइन काम करती थी। परिजनों ने बताया कि वह अमेजन की वेबसाइट के लिए काम करती थीं। वहीं, अभिषेक पलासिया इलाके की एक कंपनी में साॅफ्टवेयर इंजीनियर थे। दोनों बच्चे डीपीएस में पढ़ते थे।

मां को नहीं बताई मौत की खबर, गले लगकर भतीजी की रूलाई फूट पड़ी

सक्सेना दंपती और उनके बच्चों के शव देखकर परिजन बदहवास हो गए। वहीं, अपोलो डीबी सिटी के एल्डोरा अपार्टमेंट के फ्लैट नं. 804 में 82 वर्षीय सरोज सक्सेना को बेटे-बहू, पोता-पोती की मौत की खबर नहीं दी। भतीजी संध्या सक्सेना उनके पास पहुंचीं तो मां उन्हें गले लगाकर बोलीं कि बेटा-बेटी और पोता-पोती कब आएंगे? वो फोन भी नहीं उठा रहे? इस पर संध्या रो पड़ीं। बाद में उन्होंने बहाना बनाकर बात टाल दी।

रिजॉर्ट में मौत, घर में मातम

जिस भी पड़ोसी और रिश्तेदार को चारों की मौत की खबर मिली, वे सक्सेना दंपती के घर पहुंचे।

पड़ोसियों ने बताया- रिजर्व नेचर के थे सक्सेना, बहुत कम लोगों से था उनका संपर्क

डीबी अपोलो सिटी के एल्डोरा अपार्टमेंट के रहवासियों ने बताया कि अभिषेक चार साल पहले ही दिल्ली से इंदौर शिफ्ट होकर इस फ्लैट में रहने आए थे। वे रिजर्व नेचर के थे। वे ज्यादा किसी से बातचीत नहीं करते थे। इसलिए काफी कम लोगों से उनका संपर्क रहा। आत्महत्या के पीछे किसी को भी कोई पारिवारिक कारण नहीं लग रहा है। सभी को ऑफिशियल या बाहरी तनाव ही लग रहा है।

नौकरानियों ने बताया- मां के चरण स्पर्श कर खुशी-खुशी गए थे चारों

सक्सेना के घर में दो साल से काम करने वाली सुलोचना ने बताया कि पूरा परिवार हंसी-खुशी साथ रहता था। किसी को कोई समस्या नहीं थी। दोनों बच्चे कुछ दिन से बीमार थे। उनका मूड बदलने के लिए ही दंपती ने घूमने का प्लान बनाया था। बुधवार दोपहर करीब तीन बजे चारों लोग मां के चरण स्पर्श कर घर से कार से गए थे। उन्होंने पहले तिंछा फाॅल घूमकर आने की बात कही, लेकिन बाद में क्रिसेंट वाटर पार्क का प्लान किया। वहीं, यहीं काम करने वाली दूसरी नौकरानी निर्मला बाई ने बताया कि परिवार में कोई तनाव या समस्या नहीं थी कि वे ऐसा कदम उठा लें। बुधवार को चारों लोग अच्छे से खाना खाकर निकले थे। उनका आखिरी बार फोन मां सरोज के पास शाम करीब छह बजे आया था। अभिषेक ने यही कहा था कि मां आप चिंता ना करें। मैं परसों (शुक्रवार) पिता के श्राद्ध के लिए घर लौट आऊंगा। इसके बाद मां ने भी उन्हें काॅल नहीं किया। वे इंतजार में ही बैठी रह गईं।

सुलोचना बाई निर्मला बाई

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