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कर्ताधर्ताओं ने राजस्थान में बैठकर करोड़ों रुपए के वारे-न्यारे कर लिए**
को-ऑपरेटिव सेक्टर में फर्जीवाड़े के मास्टर माइंड विक्रमसिंह इंद्रोई और उसके साथियों ने राजस्थान में बैठकर इंदौर की संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी से करोड़ों के वारे-न्यारे किए। कर्ताधर्ताओं ने बड़ी चालाकी से पहले संभाग स्तर की सोसायटी बनाकर करीब चार हजार सदस्य बनाए। उन्हें ज्यादा रिटर्न का लालच देकर सेविंग, आरडी और एफडी अकाउंट के जरिए 25 करोड़ का फंड इकट्ठा किया। कुछ साल सदस्यों को जमा पूंजी पर ब्याज के साथ नियमित ट्रांजेक्शन भी किया। फिर सदस्यों के नाम पर फर्जी लोन दिखाकर 23 करोड़ निकाल लिए। सहकारिता विभाग द्वारा की गई जांच में मिले ई-मेल, डायरियां और दस्तावेज बताते हैं कि फर्जी ऋण की आड़ में बड़ी धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया।
एक ही दिन में 25 लाख का लोन
संजीवनी सोसायटी का पंजीयन 5 जनवरी 2016 को हुआ। जांच में सामने आया कि 30 नवंबर 2016 को एक ही दिन में आठ सदस्यों को 25 लाख का लोन दिया गया। 30 मार्च 2019 तक 2940 सदस्यों को 23 करोड़ 56 लाख 30 हजार का लोन दिखाया गया। 2016 से 2019 के बीच कई तारीखें ऐसी हैं, जिनमें एक ही दिन में 150 से 400 से ज्यादा सदस्यों को एक साथ 30 लाख से 62 लाख रुपए तक लोन मंजूर किया गया।
फर्जी लोन बता कम की सिल्लक
संस्था ने पंजीयन तारीख से 30 मार्च 2019 तक कुल 3920 सदस्य बनाए। इस दौरान उनसे कुल 25 करोड़ 95 लाख 76 हजार रुपए की राशि बतौर अमानत ली गई। 30 मार्च 2019 तक 2940 सदस्यों को कुल राशि 23 करोड़ 56 लाख 30 हजार रुपए का कर्ज देना दिखाया। जांच रिपोर्ट के मुताबिक हकीकत में केवल 28 लाख 16 हजार रुपए का ही ऋण बांटा गया। यानी 23 करोड़ 28 लाख 13 हजार का फर्जी कर्ज बताकर सिल्लक कम की गई। यही राशि बाद में संचालक डकार गए।
दोषियों के खिलाफ एफआईआर कराएंगे
संजीवनी क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी की जांच कराई थी। हमें जांच प्रतिवेदन मिल गया है। इसमें बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितता और धोखाधड़ी मिली है। हम प्रतिवेदन का अध्ययन कर रहे हैं। मामले में दोषी लोगों के खिलाफ पुलिस एफआईआर कराई जाएगी।
जगदीश कनोज, ज्वाइंट रजिस्ट्रार, सहकारिता
राजस्थान भेजे जाते थे रुपए
संजीवनी के संचालकों ने लुभावनी योजनाएं बताकर अलग-अलग शाखाओं में अमानतें हासिल की। पूरी राशि ओणम प्लाजा स्थित आईसीआईसीआई बैंक में जमा कराई गई। संस्था के नेपालसिंह राठौर, राजकुमार व्यास और अन्य ने संदीप भूरिया के जरिए सदस्यों को फर्जी ऋण नामे बताकर नकद फंड समय-समय पर राजस्थान भिजवाया।
गणेशपुरी शाखा में सारा खेल
सोसायटी के कर्ताधर्ताओं ने इंडस्ट्री हाउस के दफ्तर में ही एक सेक्शन गणेशपुरी ऋण शाखा के नाम से बना रखा था। सारी शाखाओं से होने वाला कलेक्शन इसी शाखा में जमा होता था। संजीवनी के लोग अपना कामकाज सॉफ्टवेयर पर करते थे। धोखाधड़ी की भनक नहीं लगे, इसलिए घोटाला करने के बाद संजीवनी के लोगों ने वह सॉफ्टवेयर भी नष्ट कर दिया।
बड़ा करने की थी प्लानिंग
ंसंजीवनी मल्टी स्टेट को-ऑपरेटिव सोसायटी लि. बाड़मेर राजस्थान के कर्ताधर्ताओं ने सेंट्रल
को-ऑपरेटिव रजिस्ट्रार से मप्र में काम की अनुमति मांगी थी। जब वहां से इनकार हो गया तो कर्ताधर्ताओं ने इंदौर संभाग में सोसायटी खोली। संस्था की 17 शाखाएं और एक जोनल कार्यालय खोला गया। शुरुआत में 51 सदस्यों को धोखे में रखकर उनके दस्तावेज लेकर संस्था गठित की।
धोखाधड़ी में 15 लोग शामिल
सहकारिता विभाग ने जांच में विक्रम सिंह इंद्रोई, किशनसिंह चुली, नेपाल सिंह राठौर और राजकुमार व्यास के साथ संचालक मंडल के छह सदस्य सहित 15 लोगों को अमानत में खयानत, आर्थिक अनियमितता, धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का दोषी पाया है। सभी के खिलाफ एफआईआर कराई जाएगी।
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